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आठ राज्य, 41 मजदूर और 15 दिन से जिदंगी की जद्दोजहद जारी, टनल में फंसे मजदूरों को बचाने का बना नया प्लान

UB India News by UB India News
November 27, 2023
in दुर्घटना, प्रदेश
0
उत्तराखंड में बड़ा हादसा ,निर्माणाधीन सुरंग का हिस्सा ढहा,40 मजदूर फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
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उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में पिछले 15 दिनों से फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए जारी बचाव अभियान पर रविवार (26 नवंबर) को भी विराम लगा हुआ है. पिछले तीन दिनों से इस बात की उम्मीद की जा रही है कि बचाव अभियान अंतिम चरण में है और किसी भी वक्त मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है, लेकिन 10 मीटर की आखिरी पाइप बिछाने का काम मुश्किल हो गया है. इसकी वजह से मजदूरों को बाहर निकलने का काम अटक गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह मजदूरों तक पहुंचने के लिए टनल के मलबे में ड्रिलिंग के लिए इस्तेमाल हो रही अमेरिका निर्मित ऑगर मशीन में आई खराबी है.

मजदूरों तक पहुंचने के लिए 80 सेंटीमीटर व्यास की पाइप 46.9 मीटर तक बिछा दी गई है. इसी के अंदर ऑगर मशीन के ड्रिलिंग ब्लेड्स को डालकर आगे की ओर ड्रिलिंग की जा रही थी, जहां शुक्रवार रात इस्पात की जाली रास्ते में होने की वजह से मशीन का ब्लेड टूट कर फंस गया है. अब इन हिस्सों को काटकर हटाने के लिए हैदराबाद से हवाई मार्ग के जरिए एक प्लाज्मा कटर मशीन मंगाई गई है.

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आगे मैन्युअल ड्रिलिंग करेगी सेना
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट की मानें तो अब आगे बचाव अभियान में मैन्युअल ड्रिलिंग का काम सेना के जवान करेंगे. बचाव कार्य को आगे बढ़ाने के लिए पाइप के अंदर से मशीन के हिस्से को पूरी तरह से हटाना आवश्यक है. श्रमिकों को बाहर निकालने का मार्ग तैयार करने के लिए मलबे में हाथ से ड्रिलिंग के जरिए पाइप डालने होंगे.

मैनुअल ड्रिलिंग से पहले ऑगर मशीन के फंसे हुए शाफ्ट और ब्लेड्स को निकालना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मशीन के टुकड़े सावधानी से नहीं निकाले गए तो इससे सुरंग में बिछाई गई पाइपलाइन टूट सकती है। इसके हैदराबाद से प्लाज्मा कटर मंगाया गया है। साथ ही टनल में फोन की लैंडलाइन भी डाली जाएगी। इससे मजदूर अपने परिवार से बात कर सकेंगे।

टनल में खुदाई के दौरान ऑगर मशीन का शाफ्ट टूट गया। शनिवार को इसे बाहर निकाला गया।
टनल में खुदाई के दौरान ऑगर मशीन का शाफ्ट टूट गया। शनिवार को इसे बाहर निकाला गया।

अब प्लान B: वर्टिकल ड्रिलिंग, लेकिन यह बेहद खतरनाक
इस बीच आज टनल के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू करने के किए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आज शाम तक इस पर काम शुरू हो सकता है। इस काम को सतलुज विद्युत निगम लिमिटेड (SVNL) अंजाम देगा। हालांकि, इसमें काफी खतरा बताया जा रहा है, क्योंकि नीचे टनल में मजदूर हैं। ऊपर से बड़ा होल कर नीचे जाने के लिए रास्ता बनाया जाएगा, इसमें काफी मलबा गिरने की आशंका है। इसमें भी कितना वक्त लगेगा, यह तय नहीं है।

टनल में वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए मशीनें सुरंग के ऊपर ले जाई गई हैं। यहां से नीचे की तरफ सीधी खुदाई होगी।
टनल में वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए मशीनें सुरंग के ऊपर ले जाई गई हैं। यहां से नीचे की तरफ सीधी खुदाई होगी।

अब जानिए हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग क्यों रुकी
दरअसल, 21 नवंबर से सिलक्यारा की तरफ से टनल में हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग की जा रही थी। इसमें काफी हद कामयाबी मिली। 60 मीटर के हिस्से में से 47 मीटर तक ड्रिलिंग के जरिए पाइप डाला जा चुका है। मजदूरों तक करीब 10-12 मीटर की दूरी रह गई थी, लेकिन शुक्रवार शाम को ड्रिलिंग मशीन के सामने सरिए आ जाने से ड्रिलिंग मशीन की शाफ्ट उसमें फंस गई।

जब मशीन से और प्रेशर डाला गया तो शाफ्ट टूट गई। इसका कुछ हिस्सा तोड़कर निकाला गया, लेकिन बड़ा हिस्सा अभी भी वहां अटका हुआ है। इसे मैनुअल ड्रिलिंग कर निकाला जाएगा, फिर आगे खुदाई की जाएगी। दरअसल, पाइप में एक ही व्यक्ति जा सकता है और खुदाई कर सकता है। इसलिए, ऐसा करने में काफी वक्त लग सकता है।

रेस्क्यू टीम ने ऑगर मशीन के हिस्से को काटकर बाहर निकाला, हालांकि अब भी ब्लेड के टुकड़े टनल में ही फंसे हैं।
रेस्क्यू टीम ने ऑगर मशीन के हिस्से को काटकर बाहर निकाला, हालांकि अब भी ब्लेड के टुकड़े टनल में ही फंसे हैं।

देखिए वो तस्वीर जिसने चिंता बढ़ा दी…

टनल के सिल्कियारा मुहाने के पास पानी का रिसाव बढ़ गया है, इससे रेस्क्यू टीम की चिंता बढ़ गई है।
टनल के सिल्कियारा मुहाने के पास पानी का रिसाव बढ़ गया है, इससे रेस्क्यू टीम की चिंता बढ़ गई है।

पहाड़ से होगी वर्टिकल ड्रिलिंग
इसके अलावा वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए पहाड़ी की चोटी पर सुरंग के ऊपर एक ड्रिल मशीन भेजी गई है. भारतीय सेना की ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ के समूह ‘मद्रास सैपर्स’ की एक इकाई बचाव कार्यों में सहायता के लिए रविवार को घटनास्थल पहुंची है.

शुक्रवार रात से ही रुकी हुई है ड्रिलिंग, अभी लगेगा और अधिक समय
सिलक्यारा में धंसी निर्माणाधीन सुरंग में ‘ड्रिल’ करने में इस्तेमाल की जा रही ऑगर मशीन के ब्लेड शुक्रवार रात मलबे में फंस गए थे, जिसके बाद अधिकारियों को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ा. इससे बचाव कार्य में कई दिन या कई सप्ताह और लगने की संभावना है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मलबे के शेष 10 या 12 मीटर हिस्से में हाथ से ‘ड्रिलिंग’ या ऊपर की ओर से 86 मीटर नीचे ‘ड्रिलिंग’ की जाएगी.

बचाव अभियान पर मंडरा रहा बर्फबारी का खतरा
उत्तराखंड के इस युद्ध स्तरीय बचाव अभियान पर इंद्र का कोप भी बरपने वाला है. मौसम विभाग ने सोमवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ बर्फबारी की संभावना व्यक्त की है. सिलक्यारा, बड़कोट उत्तरकाशी के वो इलाके हैं जहां भारी बर्फबारी होती है. पहाड़ी मिट्टी होने की वजह से बारिश के बाद हल्की होकर और धंसने लगती है.

ऐसा हुआ तो सुरंग के अंदर डाली गई पाइप जिस सहारे पर टिकी है उसमें दरार आ सकती है. यहां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे लोगों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी. अगर मौसम विभाग की चेतावनी के हिसाब से यहां बर्फबारी होती है तो निश्चित तौर पर रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित होगा. बर्फबारी के बाद बिजली की दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. साथ ही ठंड बढ़ने के कारण सुरंग में मजदूरों को भी दिक्कतें होंगी. इसलिए सेना के जवान आज रविवार को ड्रिलिंग के मुश्किल हिस्से को पूरा कर लेना चाहते हैं.

बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं मुख्यमंत्री धामी 
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पिछले कई दिनों से मौके पर डटे हुए हैं और खुद ही बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने उत्तरकाशी में अपना एक अस्थाई कैंप खोला है जहां से मुख्यमंत्री दफ्तर के बाकी काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक जिस पाइप के अंदर घुसकर मैनुअल ड्रिलिंग की जानी है उसमें पहले से फंसी ऑगर मशीन के कटे हुए हिस्से से बाहर आते ही हाथ से ड्रिलिंग शुरू होगी जो काफी मेहनत भरी और टाइम टेकिंग प्रक्रिया है.

पीएमओ भी रख रहा है लगातार निगरानी 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राज्य में चल रहे बचाव अभियान के बारे में हर रोज जानकारी ले रहे हैं. सूत्रों ने बताया है कि प्रधानमंत्री दफ्तर (PMO) भी लगातार बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है और राज्य सरकार से अपडेट ले रहा है.

बढ़ रही है परिजनों की चिंता
ऑगर मशीन के अगले हिस्से के टूट जाने के बाद काम बाधित है. इसकी वजह से अंदर फंसे हुए श्रमिकों के परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है. आपदा स्थल के आस-पास ठहरे हुए परिजन यहां स्थापित की गई कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी के जरिये अकसर श्रमिकों से बात करते करते हैं. मजदूरों तक एक 6 इंच की पाइप डाली गई है जिसके जरिए एनडीआरएफ के मनोचिकित्सक भी मजदूरों से बात कर उनकी मानसिक स्थिति ठीक रखने और रिलैक्स रहने की सलाह दे रहे हैं.  पाइप से इंडोस्कोपिक कैमरा भी डाला गया है जिससे अंदर के हालात देखे जा रहे हैं. सुरंग के अंदर मजदूर कई गेम्स खेल कर खुद को रिलैक्स रख रहे हैं और नियमित व्यायाम भी करते हैं.

आठ राज्यों के मजदूरों में सबसे अधिक झारखंड के

फंसे हुए श्रमिकों में आठ राज्यों के मजदूर हैं जिनकी जिदंगी की जद्दोजहद जारी है. इनमें सबसे अधिक झारखंड के हैं. झारखंड के 15 लोग अंदर सुरंग में फंसे हैं, जबकि यूपी के 8, उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का एक , बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2 और ओडिशा के 5 मजदूर सुरंग में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.

दिवाली के दिन अचानक धंस गई थी टनल
आपको बता दें कि दिवाली के दिन 12 नवंबर (रविवार) को निर्माणाधीन सुरंग भूस्खलन के बाद धंस गई थी,जिसमें 41 मजदूर फंस गए हैं. दुर्घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी अत्यधिक भारी मशीनों से भी मलबे को नहीं हटाया जा सका है और एक भी मजदूर बाहर नहीं निकाल पाए हैं. इसकी वजह से परिजनों में निराशा और नाराजगी बढ़ रही है. यह टनल महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना का हिस्सा है, जो बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पहल का हिस्सा है.

अब तक क्या हुआ?

24 नवंबर: सुबह ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिसके चलते पाइप मुड़ गया। स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइप के मुड़े हुए हिस्से को बाहर निकाल लिया गया। ऑगर मशीन को भी नुकसान हुआ था, उसे भी ठीक कर लिया गया।

इसके बाद ड्रिलिंग के लिए ऑगर मशीन फिर मलबे में डाली गई, लेकिन टेक्निकल ग्लिच के चलते रेस्क्यू टीम को ऑपरेशन रोकना पड़ा। उधर, NDRF ने मजदूरों को निकालने के लिए मॉक ड्रिल की।

23 नवंबर: अमेरिकी ऑगर ड्रिल मशीन तीन बार रोकनी पड़ी। देर शाम ड्रिलिंग के दौरान तेज कंपन होने से मशीन का प्लेटफॉर्म धंस गया। इसके बाद ड्रिलिंग अगले दिन की सुबह तक रोक दी गई। इससे पहले 1.8 मीटर की ड्रिलिंग हुई थी।

22 नवंबर: मजदूरों को नाश्ता, लंच और डिनर भेजने में सफलता मिली। सिलक्यारा की तरफ से ऑगर मशीन से 15 मीटर से ज्यादा ड्रिलिंग की गई। मजदूरों के बाहर निकलने के मद्देनजर 41 एंबुलेंस मंगवाई गईं। डॉक्टरों की टीम को टनल के पास तैनात किया गया। चिल्यानीसौड़ में 41 बेड का हॉस्पिटल तैयार करवाया गया।

21 नवंबर: एंडोस्कोपी के जरिए कैमरा अंदर भेजा गया और फंसे हुए मजदूरों की तस्वीर पहली बार सामने आई। उनसे बात भी की गई। सभी मजदूर ठीक हैं। मजदूरों तक 6 इंच की नई पाइपलाइन के जरिए खाना पहुंचाने में सफलता मिली। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हुई।

केंद्र सरकार की ओर से 3 रेस्क्यू प्लान बताए गए। पहला- ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई तो रेस्क्यू में 2 से 3 दिन लगेंगे। दूसरा- टनल की साइड से खुदाई करके मजदूरों को निकालने में 10-15 दिन लगेंगे। तीसरा- डंडालगांव से टनल खोदने में 35-40 दिन लगेंगे।

20 नवंबर: इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट ऑर्नल्ड डिक्स ने उत्तरकाशी पहुंचकर सर्वे किया और वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए 2 स्पॉट फाइनल किए। मजदूरों को खाना देने के लिए 6 इंच की नई पाइपलाइन डालने में सफलता मिली। ऑगर मशीन के साथ काम कर रहे मजदूरों के रेस्क्यू के लिए रेस्क्यू टनल बनाई गई। BRO ने सिलक्यारा के पास वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़क बनाने का काम पूरा किया।

19 नवंबर: सुबह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड CM पुष्कर धामी उत्तरकाशी पहुंचे, रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और फंसे लोगों के परिजनों को आश्वासन दिया। शाम चार बजे सिलक्यारा एंड से ड्रिलिंग दोबारा शुरू हुई। खाना पहुंचाने के लिए एक और टनल बनाने की शुरुआत हुई। टनल में जहां से मलबा गिरा है, वहां से छोटा रोबोट भेजकर खाना भेजने या रेस्क्यू टनल बनाने का प्लान बना।

18 नवंबर: दिनभर ड्रिलिंग का काम रुका रहा। खाने की कमी से फंसे मजदूरों ने कमजोरी की शिकायत की। PMO के सलाहकार भास्कर खुल्बे और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल उत्तरकाशी पहुंचे। पांच जगहों से ड्रिलिंग की योजना बनी।

17 नवंबर: सुबह दो मजदूरों की तबीयत बिगड़ी। उन्हें दवा दी गई। दोपहर 12 बजे हैवी ऑगर मशीन के रास्ते में पत्थर आने से ड्रिलिंग रुकी। मशीन से टनल के अंदर 24 मीटर पाइप डाला गया। नई ऑगर मशीन रात में इंदौर से देहरादून पहुंची, जिसे उत्तरकाशी के लिए भेजा गया। रात में टनल को दूसरी जगह से ऊपर से काटकर फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्वे किया गया।

16 नवंबर: 200 हॉर्स पावर वाली हैवी अमेरिकन ड्रिलिंग मशीन ऑगर का इंस्टॉलेशन पूरा हुआ। शाम 8 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ। रात में टनल के अंदर 18 मीटर पाइप डाले गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की रिव्यू मीटिंग की।

15 नवंबर: रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत कुछ देर ड्रिल करने के बाद ऑगर मशीन के कुछ पार्ट्स खराब हो गए। टनल के बाहर मजदूरों के परिजनों की की पुलिस से झड़प हुई। वे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी से नाराज थे। PMO के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली से एयरफोर्स का हरक्यूलिस विमान हैवी ऑगर मशीन लेकर चिल्यानीसौड़ हेलीपैड पहुंचा। ये पार्ट्स विमान में ही फंस गए, जिन्हें तीन घंटे बाद निकाला जा सका।

14 नवंबर: टनल में लगातार मिट्टी धंसने से नॉर्वे और थाईलैंड के एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई। ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रॉलिक जैक को काम में लगाया। लेकिन लगातार मलबा आने से 900 एमएम यानी करीब 35 इंच मोटे पाइप डालकर मजदूरों को बाहर निकालने का प्लान बना। इसके लिए ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रॉलिक जैक की मदद ली गई, लेकिन ये मशीनें भी असफल हो गईं।

13 नवंबर: शाम तक टनल के अंदर से 25 मीटर तक मिट्टी के अंदर पाइप लाइन डाली जाने लगी। दोबारा मलबा आने से 20 मीटर बाद ही काम रोकना पड़ा। मजदूरों को पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन और खाना-पानी मुहैया कराया जाना शुरू हुआ।

12 नवंबर: सुबह 4 बजे टनल में मलबा गिरना शुरू हुआ तो 5.30 बजे तक मेन गेट से 200 मीटर अंदर तक भारी मात्रा में जमा हो गया। टनल से पानी निकालने के लिए बिछाए गए पाइप से ऑक्सीजन, दवा, भोजन और पानी अंदर भेजा जाने लगा। बचाव कार्य में NDRF, ITBP और BRO को लगाया गया। 35 हॉर्स पावर की ऑगर मशीन से 15 मीटर तक मलबा हटा।

 

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