महीने की शुरुआत के साथ महंगाई का डबल अटैक हुआ है। दरअसल, आज यानी 1 अक्टूबर से विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं वाणिज्यिक इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) का दाम 209 रुपये बढ़ाया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तेजी के बीच पेट्रोलियम कंपनियों ने यह कदम उठाया है। इस फैसले से एक ओर हवाई सफर महंगा होगा। वहीं, दूसरी ओर होटल व रेस्टोरेंट में खाने-पीने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे क्योंकि सिलेंडर महंगा होने से लागत बढ़ेगी। रेस्टोरेंट मालिक इसका बोझ आम उपभोक्ता पर ट्रांसफर करेंगे।
कहां कितनी हुई बढ़ोतरी
सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की रविवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) का दाम 5,779.84 रुपये प्रति किलोलीटर या 5.1 प्रतिशत बढ़ाकर 1,12,419.33 रुपये से 1,18,199.17 रुपये किया गया है। इससे पहले एक सितंबर को विमान ईंधन कीमतों में 14.1 प्रतिशत की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय एटीएफ का दाम 13,911.07 रुपये प्रति किलोलीटर बढ़ा था। इससे पहले एक अगस्त को विमान ईंधन के दाम 8.5 प्रतिशत या 7,728.38 रुपये प्रति किलोलीटर बढ़ाए गए थे। उल्लेखनीय है कि यह विमान ईंधन कीमत में लगातार चौथी बढ़ोतरी है। किसी एयरलाइन की परिचालन लागत में 40 प्रतिशत हिस्सा एटीएफ का बैठता है। एक जुलाई को एटीएफ के दाम 1.65 प्रतिशत या 1,476.79 रुपये प्रति किलोलीटर बढ़े थे। चार बार में विमान ईंधन कीमतों में रिकॉर्ड 29,391.08 रुपये प्रति किलोलीटर की बढ़ोतरी हुई है।
कमर्शियल सिलेंडर 209 रुपये महंगा हुआ
इसके साथ ही पेट्रोलियम कंपनियों ने वाणिज्यिक एलपीजी का दाम 209 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिया है। इस 19 किलोग्राम के सिलेंडर का इस्तेमाल होटल और रेस्तरांओं में होता है। राष्ट्रीय राजधानी में वाणिज्यिक एलपीजी का दाम अब बढ़कर 1,731.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है। वहीं मुंबई में यह 1,684 रुपये प्रति सिलेंडर बैठेगा।। इससे पहले एक सितंबर को वाणिज्यिक एलपीजी के दाम 157.5 रुपये और एक अगस्त को 100 रुपये घटाए गए थे। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) पिछले महीने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस और एटीएफ की कीमतों में संशोधन करती हैं।
पेट्रोल, डीजल और घरेलू सिलेंडर के दाम नहीं बदले
पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार 18वें महीने स्थिर बनी रहीं। राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि, घरेलू इस्तेमाल वाले रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) का दाम 903 रुपये पर कायम रखा गया है।
आज से ऑनलाइन गेमिंग पर लगेगा 28% GST
आज यानी 1 अक्टूबर से ऑनलाइन गेमिंग पर 28% गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लगना शुरू हो जाएगा। GST काउंसिल ने जुलाई में ऑनलाइन गेमिंग, हॉर्स-रेसिंग और कैसिनो पर 28% GST लगाने का ऐलान किया था। 2 अगस्त को 51वीं बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया गया था। अब तक इन खेलों पर 18% तक टैक्स लगता था।
बीते दिनों सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन संजय अग्रवाल ने कहा था कि ऑनलाइन गेमिंग पर 1 अक्टूबर से ही 28% GST लगेगा। उन्होंने कहा कि गेमिंग कंपनियों को इसके लागू करने के प्रोसेस के तहत लीगल नोटिस भी भेज दिया गया है।
राज्यों से कहा- विधानसभा से पास करो या अध्यादेश लाकर लागू करो
संजय अग्रवाल ने कहा है कि सभी राज्यों की विधानसभाएं GST संशोधन विधेयक 2023 को अपने यहां 30 सितंबर तक पास करा लें या अध्यादेश लाकर 1 अक्टूबर से लागू करें। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने के 6 महीने बाद रिजल्ट की समीक्षा की जाएगी।
अभी 18% टैक्स देते हैं ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म
फिलहाल, ज्यादातर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म 18% GST देते हैं। कैसीनो, सट्टेबाजी और इस तरह के दूसरे गेम जिनमें ‘चांस’ की बात होती है, उन पर 28% GST लगाया जाता है। घुड़सवारी या घुड़दौड़ में सरकार दांव मूल्य (हर बेटिंग) पर 28% GST चार्ज करती है।
देश का ऑनलाइन गेमिंग बाजार कितना बड़ा है?
देश के 40 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेलते हैं। 2025 तक इस इंडस्ट्री के 5 अरब डॉलर यानी करीब ₹41 हजार करोड़ होने के आसार हैं। 2017-2020 के बीच देशी मोबाइल गेमिंग इंडस्ट्रीज 38% सालाना की दर से बढ़ी थी। इस इंडस्ट्री के बढ़ने का रफ्तार दुनिया में सबसे तेज है। भारत के बाद चीन और अमेरिका का गेमिंग ग्रोथ 8% और 10% है।
इस नियम के बाद इंडस्ट्रीज पर क्या असर पड़ेगा?
TCS और इंफोसिस समेत कई दिग्गज कंपनियां ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सेक्टर से जुड़े करीब 1 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

अब तक दोनों के क्या नियम हैं?
आईटी एक्ट-2021 के संशोधन के तहत सरकार सभी गेम ऑफ चांस को गैंबलिंग मानती है। सरकार चरणबद्ध तरीके से सभी गेम ऑफ चांस की पहचान कर बंद करेगी।
गेमिंग को गैंबलिंग की कैटेगरी में क्यों डाला?
सरकार गेमिंग और गैंबलिंग की विशेष निगरानी करना चाहती है। बच्चों और बड़ों को जोखिम में ले जाने वाले गेमिंग और गैंबिलिंग की पहचान की जा रही है।
गैंबलिंग जितना जीएसटी गेमिंग पर लगने से क्या फर्क आएगा?
यूजर को गेमिंग प्लेटफॉर्म का कमीशन 10 रुपए देना है। अगर कोई यूजर ऑनलाइन गेमिंग से 100 रुपए कमाता है, तो उसके पास 90 रुपए बचेंगे। नए फैसले के तहत इस पर 28% जीएसटी यानी 25.2 रुपए बतौर टैक्स देने होंगे। सब काटकर हाथ आएंगे 64.8 रुपए। पहले उसे 90 रुपए मिलते थे।







