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इंडिया’ गठबंधन में दिखने लगी दरार! अलग रही पार्टियां बिगाड़ने लगीं खेल

UB India News by UB India News
September 18, 2023
in खास खबर, पटना, ब्लॉग
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इंडिया’ गठबंधन में दिखने लगी दरार! अलग रही पार्टियां बिगाड़ने लगीं खेल
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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर NDA और I.N.D.I.A अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। इन दो खेमों के अलावा कुछ दल ऐसे भी हैं, जिन्हें किसी तरह की गोलबंदी की जरूरत महसूस नहीं हो रही। ऐसे दलों का भले कोई मोर्चा न हो, पर तीसरे मोर्चे के रूप में ये चुनावी अखाड़े में उतरेंगे। बिहार में पप्पू यादव के नेतृत्व वाली जन अधिकार पार्टी (JAP), मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP), उड़ीसा का बीजू जनता दल (BJD), तेलंगाना में केसी राव की पार्टी बीआरएस (BRS) और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) जैसी पार्टियां भी NDA और I.N.D.I.A के अलावा मैदान में होंगी। ये ऐसी पार्टियां हैं, जिनका वोट आधार अपने प्रभाव वाले राज्यों में बड़ा है। ये अंततः विपक्षी वोटों का बंटवारा ही करेंगी।

बिहार की JAP और VIP को कोई पूछ ही नहीं रहा

बिहार के कुछ इलाकों में पप्पू यादव की पार्टी जाप (JAP) की पकड़ है। उनकी कहीं किसी खेमे में पूछ नहीं हो रही। हालांकि इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी है। उन्होंने I.N.D.I.A में शामिल आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से भी मुलाकात की थी। लेकिन विपक्षी गठबंधन की तीन बैठकों में उन्हें नहीं बुलाया गया। NDA में तो उनके जाने का सवाल ही नहीं। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के बारे में माना जा रहा था कि वे एनडीए का हिस्सा बनेंगे। इस सोच के पीछे की वजह यह थी कि उन्हें गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा मुहैया कराई है। सहनी ने अपनी ताकत का इजहार करने के लिए निषाद आरक्षण की मांग कर दी। उन्होंने साफ कह दिया कि जो गठबंधन निषाद आरक्षण की मांग पूरी करने का वादा करेगा, वे उसी के साथ जाएंगे। आश्चर्य यह कि उनकी मांग किसी को मंजूर नहीं। नतीजतन वे अकेले निषाद आरक्षण यात्रा पर बिहार-यूपी के दौरे कर रहे हैं।

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BJD, BRS और AIMIM जैसे दल भी मैदान में होंगे

ओडिशा में सत्ता संभाल रहे बीजू जनता दल (BJD) के मुखिया नवीन पटनायक तो शुरू से ही किनारे चलते रहे हैं। उन्हें किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि केंद्र में बीजेपी की सरकार के साथ उनकी गहरी छनती रही है। बीजेपी ने भी उन्हें अपने पाले में करने की कभी न कोशिश की और न उनकी कमी उसे महसूस हुई। जब भी संसद में बीजेपी को मदद की जरूरत पड़ी, बीजेडी ने भाजपा का साथ दिया। इसी तरह तेलंगाना के सीएम केसी राव के नेतृत्व वाली बीआरएस ने NDA और I.N.D.I.A दोनों खेमों से समान दूरी बना ली है। बल्कि यह कहा जाए कि उन्हें भी किसी ने नहीं पूछा। खासकर विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A ने। यह अलग बात है कि संसद में बीआरएस के सदस्य विपक्ष के साथ समय-समय पर खड़े होते रहे हैं। इन सबसे इतर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम है, जिसे किसी गठबंधन का साथ कबूल नहीं। एनडीए के साथ वे भले न रहें, लेकिन विपक्षी गठबंधन मानता है कि वे मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर सत्ताधारी भाजपा की मदद करते हैं।

I.N.D.I.A का खेल बिगाड़ेंगे खेमों से बाहर के दल

विपक्ष का अंकगणित कहता है कि सिर्फ 45 प्रतिशत वोटों के सहारे एनडीए देश की सत्ता पर काबिज है। बाकी 55 प्रतिशत वोट विपक्षी दलों के हैं। अगर विपक्षी दल लामबंद हो गए तो नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाना मुश्किल नहीं होगा। ऐसा सोचते समय विपक्षी गठबंधन यह भूल जाता है कि जो दल किसी खेमे में शामिल नहीं हैं, वे आखिरकार विपक्षी गठबंधन का ही तो खेल बिगाड़ेंगे। अगर दस प्रतिशत वोट भी इन दलों ने झटक लिए तो विपक्षी गठबंधन के 55 प्रतिशत वोटों के सपने पर पानी फिर जाएगा।

ममता को मनाना भी I.N.D.I.A की बड़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को साधना विपक्षी गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने पहले ही कह दिया है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लड़ाई टीएमसी और बीजेपी से होगी। सीपीएम भी इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भी कहा है कि उसका मुकाबला टीएमसी से होगा। दरअसल टीएमसी बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस को दो सीटें ही देना चाहती है। अभी कांग्रेस से अधीर रंजन चौधरी एकमात्र सांसद हैं। लोकसभा में सीपीएम का कोई सदस्य ही नहीं है। इसीलिए तृणमूल दोनों को एक-एक सीट ही देना चाहती है। ममता बनर्जी पहले से ही कहती रही हैं कि विपक्षी गठबंधन तो बने, लेकिन टिकटों के बंटवारे के लिए राज्यों में प्रभावी बड़े दलों को ही जिम्मेवारी दी जाए।

AAP भी I.N.D.I.A की मुश्किलें बढ़ाने के मूड में

आम आदमी पार्टी (AAP) तो सीटों के सवाल पर काफी मुखर है। एक तरफ विपक्षी गठबंधन की बैठकों में अरविंद केजरीवाल एका की बात करते हैं, लेकिन दिल्ली और पंजाब में वे अपनी मनमानी चाहते हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी में भी जुट गए हैं। वे टिकट भी बांटने लगे हैं। जाहिर है कि उनके ऐसे कदमों का दुष्परिणाम विपक्षी गठबंधन को ही झेलना पड़ेगा।

 

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