महागठबंधन (बिहार INDIA) की सीट शेयरिंग अंतिम चरण में है। राजद पिछले दो लोकसभा चुनावों में सीटों की समीक्षा करने के बाद 20-24 सीटों पर लड़ने का मन बना चुका है। कांग्रेस भी 9-12 सीट पर लड़ने को तैयार है। वहीं माले 2-3, सीपीआई-1 और सीपीएम-1 सीट पर लड़ेगी, यह करीब-करीब तय हो चुका है। पर राजद की वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और लोजपा (आर) प्रमुख चिराग पासवान की राजनीतिक गतिविधियों पर भी पैनी नजर है। सहनी को 1-2 और चिराग पासवान ने इच्छा जतायी तो 5-6 सीटें दी जा सकती हैं।
ऐसे में राजद और कांग्रेस अपनी-अपनी सीट की संख्या कम करेंगे। वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत राजद ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस 9 सीटों पर लड़ी थी। तब उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी महागठबंधन में थे। कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी को 5 और जीतन राम मांझी की पार्टी हम (से) को 3 सीट मिली थी। साथ ही मुकेश सहनी की वीआईपी को 3 और माले को 1 सीट दी गई थी। लेकिन 40 में से मात्र एक सीट किशनगंज से ही कांग्रेस उम्मीदवार मो. जावेद सांसद बन पाए थे।
राजद : वर्ष 2019 में 20 और वर्ष 2014 में 27 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वर्ष 2014 में राजद, कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन था। वर्ष 2019 में राजद 20 में से 1 सीट भी नहीं जीत सका था। वर्ष 2014 में 27 सीटों में से 4 सीटों अररिया, मधेपुरा, भागलपुर और बांका पर राजद की जीत हुई थी।
मजबूत सीटें : मधुबनी, झंझारपुर, दरभंगा, वैशाली, सीवान, महाराजगंज, सारण, उजियारपुर, बेगुसराय, खगड़िया, पाटलिपुत्र, बक्सर, काराकाट, जहानाबाद, गया, जमुई, शिवहर, अररिया, हाजीपुर, उजियारपुर, नवादा और महाराजगंज
कांग्रेस : वर्ष 2019 चुनाव में 9 सीटों पर लड़ा और 1 सीट पर जीता। वर्ष 2014 में 12 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2 सीटें किशनगंज और सुपौल जीती थी। अब कांग्रेस में शामिल तारिक अनवर तब एनसीपी के बैनर तले सांसद बने थे।
मजबूत सीटें : किशनगंज, सासाराम, औरंगाबाद, मधुबनी, वाल्मिकीनगर, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, हाजीपुर, समस्तीपुर और पटना साहिब
माले, सीपीआई और सीपीएम : माले ने वर्ष 2019 में सिर्फ आरा सीट से लड़ा और हार गई। वर्ष 2014 में तीनों वाम दल माले, सीपीआई और सीपीएम महागठबंधन में नहीं थे। इस बार माले आरा के साथ सीवान और काराकाट पर लड़ने की इच्छा सार्वजनिक कर चुकी है। वहीं सीपीआई बेगूसराय और सीपीएम महाराजगंज/समस्तीपुर सीट से लड़ना चाहती है।







