जी20 शिखर सम्मेलन की आज से शुरुआत हो गई। दो दिन तक चलने वाले इस मेगा इवेंट के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस, तुर्किए समेत 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री भारत मंडपम पहुंच गए हैं। इस बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोर लगाया है। उन्होंने कहा कि पीएम आवास पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत के बाद अमेरिकी पत्रकारों को सवाल नहीं पूछने दिया गया। रमेश का आरोप है कि अमेरिकी पत्रकारों को मोदी से सवाल करने से रोक दिया गया। रमेश ने कहा कि बाइडन की टीम ने बताया कि पीएम मोदी से हमारी मीडिया को पीएम मोदी से सवाल करने की अनुमति नहीं दी गई।
जयराम रमेश के ट्वीट
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन की टीम ने बताया कि भारत ने उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक के बाद मीडिया को भारत के पीएम से सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी गई। राष्ट्रपति बिडेन अब 11 सितंबर को वियतनाम में उनके साथ आने वाले मीडिया से सवालों का जवाब देंगे। यह देखकर बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ। यह मोदी शैली में लोकतंत्र का काम है।
President Biden's team says despite multiple requests India has not allowed media to ask questions of him and Prime Minister Modi after their bilateral meeting. President Biden will now take questions in Vietnam on Sept 11th from the media accompanying him. Not surprising at all.…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 8, 2023
एक अन्य पोस्ट से किया अटैक
जयराम रमेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक और पोस्ट से हमला करते हुए कहा कि भारत अपनी बारी के अनुसार 18वें G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। G20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत उस विषय पर विचार करने का भी समय है, जो NDA (No Data Available) सरकार की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक को उजागर करता है। सरकार 2021 में होने वाली दशकीय जनगणना कराने में विफल रही है। लगभग हर दूसरे G20 देश COVID-19 के बावजूद जनगणना कराने में कामयाब रहे हैं। उस अयोग्य और अक्षम मोदी सरकार पर हमारा बयान जो 1951 से तय समय पर होने वाली भारत की सबसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय प्रक्रिया को क्रियान्वित करने में असमर्थ रही है। यह हमारे देश के इतिहास में एक अभूतपूर्व विफलता है। जिसके कारण 14 (140 मिलियन) करोड़ भारतीयों को NFSA के तहत मिलने वाले भोजन के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।




