प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 6 मार्च को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) की अपनी 10 दिवसीय यात्रा के हिस्से के रूप में कोलकाता में 15,400 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. पांच दिनों के भीतर पश्चिम बंगाल का यह उनका दूसरा दौरा है. पीएम मोदी ने कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड खंड का उद्घाटन किया, जो पानी के नीचे मेट्रो सेवाओं में भारत के पहले उद्यम का संकेत है. इनके अलावा, पीएम मोदी ने रूबी हॉल क्लिनिक से रामवाड़ी खंड तक पुणे मेट्रो को भी राष्ट्र को समर्पित किया. इसमें एसएन जंक्शन मेट्रो स्टेशन से त्रिपुनिथुरा मेट्रो स्टेशन तक कोच्चि मेट्रो रेल चरण I विस्तार परियोजना (चरण आईबी); ताज ईस्ट गेट से मनकामेश्वर तक आगरा मेट्रो का विस्तार; और दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर का दुहाई-मोदीनगर (उत्तर) खंड शामिल है. दोपहर बाद, पीएम मोदी के पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करने की उम्मीद है, वहीं संदेशखाली भी स्थित है.
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ईस्ट-वेस्ट मेट्रो का 4.8 किलोमीटर लंबा हिस्सा 4,965 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और यह हावड़ा में भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन होगा – जो जमीनी स्तर से 30 मीटर नीचे है. यह गलियारा आईटी हब साल्ट लेक सेक्टर V जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करेगा.
यह मेट्रो जमीन से 33 मीटर नीचे और हुगली नदी के तल से 13 मीटर नीचे बनी ट्रैक पड़ दौड़ेगी।1984 में देश की पहली मेट्रो ट्रेन कोलकाता उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (ब्लू लाइन) में दौड़ी थी। 40 साल बाद एक बार फिर यहीं से देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो रेल चलेगी।
इसके लिए हावड़ा स्टेशन से महाकरण स्टेशन तक 520 मीटर लंबी टनल बनाई गई है, जिसमें दो ट्रैक बिछाए गए हैं। मेट्रो ट्रेन इस टनल को 80 किमी/घंटे की रफ्तार से सिर्फ 45 सेकेंड में पार कर लेगी। इससे हावड़ा और कोलकाता की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। रोज 7 से 10 लाख लोगों का सफर आसान होगा।
दुनिया में सबसे गहराई में मेट्रो, इसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन हैं
कुछ अंडरवॉटर मेट्रो रूट ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (ग्रीन लाइन) का हिस्सा हैं। इनमें हावड़ा मैदान से एस्प्लनेड तक 4.8 किमी रूट बनकर तैयार है। इसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन हैं- हावड़ा मैदान, हावड़ा स्टेशन, महाकरण और एस्प्लनेड। हावड़ा स्टेशन जमीन से 30 मीटर नीचे बना है। यह दुनिया में सबसे गहराई में बना मेट्रो स्टेशन है। अभी पानी के नीचे मेट्रो रूट लंदन और पेरिस में ही बना है।
बोरिंग मशीनों के नाम कंपनी के कर्मचारी की बेटियों के नाम पर
कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग) सैयद मो. जमील हसन बताते हैं कि 2010 में टनल बनाने का कॉन्ट्रैक्ट एफकॉन्स कंपनी को दिया। एफकॉन्स ने जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट से टनल बोरिंग मशीन (TBM) मंगाईं। इन मशीनों के नाम प्रेरणा और रचना हैं, जो एफकॉन्स के एक कर्मचारी की बेटियों के नाम पर हैं।
मिट्टी के सर्वे में ही 5-6 महीने गुजर गए
इस प्रोजेक्ट की दो सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। पहली खुदाई के लिए सही मिट्टी का चुनाव और दूसरी TBM की सेफ्टी। कोलकाता में हर 50 मीटर दूरी पर अलग-अलग तरह की मिट्टी मिलती है। टनल के लिए सही जगह पहचानने के लिए मिट्टी के सर्वे में ही 5-6 महीने गुजर गए। फिर 3 से 4 बार सर्वे के बाद तय हुआ कि हावड़ा ब्रिज के पास हुगली नदी के तल से 13 मीटर नीचे की मिट्टी में टनल बन सकती है।
2017 में पानी में सुरंग बनाने का काम शुरू किया गया था
रीअलाइनमेंट के बाद 2017 में TBM ने पानी में सुरंग बनाना शुरू किया। हुगली के नीचे टनल की खुदाई का काम 125 दिन में पूरा होना था, लेकिन उसे 67 दिन में पूरा कर लिया गया। 1 सितंबर, 2019 को TBM चंडी सियालदह से करीब आधा किलोमीटर दूर थी, तभी एक बड़े पत्थर से टकरा गई।
इससे टनल में बड़े पैमाने पर मिट्टी भर गई और बहू बाजार की कई इमारतें क्षतिगस्त हो गईं। इस घटना ने सभी को हिलाकर रखा दिया था। सैकड़ों परिवारों को होटलों में शिफ्ट करना पड़ा। हाईकोर्ट ने काम रोक दिया। जब कुछ महीने कोई धंसाव नहीं हुआ तो फरवरी 2020 में फिर काम शुरू हुआ।







