उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 18 नवम्बर को हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स बनाने, बेचने और रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया. केवल निर्यात होने वाले खाद्य पदार्थों को इस बैन से मुक्त रखा गया है. राज्य के तमाम जिलों में खाद्य विभाग के अधिकारी लगातार छापे मार कर हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट को ज़ब्त कर रहे हैं. अब बिहार और महाराष्ट्र में भी हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुरू हो गई है. गुरुवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चिट्ठी लिखकर बिहार में हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर पाबंदी लगाने की मांग की. गिरिराज सिंह का कहना है कि हलाल सर्टिफिकेट देने का धंधा एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और इस पैसे का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है. गिरिराज सिंह ने कहा कि हलाल प्रोडक्ट के नाम पर इस्लामीकरण की कोशिश हो रही है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. गिरिराज सिंह की मांग पर नीतीश कुमार तो कुछ नहीं बोले लेकिन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं, बीजेपी को सिर्फ़ धार्मिक भावनाएं भड़काना, हिंदू मुसलमानों को लड़ाना आता है.
तृणमूल कांग्रेस के नेता माजिद मेमन ने हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट बैन करने को ग़लत बताया. माजिद मेमन ने कहा कि हलाल प्रोडक्ट ग़ैर मुसलमानों के लिए हैं ही नहीं, इसलिए जो लोग नहीं ख़रीदना चाहते, वो हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट न ख़रीदें, बैन करने की क्या ज़रूरत है? कांग्रेस के नेता हुसैन दलवाई ने भी महाराष्ट्र में हलाल प्रोडक्ट बैन करने की मांग का विरोध किया. हुसैन दलवाई ने कहा कि बीजेपी नेता चुनाव जीतने के लिए समाज को बांटने वाले मुद्दे उछालते हैं. उन्होंने कहा कि हलाल प्रोडक्ट खाना किसी के लिए ज़रूरी नहीं, ये अपनी अपनी पसंद का मामला है. योगी के फैसले के बाद अब सभी राज्यों में हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने की मांग उठेगी और इससे दिक्कत उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को होगी. जिन राज्यों में विरोधी दलों की सरकारें हैं, वहां समस्याएं पैदा होंगी. सबसे ज्यादा समस्या नीतीश कुमार को होगी क्योंकि हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल मुसलमान करते हैं. नीतीश और तेजस्वी ऐसा कोई काम नहीं कर सकते जिससे मुसलमान नाराज हो जाएं. बिहार में मुस्लिम वोटर्स की तादाद काफी है, लेकिन साफ दिखाई दे रहा है कि गिरिराज सिंह जैसे नेता इसे मुद्दा बनाएंगे. वो पूछेंगे कि vegetarian प्रोडक्ट्स पर हलाल सर्टिफिकेट की मोहर क्यों लगती है? इससे होने वाली कमाई कहां जाती है? तो नीतीश कुमार को जवाब देना मुश्किल होगा. महाराष्ट्र में ये मसला इतना बड़ा नहीं है. वहां राज ठाकरे भी हलाल प्रोडक्ट्स को बैन करने की मांग पिछले कई बरसों से कर रहे हैं, समस्या यहां उद्धव ठाकरे को होगी, कि वो इस मसले पर क्या स्टैंड लेंगे?







