विपक्षी दलों के गठबंधन- ‘INDIA’ ने नई दिल्ली में अपनी कॉर्डिनेशन कमिटी की बैठक के बाद कुछ टेलीविजन एंकरों का बायकॉट करने का ऐलान किया. इसके एक दिन बाद गुरुवार, 14 सितंबर को 14 ऐसे टेलीविजन एंकरों के नाम की लिस्ट भी समाने आ गयी है, जिसने शो पर गठबंधन के नेता नहीं जाएंगे.
भाजपा ने विपक्ष के इस निर्णय की निंदा करते हुए कहा कि यह नाजीवाद का उदाहरण है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्ड़ा ने आरोप लगाया कि इंडि़या के घटक सिर्फ दो चीजें कर रहे हैं‚ जिनमें सनातन संस्कृति को कोसना और मीडि़या को धमकी देना शामिल है। उन्होंने ‘एक्स‘ पर पोस्ट में आरोप लगाया कि इन दलों में आपातकाल के दौर की मानसिकता जिंदा है। नड्ड़ा ने कहा‚ ‘इंडि़या’ गठबंधन को अपनी हरकतों से तुरंत बाज आना चाहिए। उन्हें इसके बजाय रचनात्मक कार्य और लोगों की सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में मीडि़या को धमकी देने और अलग–अलग विचारों वाले लोगों को चुप कराने के कई उदाहरण हैं। इस क्रम में उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा‚ पंडि़त नेहरू ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया और उनकी आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया। इंदिरा जी तो इस मामले में स्वर्ण पदक विजेता बनी हुई हैं। उन्होंने प्रतिबद्ध न्यायपालिका‚ प्रतिबद्ध नौकरशाही का आह्वान किया और भयावह आपातकाल लगाया।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडि़या’ ने विभिन्न टीवी चैनलों के १४ एंकरों के कार्यक्रमों में अपने प्रतिनिधि न भेजने का फैसला किया है। जबकि‚ भाजपा ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौर की मानसिकता जिंदा है। कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल और प्रवक्ता पवन खेड़़ा ने अपने ‘एक्स‘ पर एक पोस्ट पर एंकरों की सूची जारी करते हुए लिखा कि इंडि़या समन्वय समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है कि १४ एंकरों के कार्यक्रमों में प्रतिनिधि नहीं भेजे जाएंगे।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने गुरुवार को एक क़दम उठाते हुए उन 14 टीवी एंकरों की एक सूची जारी की है, जिनके प्रोग्राम में उनका प्रतिनिधि नहीं जाएगा. गठबंधन ने कहा है कि उसने ‘नफ़रत भरे’ न्यूज़ डिबेट चलाने वाले इन टीवी एंकरों के कार्यक्रमों का बहिष्कार का फ़ैसला किया है.
इस फ़ैसले का एलान करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, ”हर शाम पाँच बचे कुछ चैनलों पर नफ़रत का बाज़ार सज जाता है. पिछल नौ साल से यही चल रहा है. अलग-अलग पार्टियों के कुछ प्रवक्ता इन बाज़ारों में जाते हैं. कुछ एक्सपर्ट जाते हैं, कुछ विश्लेषक जाते हैं…..लेकिन सच तो ये है कि हम सब वहां उस नफ़रत बाज़ार में ग्राहक के तौर पर जाते हैं.”
उन्होंने कहा,”हम नफ़रत भरे नैरेटिव को मंज़ूरी नहीं दे सकते. यह नैरेटिव समाज को कमज़ोर कर रहा है. अगर आप समाज में नफ़रत फैलाते हैं तो यह हिंसा का भी रूप ले लेता है. हम इसका हिस्सा नहीं बनेंगे.”
एबीपी नेटवर्क के सीईओ और एनबीडीए के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने इस फ़ैसले पर कहा, ”यह फ़ैसला मीडिया का गला घोंटने जैसा है. जो गठबंधन लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करता है वो इसे ख़त्म करता दिख रहा है. लेकिन हम अपने हर शो में सभी को बुलाएंगे.’’
एनबीडीए ने कहा है कि संगठन को इंडिया गठबंधन के इस फ़ैसले से काफ़ी पीड़ा हुई है और वो इसे लेकर चिंतित है. उसने कहा है कि इस फ़ैसले ने एक ख़तरनाक मिसाल पेश की है.
एनबीडीए ने कहा है,”विपक्षी गठबंधन के प्रतिनिधियों को भारत के कुछ शीर्ष टीवी न्यूज़ एंकरों के कार्यक्रम में जाने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है. ये असहिष्णुता का संकेत है और प्रेस की स्वतंत्रता को ख़तरे में डालता है. विपक्षी गठबंधन ख़ुद को बहुलता और स्वतंत्र प्रेस का हिमायती बताता है लेकिन उसका ये फ़ैसला लोकतंत्र के मूल सिद्धांत पर चोट करता है.”
न्यूज़ चैनल आजतक, इंडिया टुडे और जीएनटी के न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद ने ट्विटर पर इस फ़ैसले का विरोध करते हुए लिखा है, ‘’मैं इस निरंकुश क़दम’’ की कड़ी निंदा करता हूं. इस एकतरफ़ा क़दम को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए.’’
न्यूज़ चैनल ‘आज तक’ के एक प्रमुख न्यूज़ एंकर सुधीर चौधरी ने ने कहा, ”इंडिया गठबंधन के सामने जो पत्रकार और न्यूज़ एंकर डटकर खड़े रहे, जिन्होंने चरण चुबंक बनने से इनकार कर दिया, अब उनका बहिष्कार होगा. लगभग आधे भारत में इस गठबंधन की सरकारें हैं. जब लालच,पुरस्कार और एफआई भी काम नहीं आये तो अब बहिष्कार. भारत के मीडिया को अब पूरी ताक़त और एकता के साथ इसका जवाब देना चाहिए. ये बहुत ख़तरनाक स्थिति है.”
इंडिया’ गठबंधन के इस फ़ैसले की बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कड़ी आलोचना की है.
उन्होंने कहा, ”न्यूज़ एंकरों की इस तरह लिस्ट जारी करना नाजियों के काम करने का तरीक़ा है, जिसमें ये तय किया जाता है कि किसको निशाना बनाना है. अब भी इन पार्टियों के अंदर इमरजेंसी के वक़्त की मानसिकता बनी हुई है.”
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लिखा, ”पंडित नेहरू ने फ्री स्पीच को कमज़ोर किया. इंदिरा जी इस तरह के काम करने की गोल्ड मेडलिस्ट थीं. राजीव जी ने मीडिया को काबू करने की कोशिश की लेकिन बुरी तरह नाकाम रहे. सोनिया जी के नेतृत्व वाला यूपीए गठबधन सोशल मीडिया हैंडल्स को प्रतिबंधित कर रहा था सिर्फ इस वजह से कि कांग्रेस को उनके विचार पसंद नहीं थे.”
लोकप्रिय न्यूज़ एंकर रुबिका लियाक़त ने इंडिया गठबंधन के बहिष्कार की लिस्ट में अपना नाम पर होने पर लिखा है, ”इसे बैन करना नहीं, इसे डरना कहते हैं.
इसे पत्रकारों का बहिष्कार नहीं सवालों से भागना कहते हैं. आपको आदत है, हाँ में हाँ मिलाने वालों की. वो न कल किया था न आगे करूँगी. बैन लगाने की हिम्मत उन नेताओं पर लगाइए जो मुहब्बत की दुकान में कूट कूट कर भरी नफ़रत परोस रहे हैं. सवाल बेलौस थे, हैं और आगे भी रहेंगे. जय हिंद.
एनबीडीए, कुछ मीडिया संगठनों के प्रमुखों और प्रतिबंधित किए गए एंकरों की ओर से ‘इंडिया’ गठबंधन के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ टिप्पणी के बाद कुछ नेताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने बीजेपी को उनके पुराने दिन याद दिलाए हैं.
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विटर पर लिखा, ”सालों नहीं तो कुछ महीनों तक तो बीजेपी एनडीटीवी (अदानी युग से पहले) का बहिष्कार करती रही. उस समय उन्हें ये दर्द सुनाई नहीं पड़ा. पिछले कई सालों से कुछ ‘पत्रकार’ विभाजनकारी, नफ़रत से भरे प्रोग्राम चलाते रहे. इनके नतीजे साफ़ तौर पर दिखे. उस समय किसी ने ये निर्देश नहीं पढ़े थे? ”
उन्होंने लिखा, ”पिछले कई सालों से टीवी न्यूज़टेनमेंट मीडिया बराबरी का मौक़ा देने से इनकार करता रहा. उस समय उन्हें अपने इस क़दम के विरोध की आवाज़ सुनाई नहीं पड़ी.
”लेकिन ‘इंडिया’ ने अब ऐसे डिबेट शो में हिस्सा न लेने का तय किया है क्योंकि प्रेस की आज़ादी खतरे में हैं.”
एनडीटीवी के एंकर रहे रवीश कुमार ने भी ट्विटर पर इस फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए लिखा, ”सात साल बहिष्कार झेला है. सात घंटे भी नहीं हुए. ऐसा लग रहा है कल प्रधानमंत्री पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ही देंगे. प्रेस की आज़ादी की रक्षा के लिए. जहाँ ये सारे लोग सवाल पूछते नज़र आएँगे. उसके बाद ये सारे लोग सना इरशाद मट्टू से इसके लिए (तस्वीर देखें) माफ़ी माँगने भी जाएँगे.”
उन्होंने लिखा, ”फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीक़ी के मारे जाने के बाद दो शब्द नहीं कहा गया. किसने नहीं कहा, क्या आप उनका नाम जानते हैं? मनदीप पुनिया का पेज रोकने के लिए नोटिस किस सरकार ने भेजा था? क्या नाम जानते हैं? गोदी मीडिया भारत के लोकतंत्र के लिए ख़तरा है. विपक्ष को अपनी हर रैली में जनता को बताना चाहिए. अगर वह यह काम नहीं करता है तो लोकतंत्र के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है.”
वरिष्ठ पत्रकार प्रणंजय गुहा ठाकुरता ने इंडिया के फैसले पर एनबीडीए के बयान को ट्वीट करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राहुल कंवल के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘’क्या आप इस लिस्ट में ख़ुद को न पाकर ख़ुश हैं या दुखी हैं. क्या ये मामला वैसा ही है, जिसमें एक गुनहगार को दूसरे को गुनहगार ठहरा रहा है.’’
वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने ट्विटर लिखा, ”राजनीतिक नेताओं के एक समूह का कुछ पत्रकारों से टक्कर लेना ( ठीक है, पत्रकार नहीं बेहद घटिया दर्जे के प्रॉपेगैंडिस्ट) एक जबरदस्त उदाहरण पेश कर रहा है. अच्छा है कि इस तरह के चैनलों से पूरी तरह दूर रह कर उनके पैसे के स्रोत को बंद कर दिया जाए. आख़िरकार देश के कई राज्यों में ‘इंडिया’ का शासन है ही. क्यों न उनके विज्ञापन बंद कर दिए जाएं.’’
इंडिया गठबंधन के इस फैसले पर कुछ प्रबुद्ध लोगों ने भी टिप्पणी की है. राजनीति विज्ञानी सुहास पलशीकर ने ट्विटर पर लिखा, ”इस तरह का चुनिंदा मीडिया बहिष्कार दुविधा और अपशकुन दोनों की निशानी है. दुविधा इसलिए कि जिन चैनलों या एंकरों का बहिष्कार किया जाना है वे बड़ी तादाद में लोगों की ओर से देखे जाते हैं. जनता के सामने दिखना राजनीतिक नेताओं के लिए ऑक्सीजन की तरह है. इस तरह के बहिष्कार से उनके लिए ये ऑक्सीजन ख़त्म हो जाएगा.”
पलशीकर लिखते हैं, ”दूसरी ओर नज़रअंदाज या अपमानित किया जाना भी ऐसा विकल्प नहीं है जिसे मंजूर किया जा सके. हालांकि इस बात की संभावना बनी रहती है चैनलों पर जाएं और अपना असर छोड़ें. क्या विपक्षी दल इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि उनके पास हमले की पर्याप्त ताक़त है?”
पलशीकर ने कहा,”इससे भी अहम ये कि ये घटनाक्रम बुरी तरह ध्रुवीकृत, निंदा करने वाले और ग़ैर पेशेवर मीडिया का नतीजा और लक्षण दोनों है. इसलिए समझदार मीडियाकर्मी, जिन्हें इस फ़ैसले से चिंता होगी, उन्हें अब मीडिया में नैतिकता और इसके मायने पर विचार करने जैसे क़दम उठाने पड़ सकते हैं. आज न्यूज़ चैनलों में जो ध्रुवीकृत बहसें चलाई जाती हैं, उससे डिबेट शो कहे जाने वाले इस तरह के प्रोग्राम राजनीति से जुड़े प्रोग्राम नहीं रह जाते. ये मुर्गों और सांडों की लड़ाई में बदल जाते हैं. तो क्या अब हमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कार्यक्रमों की री-स्ट्रक्चरिंग पर बहस करनी चाहिए.”
बुधवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की मुंबई बैठक में बनी समन्वय समिति के सदस्यों की पहली मुलाक़ात दिल्ली में हुई थी.
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने तय किया है कि वो अपने नेताओं और प्रवक्ताओं को कुछ टीवी एंकर्स के शो में भेजना बंद करेंगे.
विपक्षी दलों के नेता अक्सर कुछ टीवी एंकर्स पर बीजेपी और आरएसएस का समर्थन करने का आरोप लगाते रहे हैं.
दिल्ली में शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद साझा बयान जारी कर कहा गया, ”समन्वय समिति ने ऐसे टीवी एंकर्स के नामों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है, जिनके शो में इंडिया गठबंधन के नेता नहीं जाएंगे.”
शायद पहली बार है, जब विपक्षी दलों ने टीवी एंकरों के ख़िलाफ़ ऐसा पहला किया है. सूत्रों के मुताबिक़ कुछ टीवी चैनलों का पूरी तरह से बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है और कुछ चैनलों के ख़ास सिर्फ़ एंकर्स का.
गठबंधन की ओर से उन 14 एंकरों की सूची जारी कर दी गई है, जिनके प्रोग्राम इसके नेताओं ने नहीं जाने का फ़ैसला किया है.
इन एंकरों में अदिति त्यागी‚ अमन चोपड़़ा‚ अमीष देवगण‚ आनंद नरसिंहमन‚ अर्णब गोस्वामी‚ अशोक श्रीवास्तव‚ चित्रा त्रिपाठी‚ गौरव सावंत‚ नविका कुमार‚ प्राची परासर‚ रुबिका लियाकत‚ शिव अरूर‚ सुधीर चौधरी और सुशांत सिन्हा शामिल हैं। इसके बाद सोशल मीडि़या में विपक्ष के निर्णय से समर्थन और विरोध में प्रतिक्रिया व्यक्त होने लगी। विपक्षी दलों के नेताओं ने लिखा कि ये ‘गोदी एंकर’ हैं‚ इनके कार्यक्रमों का वहिष्कार किया जाना चाहिए। दरअसल इन १४ एंकरों पर आरोप है कि ये भाजपा के पक्ष में बहस कराते हैं और विपक्ष के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का मौका नहीं देते। विपक्ष के आरोपों का जवाब भाजपा के प्रवक्ता के प्रवक्ताओं की जगह स्वयं एंकर देने लगते हैं।




