हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से कनाडा द्वारा भारत पर लगाए गए आरोप से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. कुछ हफ्तों पहले ही कनाडा को दिल्ली में अपने उच्चायोग से कर्मचारियों को वापस बुलाने के लिए कहा था. ऐसे में भारत ने कनाडा को ये चेतावनी भी दी थी कि यदि वो अपने राजनयिकों को वापस नहीं बुलाता है तो वो अपने उच्चायोग से कर्मचारियों को वापस बुला सकता है. भारत ने कहा था कि अगर कनाडा ऐसा नहीं करता है तो भारत उन उच्चायुक्तों को दी जाने वाली डिप्लोमैटिक इम्युनिटी यानी राजनयिक सुरक्षा वापस ले लेगा.
जिसके बाद अब कनाडा ने अपने 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया है. हालांकि कनाडा के अधिकारियों ने भारत की इस चेतावनी को ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ भी बताया था. कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो ने इस मुद्दे पर कहा था कि इस तरह की घटनाओं से दुनिया के सभी देशों को चिंता करना चाहिए.
इन सभी आरोप-प्रत्यारोप के बीच वियना संधि पर काफी चर्चाएं हो रही हैं. तो चलिए आज इस स्टोरी में जानते हैं क्या है वियना संधि और कनाडा क्यों लगा रहा है इसके उल्लंघन का आरोप.
क्या है वियना संधि?
वियना संधि एक ऐसा कन्वेंशन है जो आजाद और संप्रभु देशों के बीच राजनयिक बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करती है. इस कन्वेंशन का लक्ष्य ‘राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के विकास’ को सुनिश्चित करना है.
वियना संधि के मुताबिक किसी भी देश के राजनयिकों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता है. इस संधि के आधार पर ही राजनयिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का प्रावधान किया गया है. अप्रैल 1964 में इस संधि पर काम शुरू हुआ था. वहीं इस संधि के तहत कुल 54 आर्टिकल हैं और अब तक इस संधि पर दस्तखत कर 192 देशों ने इसके पालन के लिए अपनी सहमति जताई हुई है. भारत ने इस संधि पर 1965 में हस्ताक्षर किए थे.
बता दें वियना संधि सिर्फ राजनयिकों पर ही नहीं बल्कि सैन्य अफसरों और सैन्य विभाग के आम कर्मचारियों पर भी लागू होती है जो दूसरे देश के राजनयिक मिशनों में तैनात होते हैं.
कनाडा ने क्यों अपने राजनयिकों को बुलाया वापस?
कनाडा में भारत के जितने डिप्लोमैटिक हैं, कनाडा ने भारत में उससे बहुत ज्यादा डिप्लोमैट्स तैनात किए हैं. ऐसे में जब ट्रूडो ने भारत पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण होने लगें तो भारत ने राजनयिकों की संख्या में बराबरी की मांग रखी थी.
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो समानता लाने के लिए भारत ने अपने इस फैसले के बारे में कनाडा को लगभग एक महीने पहले अवगत करा दिया था और इसे लागू करने की तारीख 10 अक्टूबर थी, लेकिन इसे 20 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया था क्योंकि समानता लागू करने के तौर-तरीकों पर कनाडाई पक्ष से परामर्श लेकर काम किया जा रहा था.
वहीं सूत्रों की मानें तो, ‘बेंगलुरु, मुंबई और चंडीगढ़ में कनाडा के वाणिज्य दूतावासों में राजनयिक संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. भारत में अपने तीन वाणिज्य दूतावासों में कामकाज रोकने का कनाडा का फैसला एकपक्षीय है और समानता के क्रियान्वयन से संबंधित है.’
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा?
इस मामले पर कनाडा की विदेश मंत्री ने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत का कनाडाई राजनयिकों को मिलने वाली सुरक्षा हटाने की बात करना ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ है. हालांकि उनका देश भारत के इस फैसले के बदले में कोई कार्रवाई नहीं करेगा.
विदेश मंत्री ने इसी प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “अगर हम राजनयिक सुरक्षा की परंपरा को तोड़ने दें तो दुनिया में कहीं पर भी कोई राजनयिक सुरक्षित नहीं रहेगा. हम अभी भी कनाडा घूमने या बसने के लिए आने वाले भारतीयों का कनाडा में स्वागत करते है.
वहीं इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कनाडा के राजनयिकों के आंतरिक मामलों में लगातार दखल देने के चलते भारत ने कूटनीतिक समानता लाई है. हालांकि भारतीय विदेश मंत्री ने ये भी माना है कि भारत और कनाडा के बीच रिश्ते बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और बहुत जल्द कनाडाई लोगों के लिए वीजा सेवा को बहाल कर दिया जाएगा.
इसके अलावा विदेश मंत्रालय से ये बयान भी जारी किया गया कि कनाडा कह रहा है कि हमने वियना संधि का उल्लंघन किया है. ये आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं. हमने जो कदम उठाए हैं वो कदम वियना संधि के आर्टिकल 11.1 के मुताबिक हैं.
भारत ने किन देशों से राजनयिकों को बुलाया?
पाकिस्तान: भारत और पाकिस्तान समय-समय पर आपसी तनाव बड़ने पर एक-दूसरे देशों से राजनयिकों को निष्कासित करते रहे हैं. हाल ही में आया उदाहरण देखें तो साल 2019 में भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को वापस बुला लिया था और जम्मू- कश्मीर की स्थिति में किए गए बदलावों के बाद राजनयिक संबंधों को कम कर दिया था. इसके एक साल बाद यानी साल 2020 में भी भारत ने पाकिस्तानी दूतावास में कर्मचारियों की संख्या और कम कर दी गई.
अमेरिका: साल 2014 के जनवरी महीने में अमेरिका के एक ग्रैंड जूरी ने कथित वीजा धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार भारतीय राजनयिक देवयानी को औपचारिक रूप से आरोपित कर और उन्हें अमेरिका छोड़ने के लिए कह दिया था. जिसके बाद तत्कालीन भारत ने अमेरिका से नई दिल्ली दूतावास से एक राजनयिक को वापस बुलाने का आदेश दिया था. उस वक्त भारत और अमेरिका के रिश्ते भी काफी तनावपूर्ण हो गए थे. हालांकि इस पूरे मामले के कुछ महीनों बाद ही देश में नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई और भारत-अमेरिका के रिश्ते फिर अच्छे हुए.
फ्रांस: इसी लिस्ट में एक और पश्चिमी देश का नाम शामिल है जिसके साथ भारत के काफी पुराने और अच्छे संबंध हैं. दरअसल साल 1985 की बात है, जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. उस वक्त अचानक पता चला कि पीएमओ में फ्रांसीसी जासूसों ने पैठ बना ली है और यह जासूस इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही एक्टिव हो गए थे. ये बात बाहर आयी तो राजनीतिक बवाल मच गया. उस वक्त के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सलमान हैदर ने घोषणा करते हुए कहा कि भारत ने फ्रांसीसी राजदूत सर्ज बोइदेवैक्स को 30 दिनों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है.
यूपीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि “यह पहली बार था जब इतने उच्च पदस्थ राजनयिक को सैन्य और औद्योगिक दोनों रहस्यों से जुड़ी जासूसी के सिलसिले में भारत छोड़ने के लिए कहा गया था”
क्या है डिप्लोमैट्स को दी जाने वाली सुरक्षा?
डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी विदेशी राजनयिकों को मिलने वाले विशेषाधिकार है. इस इम्युनिटी में स्थानीय कानूनों के दायरे से मिलने वाली छूट भी शामिल होती है.
अमेरिका भी चिंतित
इस पूरे मामले में अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर का भी बयान दिया है. उन्होंने 41 कनाडाई राजनयिकों के भारत से जाने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा- हमें उम्मीद हैं कि भारत राजनयिक संबंधों पर 1961 वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों को बरकरार रखेगा. उन्होंने ये भी कहा कि कनाडा सरकार की मांग के जवाब में हम उनके राजनयिकों के भारत से जाने से चिंतित हैं. मिलर ने कहा, मतभेदों को सुलझाने के लिए जमीन पर राजनयिकों की जरूरत होती है.
मामले में क्या-क्या हुआ?
इस पूरे मामले की शुरुआत जस्टिन ट्रूडो के बयान से हुई थी. उन्होंने कनाडा की संसद में कहा था कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसियों का हाथ हो सकता है.
जिसके बाद कनाडा ने भारत के शीर्ष राजनयिक को निष्कासित कर दिया. इसकी जवाबी कार्रवाई में भारत ने भी कनाडा के शीर्ष राजनयिक को पांच दिनों के अंदर भारत छोड़ने का आदेश दे दिया. इन फैसलों के बाद भारत कनाडा के बीच के राजनयिक रिश्ते काफी खराब हो गए.
ट्रूडो ने अपने बयान में कहा कि कनाडा ने भारत के साथ निज्जर हत्याकांड से जुड़े पुख्ता सबूत शेयर किए हैं. हालांकि अब तक सार्वजनिक तौर पर ऐसी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है. वहीं दूसरी तरफ भारत ने कहा कि निज्जर हत्याकांड में कनाडा की ओर से किसी खास या संबंधित जानकारी पर भारत गौर करने के लिए पूरी तरह तैयार है.







