देश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा मुद्दा छाया हुआ है, वह है संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पास कराना. दरअसल, संसद का मानसून सत्र नजदीक है और इससे पहले दिल्ली से लेकर मुंबई और कोलकाता तक बैठकों का दौर तेज हो गया है. जिससे राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा है कि सरकार किसी भी तरह से इस सत्र में इस बिल को पेश कर पास करवाने की जुगत में लगी है. आइए आपको बीजेपी के चाणक्य अमित शाह की इस मसले पर उनकी बैक-चैनल से चल रही रणनीति और बहुमत का पूरा गणित समझाते हैं.
संविधान संशोधन विधेयक की जरूरत क्यों पड़ी?
जानकारी के मुताबकि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पेश हुआ था, लेकिन सरकार उस दिन जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं जुटा पाई थी. यह विधेयक परिसीमन और महिलाओं के लिए 33% प्रतिनिधित्व से जुड़ा बताया जा रहा है. अब जब इस बार का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है में सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने से जुड़ा एक नया प्रस्ताव ला सकती है. बताया जा रहा है कि पिछली बार मिली मात के बाद सरकार इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.
क्या अमित शाह सच में बैक-चैनल बातचीत कर रहे हैं?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश का आरोप है कि गृहमंत्री अमित शाह अप्रैल की हार का हिसाब बराबर करने के लिए विपक्षी सांसदों और विधायकों को तोड़ने में जुटे हैं. कांग्रेस नेता का ये दावा है कि यह पूरा अभियान सरकारी-निजी संसाधनों के सहारे चलाया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को लुभाने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं. हालांकि ये अभी केवल कांग्रेस या विपक्ष के आरोप हैं. बता दें बीजेपी या गृह मंत्रालय की ओर से इस बारे में अभी तक कोई औपचारिक खंडन नहीं किया गया है.
उद्धव गुट में क्या टूट-फूट हो रही है?
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के 9 में से 6 सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरें आई हैं. इन्हीं में से कुछ बागी सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होकर हाल में दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी अमित शाह और बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात हुई थी. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है. जबकि चर्चा यहां तक है कि इनमें से दो सांसदों को मंत्री पद से नवाजा जा सकता है. हालांकि यह अभी अटकलों के स्तर पर ही है, फिलहाल किसी पक्ष की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
एनसीपी के दोनों गुट आपस में क्यों मिल रहे हैं?
महाराष्ट्र में एनसीपी दो हिस्सों में बंटी है एक अजित पवार गुट (महायुति का हिस्सा) और दूसरा शरद पवार गुट यानी एनसीपी (एसपी) का जो विपक्ष में है. हाल में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर एक बैठक हुई, जिसमें अजित पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के साथ-साथ शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी पहुंचे. हालांकि जयंत पाटिल ने सफाई दी कि यह मुलाकात किसी नगर परिषद से जुड़े मामले तक सीमित थी, लेकिन तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने कयासों को हवा जरूर दे दी. साथ ही ताजा खबर है कि शरद पवार गुट की पार्टी महिला आरक्षण और सरकार को अपना समर्थन देगी.







