आज देश-विदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार दीपावली बहुत ही शुभ योग में मनाई जाएगी। दिवाली पर 5 तरह के राजयोगों का निर्माण होगा इसलिए इस बार की दिवाली बहुत ही खास रहने वाली है। इस साल की दिवाली सौभाग्य योग और स्वाति नक्षत्र में है. इस सुंदर संयोग में दिवाली की लक्ष्मी पूजा होगी, जो आपके लिए शुभ और उन्नतिदायक होगी. जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कच्छ से लेकर अरुणाचल तक आतिशबाजी हो रही है। घरों और मंदिरों को फूलों और लाइटों से सजाया गया है। शाम को हर जगह दीये जलाए जाएंगे। पूरे असम में काली पूजा की तैयारियां चल रही हैं। काली मंदिरों को साफ सुथरा और सजाने का काम जारी है।
आज पूजा का मुहूर्त शाम के समय में है. कार्तिक अमावस्या को प्रदोष काल में दिवाली की पूजा करना शुभ होता है. इसके अलावा निशिता काल में भी लक्ष्मी पूजा की जा सकती है. दिवाली पर लक्ष्मी मंत्रों का जाप करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है.
दिवाली 2023 शुभ मुहूर्त
कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरूआत: आज, दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से
कार्तिक अमावस्या तिथि की समाप्ति: कल, दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर
दिवाली लक्ष्मी पूजा का शाम का मुहूर्त: शाम 05:39 बजे से शाम 07:35 बजे तक
दिवाली लक्ष्मी पूजा रात का मुहूर्त: रात 11:39 बजे से देर रात 12:32 बजे तक
स्वाति नक्षत्र: आज, प्रात:काल से कल 02:51 एएम तक.
सौभाग्य योग: आज शाम 04 बजकर 25 मिनट से कल दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक
दिवाली 2023 पूजा सामग्री
माता लक्ष्मी, गणेश जी की नई मूर्ति, अक्षत्, सिंदूर, कुमकुम, रोली, चंदन, लाल फूल, कमल और गुलाब के फूल, माला, केसर, फल, पान का पत्ता, सुपारी, कमलगट्टा, धान का लावा, बताशा, मिठाई, पीली कौड़ियां, शहद, इत्र, गंगाजल, दूध, दही, तेल, शुद्ध घी, खीर, मोदक, लड्डू, पंच मेवा, कलावा, पंच पल्लव, सप्तधान्य, एक कलश, पीतल का दीपक, मिट्टी का दीपक, रुई की बत्ती, लौंग, इलायची, दूर्वा, लकड़ी की चौकी, आम के पत्ते, साफ आटा, आसन के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा, एक नारियल, लक्ष्मी और गणेश के सोने या चांदी के सिक्के, धनिया आदि.
मां लक्ष्मी का मंत्र
ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:॥
धन की देवी की दुनिया में आने की कहानी:समुद्र मंथन का आठवां रत्न लक्ष्मी
आज लक्ष्मी पूजा का महापर्व दीपावली है। लक्ष्मी यानी धन की देवी। दीपावली को लेकर कोई 7 कहानियां हैं। सबसे पहली मान्यता धरती पर लक्ष्मी के प्रकट होने की है। मार्कंडेय पुराण कहता है कार्तिक अमावस्या की रात में जब चारों ओर अंधेरा था, तब एक देवी कमल के फूल पर बैठी प्रकट हुईं, उनके आते ही चारों ओर उजाला हो गया। ये देवी लक्ष्मी थीं।
श्रीमद् भागवत पुराण कहता है समुद्र मंथन से आठवें रत्न के रूप में लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं। वो दिन भी कार्तिक अमावस्या का था, समुद्र से प्रकट होकर उसी दिन लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पति के रूप में चुन लिया। दोनों का विवाह हो गया।
लक्ष्मी के प्रकट होने से भगवान महावीर के महानिर्वाण तक दीपावली को लेकर कई कहानियां हैं। आज दीपावली पर लक्ष्मी के प्रकट होने को व्यवहारिक पक्ष को समझते हैं।
सबसे पहले वो 7 कारण, जिनके लिए हम दीपावली का उत्सव मनाते हैं….
- इस दिन समुद्र मंथन से लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
- देवी दुर्गा ने मां काली का रूप लेकर राक्षसों का संहार किया।
- वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन कदम से तीनों लोक नाप लिए।
- भगवान राम वनवास से लौटकर अयोध्या आए।
- भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मार कर 16,100 महिलाओं को उसकी कैद से छुड़ाया।
- महाभारत के युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ और इंद्रप्रस्थ की स्थापना हुई।
- भगवान महावीर को महानिर्वाण की प्राप्ति हुई।
ये है अलक्ष्मी से जुड़ी कथा
अलक्ष्मी से जुड़ी कई लोक कथाएं हैं। एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, समुद्र मंथन से 14 मुख्य रत्न निकले थे, लेकिन इनके बीच-बीच में कई उपरत्न भी निकले थे। इन्हीं उपरत्नों में से एक अलक्ष्मी भी थीं।
कुछ मान्यताओं में वारुणी यानी मदिरा लेकर निकलने वाली स्त्री को ही अलक्ष्मी माना गया है। अलक्ष्मी की उत्पत्ति भी समुद्र से हुई थी, इस वजह से अलक्ष्मी और महालक्ष्मी को बहन माना जाता है।
उद्दालक ऋषि से हुआ था देवी अलक्ष्मी का विवाह
अलक्ष्मी का विवाह उद्दालक नाम के ऋषि से हुआ था। जब उद्दालक मुनि विवाह के बाद देवी अलक्ष्मी को लेकर अपने आश्रम गए तो अलक्ष्मी ने उस आश्रम में प्रवेश करने से मना कर दिया। मुनि ने देवी से आश्रम में न आने का कारण पूछा तो अलक्ष्मी ने बताया था कि वह किन घरों में वास करती हैं और किन घरों में वह प्रवेश भी नहीं करती हैं।
किन घरों में होता है अलक्ष्मी का वास
देवी अलक्ष्मी ने उद्दालक मुनि से कहा कि मैं सिर्फ उन घरों में जाती हूं, जहां साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता हैं, जहां के लोग लड़ाई-झगड़ा करते रहते हैं, जो लोग गंदे कपड़े पहनते हैं, जहां अधर्म या गलत काम होते हैं।
किन घर में नहीं जाती हैं अलक्ष्मी
उद्दालक ऋषि को अलक्ष्मी ने आगे बताया कि जिन घरों में हमेशा साफ-सफाई रहती है, यहां को लोग सुबह जल्दी उठते हैं, जहां पूजा-अर्चना होती है, जो लोग सफाई और पवित्रता के साथ रहते हैं, ऐसी जगहों पर देवी अलक्ष्मी प्रवेश नहीं कर पाती हैं। धार्मिक घरों में देवी लक्ष्मी का अधिकार होता है।
घर के बाहर जलाएं अलक्ष्मी के लिए दीपक
दीपावली की रात घर के अंदर को देवी लक्ष्मी के लिए दीपक जलाने चाहिए, लेकिन घर से थोड़ी दूर देवी अलक्ष्मी के लिए दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाकर देवी अलक्ष्मी से प्रार्थना करें कि आप हमारे घर से दूर रहें।
भारत के अलावा दुनिया के इन देशों में भी धूमधाम से मनाई जाती है दिवाली
रोशनी का त्योहार, दिवाली न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में लाखों लोगों के दिलों में एक अलग जगह बनाया हुआ है। वहीं इस साल दिवाली 2023, 12 नवंबर को मनाई जाने वाली है। भारत में इस पर्व के एक विशेष महत्व है। लोग सालभर लोग इस त्योहार का इंतजार करते हैं।
रामयण के अनुसार इस दिन भगवान राम अयोध्या नगरी को लौटे, उनके आने की खुशी में लोगों ने दीपमाला करके स्वागत किया था। इसलिए ये त्योहार पर पूरा भारत दीयों की रोशनी से जगमगा उठता है। खासकर अयोध्या में तो दिवाली का नजारा ही अलग होता है। हालांकि पूरे भारत में इस त्योहार को धूम धाम से मनाया जाता है। वहीं भारत के अलावा भी कई देशों में इस त्योहार को महत्व दिया गया है।
जपान में अलग अंदाज में मनाई जाती है दिवाली
जापान में दिवाली अलग अंदाज में मनाई जाती है। यहां लोग बगीचों में जाकर दिवाली के त्योहार को सेलिब्रेट करते नजर आते हैं। दीए की जगह लोग यहां रंगीन लालटेन का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही पेड़ों को सजाते हैं। जापान के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से घर में सुख- समृद्धि और प्रगति होती है।
मलेशिया
जपान के अलावा मलेशिया में दिवाली को हरि दिवाली के नाम से जाना जाता है। यहां के लोग दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। हालांकि, हिंदू आबादी ही दिवाली का त्योहार मनाती है। आंकड़ों के अनुसार मलेशिया की कुल आबादी 3.5 करोड़ के करीब है, जिसमें हिंदू आबादी कुल 21 लाख के करीब बताई जाती है।
श्रीलंका
वहीं भारत के पडौसी देश श्रीलंका का नाम रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है। श्रीलंका में भी बड़ी संख्या में हिन्दू रहते हैं, यहां लोग दिवाली को लैम क्रियॉन्ग के नाम से मनाते हैं। यहां दिवाली का तरीका थोड़ा अलग है।
भारत के साथ ही अमेरिका में भी दिवाली की धूम, न्यूयॉर्क के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा
देशभर में तो इस वक्त दिवाली की धूम मची ही हुई है, इसके अलावा अमेरिका में भी इस त्योहार का क्रेज देखा जा रहा है. अमेरिका में हैलोवीन के बाद दिवाली मनाई जाती है. पिछले कुछ सालों में अमेरिका में दिवाली को काफी अच्छे तरीके से सेलिब्रेट किया जा रहा है. कैलिफोर्निया का डिजनीलैंड हो या फिर न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर, हर जगह इस वक्त दिवाली की धूम मची हुई है. इतना ही नहीं व्हाइट हाउस में भी दिवाली मनाई जा रही है.
मेयर एरिक एडम्स ने जून में घोषणा की थी कि अब न्यूयॉर्क में भी दिवाली पर स्कूल की छुट्टी होगी, जिसके चलते इस बार न्यूयॉर्क के स्कूलों में दिवाली की छुट्टी दी गई है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 28 वर्षीय काजरी साहा ने कहा कि उनका मानना है कि देश के कुछ हिस्सों में हैलोवीन उत्सव के कारण दिवाली फीकी लग सकती है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि किसी दूसरे देश में रहने के बाद ये उम्मीद करना नॉर्मल बात है. काजरी साहा ने कहा कि मैं अपने दोस्तों के साथ हर साल दिवाली सेलिब्रेट करती हूं
न्यूयॉर्क में दिवाली पर छुट्टी की घोषणा
मालूम हो कि दिवाली के त्योहार के मौके पर न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने पहली बार स्कूलों में एक दिन की दिवाली छुट्टी की घोषणा की है. उन्होंने इस बात का एलान करते हुए कहा था कि यह भारतीयों के लिए खुशी की बात है, इसके लिए कम्यूनिटी ने सालों तक लगातार कोशिश की है. न्यूयॉर्क के स्कूलों में दस लाख छात्र पढ़ते हैं और अब न्यूयॉर्क के स्कूल कैलेंडर में भी दिवाली की छुट्टियां लिखी मिलेंगी. अमेरिका में भारतीय छात्रों के लिए दिवाली सेलिब्रेट करना अपनी संस्कृति से जुड़े रहना है और यही वजह है कि ये त्योहार सब लोगों को एक साथ जोड़ता है.







