ADVERTISEMENT
Wednesday, July 29, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

गाजा की त्रासदी पर चुप्पी…….

UB India News by UB India News
October 15, 2023
in Lokshbha2024, संपादकीय
0
5 दिन और 3000 मौत… हमास के हमले में इजरायल के 169 सैनिकों की भी गई जान
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

ब्रिटेन के स्कॉटलैंड़ प्रांत के फर्स्ट मिनिस्टर (मुख्यमंत्री) हमजा यूसुफ की सास ने गाजा से अपना अलविदा संदेश जारी किया। उन्होंने अपने जीवन पर मंड़रा रहे खतरे के साथ ही गाजा के लाखों लोगोें की त्रासदी का मार्मिक उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया इतनी ह्रदयहीन और अमानवीय क्यों हो गई हैॽ हमजा ने उनके (सास के) संक्षिप्त संदेश को अपने ट्विटर अकांउट पर पोस्ट किया जिसे लाखों लोगों ने देखा। आश्चर्य की बात यह है कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनेता के दुख दर्द में शामिल होने की प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने जहमत नहीं उठाई। यह प्रकरण गाजा त्रासदी के संबंध में दुनिया की चुप्पी को बयान करता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों को गाजा के लाखों लोगों की पीड़़ा से कोई लेना–देना नहीं है। उन्हें केवल इस बात की चिंता है कि गाजा में फंसे उनके देश के नागरिकों को कैसे निकाला जाए। उसके लिए उन्होंने इस्राइल पर दबाव बनाया है‚ जिसके कारण मिस्र तक एक पैसेज बनाने के लिए इस्राइल राजी हुआ है। इसी तरह का काम फिलिस्तीनी मरीजों‚ महिलाओं और बच्चों को वहां से निकालने के लिए भी किया जा सकता है। लेकिन यह अमेरिका और पश्चिमी देशों की प्राथमिकता में नहीं है। गाजा के २० लाख लोगों को जिस यातना से गुजरना पड़़ रहा है वह सम–सामयिक दुनिया का सबसे बड़़ा मानवीय हादसा है। फिलिस्तीन के लोग ही नहीं बल्कि दुनिया का शांति प्रेमी समाज भी इसे पीढ़ियों तक याद रखेगा। इसकी अभिव्यक्ति आने वाले वर्षों में किसी भी रूप में हो सकती है। उग्रवादी संगठन हमास की आतंकवादी कार्रवाई का कोई भी समर्थन नहीं करता लेकिन एक छोटे से उग्रवादी समूह के लिए लाखों लोगों को दंडि़त नहीं किया जा सकता। इसे भी एक विडं़बना कहा जाएगा कि यह हैवानियत उस देश की ओर से की जा रही है जिसके लोगों को नाजी जर्मनी में गैस चेंबर और होलोकॉस्ट का सामना करना पड़़ा था। पुराना दर्दनाक अनुभव दूसरों के दुख दर्द समझने का आधार बन सकता था। लगता है कि दुनिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो इतिहास से केवल यही सबक लेते हैं कि त्रासदी को कैसे दोहराया जाए।

दुनिया में जहां भी संघर्ष होता है तो आमतौर पर विभिन्न देशों की ओर से युद्ध–विराम की अपील की जाती है लेकिन यूक्रेन संघर्ष के बाद फिलिस्तीन प्रकरण ऐसे दो उदाहरण हैं जिनमें किसी ने युद्ध–विराम की सीधे अपील नहीं की है। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने भी युद्ध–विराम की कोई अपील नहीं की है। फिलिस्तीन के घटनाक्रम पर भारत का रुख संयम और संतुलन पर आधारित रहा है। यह जरूर है कि प्रधानमंत्री मोदी से यह अपेक्षा है कि वह भारत की नीति और देश की सांस्कृतिक विरासत का पालन करते हुए युद्ध–विराम की अपील करें और साथ ही फिलिस्तीनी अवाम को मानवीय सहायता मुहैया करें। हमास के आतंकवादी हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस्राइल के साथ एकजुटता प्रदर्शित की। दशकों तक आतंकवाद का दंश झेलने वाले भारत के लिए यह स्वाभाविक था कि वह इस्राइल के साथ एकजुटता प्रदर्शित करे। आतंकवाद और मजहबी कट्टरता भारत के लिए इस्राइल की तरह की एक बड़ी चुनौती है। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका और प. देश गाजा में इस्राइल में सैनिक अभियान का बिना शर्त समर्थन कर रहे हैं। यही देश अपने यहां भारत विरोधी और पृथक्कतावादी गुटों को पनाह देते हैं। कनाड़ा इसका हालिया उदाहरण है।

RELATED POSTS

गोमूत्र विशेषज्ञ, अंधभक्त… प्रियंका-राहुल गांधी ने तोड़ी मर्यादा, सदन को किस राह पर ले जा रहे भाई-बहन

क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….

प्रधानमंत्री मोदी के प्रारंभिक बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने अपनी विदेश नीति का खुलासा किया। प्रवक्ता ने भारत की इस पुरानी नीति को दोहराया कि वह कुछ क्षेत्र में इस्राइल और फिलिस्तीन‚ दो स्वतंत्र और संप्रभु देशों का समर्थक है। भारत इस्राइल की सुरक्षा के साथ ही फिलिस्तीन के लोगों के न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा तथा इन दोनों देशों के शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व की वकालत करता रहा है। नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने फिलिस्तीन की यात्रा की। भारत फिलहाल जी–२० का अध्यक्ष है। ब्रिक्स का भी प्रभावशाली सदस्य देश है। इस हैसियत से भारत पर यह राजनैतिक और नैतिक जिम्मेदारी आती है कि वह फिलिस्तीन में खून–खराबे को रोकने के लिए पहल करे। प्रधानमंत्री मोदी का यह कथन पर्याप्त नहीं है कि ‘यह यह युग युद्ध का नहीं है’। उन्हें यह भी कहना चाहिए वर्तमान युग रक्तपात का भी नहीं है।
गाजा के २० लाख लोगों को जिस यातना से गुजरना पड़़ रहा है वह सम–सामयिक दुनिया का सबसे बड़़ा मानवीय हादसा है। फिलिस्तीन के लोग ही नहीं बल्कि दुनिया का शांति प्रेमी समाज भी इसे पीढ़ियों तक याद रखेगा। इसकी अभिव्यक्ति आने वाले वर्षों में किसी भी रूप में हो सकती है……

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

गोमूत्र विशेषज्ञ, अंधभक्त… प्रियंका-राहुल गांधी ने तोड़ी मर्यादा, सदन को किस राह पर ले जा रहे भाई-बहन

गोमूत्र विशेषज्ञ, अंधभक्त… प्रियंका-राहुल गांधी ने तोड़ी मर्यादा, सदन को किस राह पर ले जा रहे भाई-बहन

by UB India News
July 29, 2026
0

पेपर लीक के खिलाफ पेश विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार से चर्चा चल रही है. इस दौरान सत्ता पक्ष और...

आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज, सीजेपी प्रवक्ता का दावा- दीपके को हिरासत में लिया

क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….

by UB India News
July 27, 2026
0

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इससे...

कैसे एक अनशन से संसद चलो मार्च तक पहुंच गया वांगचुक-CJP का आंदोलन……………..

छात्रों और शिक्षा को दलीय राजनीति का औजार बनाना कितना सही है !

by UB India News
July 23, 2026
0

दिल्ली में जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और नीट समेत केंद्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ी ठीक करने की मांग करते...

आखिर क्यों भाजपा धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं ले रही  ………………….

आखिर क्यों भाजपा धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं ले रही ………………….

by UB India News
July 22, 2026
0

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, कॉकरोच पार्टी का संसद मार्च, छात्रों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले, लाठियां,...

पुलिस और सरकार हालात समझने में फिर चूकी………………………

पुलिस और सरकार हालात समझने में फिर चूकी………………………

by UB India News
July 22, 2026
0

कथित राजनीतिक दल काकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संसद चलो मार्च के समय प्रदर्शनकारियों ने जैसी हिंसा की, वह...

Next Post
मीडिया ने वही किया है‚ जो कोई मीडिया करता

मीडिया ने वही किया है‚ जो कोई मीडिया करता

JDU ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति पर उठाए सवाल

JDU ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति पर उठाए सवाल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend