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राष्ट्रपति मुर्मू के रात्रिभोज में पहुंचेंगे बाइडेन समेत 170 मेहमान

UB India News by UB India News
September 10, 2023
in खास खबर
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राष्ट्रपति मुर्मू के रात्रिभोज में पहुंचेंगे बाइडेन समेत 170 मेहमान
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9 सितंबर की शाम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के PM ऋषि सुनक समेत 170 मेहमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की डिनर पार्टी में शामिल होने वाले हैं। भारत मंडपम में होने वाली डिनर पार्टी में विदेशी मेहमान क्या खाएंगे, डाइनिंग टेबल और कमरा कैसे सजाया जाएगा, इस तरह की डिनर पार्टियों को लेकर क्या प्रोटोकॉल होते हैं?

जानकारी के मुताबिक, भोज में विदेशी प्रतिनिधियों के अलावा कुछ वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और एचडी देवगौड़ा को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि, सिंह और देवगौड़ा स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हो पाएंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन भी रात्रिभोज में शामिल होंगे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को भी न्योता मिला है। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राष्ट्रपति के रात्रिभोज में शामिल नहीं होंगे।

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नहीं होगा चेंज ऑफ गार्ड समारोह
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जी-20 सम्मेलन के कारण शनिवार को राष्ट्रपति भवन में चेंज ऑफ गार्ड समारोह नहीं होगा। यह 1773 में स्थापित राष्ट्रपति अंगरक्षक भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। इसके अधिकारी और जवान श्रेष्ठ घुड़सवार, सक्षम टैंककर्मी और छाताधारी सैनिक हैं।

दुनियाभर से 400 मेहमान लेंगे हिस्सा
सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुनियाभर से 400 मेहमान हिस्सा लेंगे। इसमें 78 कलाकार देश की संगीत विरासत को मेहमानों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। मात्र तीन घंटे की प्रस्तुति के लिए देशभर के कलाकार 31 अगस्त से ही तैयारी कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान 34 हिंदुस्तानी कलाकार, 18 कर्नाटक और 14 लोक वाद्य यंत्रों का उपयोग करेंगे।

कार्यक्रम के मेजबान राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी सुदेश धनखड़ के साथ, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू डिनर पार्टी में शामिल होंगे। हालांकि, अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया है. कार्यक्रम में शामिल होने वाले कैबिनेट मंत्रियों की सूची में राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, नरेंद्र सिंह तोमर, एस जयशंकर, अर्जुन मुंडा, स्मृति ईरानी और पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और प्रल्हाद जोशी शामिल हैं। जिन केंद्रीय मंत्रियों को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया गया है उनमें नारायण राणे, सर्बानंद सोनोवाल, वीरेंद्र कुमार, गिरिराज सिंह, ज्योतिरादित्य नाथ सिंधिया, अश्विनी वैष्णव, पशुपति कुमार पारस, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरण रिजिजू, राजकुमार सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मंडाविया, भूपेंद्र शामिल हैं। यादव, महेंद्र नाथ पांडे, पुरुषोतम रूपाला, जी किशन रेड्डी और अनुराग ठाकुर।

रात्रिभोज के लिए आमंत्रित राज्य मंत्री हैं: राव इंद्रजीत सिंह, जितेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, श्रीपाद यशो नाइक, फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रह्लाद सिंह पटेल, अश्विनी कुमार चौबे, विजय कुमार सिंह, कृष्ण पाल गुर्जर, राव साहब पाटिल, रामदास अठावले,साध्वी निरंजना ज्योति, संजीव कुमार बालियान, नित्यानंद राय, पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल एसपी सिंह बघेल, राजीव चन्द्रशेखर, शोभा करंदलाजे, भानु प्रताप सिंह वर्मा, दर्शना जरदोश, वी. मुरलीधरन, मीनाक्षी लेखी, सोम प्रकाश, रेणुका सिंह, रामेश्वर तेली, कैलाश चौधरी, अन्नपूर्णा देवी, ए नारायण स्वामी, कौशल किशोर, अजय भट्ट, बीएल वर्मा, अजय कुमार मिश्रा, देबू सिंह चौहान, भागवत खुबा, कपिल मोरेश्वर पाटिल, प्रतिमा भौमिक, सुभाष सरकार, भागवत कृष्ण राव कराड, राजकुमार रंजन सिंह ,भारतीय प्रवीण पवार, विशेश्वर टुडू, सुकांत ठाकुर, महेंद्र भाई, जॉन बारला, डॉ इलमुरुगन, निसिथ प्रमाणिक।

भारत के सीएजी गिरीश चंद्र मुर्मू, लोकसभा अध्यक्ष, ओएम बिड़ला, एनएसए अजीत डोभाल, दिल्ली एलजी वीके सक्सेना, जी20 शेयरपा अमिताभ कांत और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी और विशिष्ट अतिथि रात्रिभोज में शामिल होंगे। इस खास मौके पर पूर्व प्रधानमंत्रियों डॉ. मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा को भी आमंत्रित किया गया है. हालांकि, देवेगौड़ा ने शुक्रवार को जानकारी दी कि वह स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा आयोजित जी20 रात्रिभोज में शामिल नहीं हो पाएंगे.

सबसे पहले 69 साल पहले का डिनर डिप्लोमेसी से जुड़ा किस्सा पढ़ें…
1954 की बात है। चीन और रूस के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी समय चीन के राष्ट्रपति माओत्से तुंग ने दोनों देशों के रिश्ते सुधारने के लिए सोवियत रूस के एक डेलिगेशन को खाने पर बुलाया।

इस डिनर पार्टी के दौरान टेबल पर एक सेंटरपीस रखा गया था, जिसमें ड्रैगन एक बाघ से लड़ रहा था। इस सेंटरपीस में बाघ को बेहद कमजोर दिखाया गया था। इसे देख नाराज होकर सोवियत रूस का डेलिगेशन बिना खाए वापस अपने देश लौट गया।

दोनों देशों के बीच संबंध सही होने के बजाय और खराब हो गए। दरअसल, ड्रैगन को चीन और बाघ को सोवियत रूस का सिंबल माना जाता है। टेबल पर रखे सेंटरपीस में टाइगर को कमजोर दिखाकर चीन ने सोवियत रूस को कमजोर दिखाने की कोशिश की थी।

इंटरनेशनल पॉलिटिक्स का यह किस्सा ये जाहिर करता है कि विदेशी मेहमानों की डिनर पार्टी में टेबल पर बिछा कपड़ा हो, या खाने का मेनू; कमरे की सजावट हो, या मेहमानों की लिस्ट, हर छोटी बात की कैसे खास अहमियत होती है।

5 देशों में राजदूत रह चुके विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी राजीव भाटिया के जरिए डिनर डिप्लोमेसी से जुड़े अहम सवालों के जवाब जानते हैं…

सवाल 1: राष्ट्रध्यक्षों के डिनर की पूरी तैयारी कैसे होती है?
जवाब: 
किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जब विदेशी मेहमानों के लिए डिनर पार्टी या भोज का आयोजन करते हैं तो वह बहुत ज्यादा औपचारिक होता है। अगर भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री होस्ट हैं तो आयोजन का स्थान उनकी तरफ से पहले ही तय हो जाता है। उदाहरण के लिए राष्ट्रपति इस भोज को राष्ट्रपति भवन या देश के किसी दूसरी जगह पर आयोजित कर सकते हैं।

वेन्यू तय होने के बाद अशोक की लाट से बने इनविटेशन कार्ड विदेशी मेहमानों को भेजे जाते हैं। मेहमान इस कार्ड को एक्सेप्ट करने के बाद जवाब भेजते हैं कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। हालांकि, काफी हद तक ये सब कुछ दोनों देशों के अधिकारी पहले ही तय कर लेते हैं।

सवाल 2: विदेशी मेहमानों को क्या खिलाया जाएगा ये मेनू कौन तय करता है?
जवाब:
 विदेशी मेहमानों को क्या खिलाना है, इस पर आखिरी फैसला तो आयोजन के होस्ट, यानी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ही लेते हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए मुझे इंदिरा गांधी याद आती हैं।

उनके बारे में विदेश विभाग के कई बड़े अधिकारी कहा करते हैं कि प्रधानमंत्री रहते हुए वह शौक से विदेशी मेहमानों को भोज पर आमंत्रित करती थीं। इस दौरान मेहमानों के खाने के मेनू तय करने में इंदिरा गांधी घंटों लगाती थीं।

डिनर पार्टी का आयोजन करने वाले मेजबान PM या राष्ट्रपति विदेशी मेहमान के मेनू तैयार करते वक्त दो तरह की बातें सोच सकते हैं…

1. मैं विदेशी मेहमान की थाली में देशी खाना सर्व करके अपनी संस्कृति और मूल्यों को प्रमोट करूंगा।

2. चाहे जैसे भी हो मेहमान की खातिर तवज्जोह में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।

विदेशी मेहमान का मेनू तैयार करने से पहले प्रोटोकॉल ऑफिसर मेहमानों के दफ्तर से पता करते हैं कि उनकी डाइटरी हैबिट्स क्या हैं, उनके कोई मेडिकल इश्यूज तो नहीं है या उनको सबसे ज्यादा क्या खाना पसंद है। इसके बाद अतिथि देवो भव: के विचार से ऐसा मेनू तैयार किया जाता है, जिसे मेहमान दिल से पसंद करें और खाने के बाद उन्हें खुशी हो।

सवाल 3: विदेशी मेहमानों के डाइनिंग रूम में बैठने की अरेंजमेंट और सजावट के क्या नियम होते हैं?
जवाब: 
इस तरह की डिनर पार्टी में दो देश के नेताओं के हाथ मिलाने से लेकर उनके उठने-बैठने और खाने के नियम, मेन्यू और जगहें पहले से तय होती हैं। इस दौरान भारत सरकार के चीफ प्रोटोकॉल ऑफिसर को इन चीजों का बारीकी से ध्यान रखना होता है। कितने लोगों को आमंत्रित किया गया है, इस आधार पर डाइनिंग टेबल पर सीटिंग अरेंजमेंट होता है। टेबल से लेकर डाइनिंग कमरे तक की सजावट में बारीक बातों का ध्यान रखा जाता है।

एक बार राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर पार्टी में मुझे भी जाने का मौका मिला। जहां एक लंबी टेबल पर एक साथ करीब 150 लोग खाने के लिए बैठे थे। टेबल के बीच के हिस्से में राष्ट्रपति बैठते हैं। दूसरी तरफ उनके ठीक सामने विदेशी मेहमान या उस दिन के मुख्य अतिथि बैठते हैं। राष्ट्रपति के दाहिने तरफ प्रधानमंत्री या उस कार्यक्रम में मौजूद सबसे सीनियर अधिकारी बैठते हैं। वहीं, बाईं ओर नंबर टू सीनियर मिनिस्टर या अधिकारी बैठते हैं। इसके बाद दोनों तरफ पद और वरिष्ठता के आधार पर बाकी गेस्ट बैठते हैं।

कई बार विदेशी मेहमानों को प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति पर्सनल डिनर पार्टी भी देते हैं। यह बंद कमरे में या फिर सिर्फ कुछ लोगों की मौजूदगी में आयोजित होती है।

सवाल 4: प्रोटोकॉल अधिकारी खाने के अलावा डिनर पार्टी को यादगार बनाने के लिए क्या तैयारी करते हैं?
जवाब: राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की डिनर पार्टी में प्रोटोकॉल अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होती है कि वह इस कार्यक्रम में भारत की बेहतर कला और संस्कृति का प्रदर्शन करें। खाने के साथ नृत्य-संगीत या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो सकते हैं।

आमतौर पर हम लोग भी जब अपने घर किसी मेहमान को बुलाते हैं तो इन्हीं बातों का ध्यान रखते हैं कि घर साफ, सुंदर लगे और खाने के साथ कुछ मनोरंजन हो। इन सभी चीजों के लिए नियम होते हैं। अपने मन से कोई अधिकारी कुछ अलग से तैयारी नहीं कर सकता है।

सवाल 5: अपने अनुभव से बताएं कि डिनर डिप्लोमेसी आज के समय में कितनी खास है?
जवाब: 
दो देशों के बीच संबंध कैसे हैं, ये कई सारी वजहों पर निर्भर करता है। इसे आसानी से बदलना संभव नहीं होता है। हालांकि, भारत ही नहीं दूसरे देशों में यह माना जाता है कि डिनर डिप्लोमेसी के जरिए दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं।

एक साथ समय बिताने के बाद वो एक-दूसरे की समस्याएं, सीमाएं और चुनौतियों को समझते हैं। इससे दोनों कुछ ना कुछ ऐसा काम कर सकते हैं, जिससे कि उनके बीच एक समझौता हो।

हमें ये समझना होगा कि चाहे वह प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ही क्यों न हो लेकिन वो भी आखिरकार एक मनुष्य होता है। इसलिए जैसे कि हर इंसान के सामने अपनी इच्छाएं, महत्वाकांक्षाएं और अपने प्रेफरेंस होते हैं, वैसा ही उन सबके साथ भी होता है।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि डिनर डिप्लोमेसी के जरिए सामाजिक संबंधों को बेहतर करने के साथ एक-दूसरे को समझने का भी मौका मिलता है। इससे हम पारस्परिक संबंधों को निश्चित रूप से सुधार सकते हैं।

सवाल 6: 36 साल विदेश विभाग में काम करने के दौरान किसी डिनर पार्टी में शामिल होने का कोई किस्सा?
जवाब:
 प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के यहां आयोजित होने वाले डिनर पार्टी के दो लेवल होते हैं.. पहला– शासन और राज्य के अध्यक्ष के स्तर पर। इसके बारे में अधिकारियों के सीमित अनुभव होते हैं। दूसरा– डिप्लोमेट या मंत्री के स्तर पर। मेरे पास डिनर पार्टी के दो किस्से हैं, जो मैं संक्षेप में बताता हूं।

  • पहला किस्सा: जब डिनर पार्टी में फ्रांस का PM ने बुलाकर लंबी बातचीत की साल 1976 की बात है, जब मैं पेरिस में एक यंग डिप्लोमेट था। एक रोज वहां के राष्ट्रपति ने एक कॉकटेल और डिनर पार्टी में भारत के राजदूत के साथ मुझे भी बुलाया था। मुझे इसलिए क्योंकि शायद मैं फ्रेंच अच्छी तरह से बोल लेता था। वहां मुझे फ्रेंच बोलता देख तब के PM जैक शिराक साहब ने मुझे अपने पास बुलाया। इसके बाद उन्होंने मुझसे भारत के बारे में कई सवाल किए। दरअसल, वह कुछ दिनों बाद ही भारत के रिपब्लिक डे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आने वाले थे। अगर उस दिन वह कॉकटेल पार्टी या डिनर रिसेप्शन ना होता तो मेरे जैसे व्यक्ति का फ्रांस के प्रधानमंत्री से मिलना असंभव ही था।
  • दूसरा किस्सा: 2014 में जब शी जिनपिंग और उनकी पत्नी से मिला 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पत्नी के साथ भारत दौरे पर आए थे। उस वक्त मैं इंडियन कौंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) का डायरेक्टर जनरल था। ICWA की ओर से चीन के राष्ट्रपति के लिए एक कार्यक्रम और उसके बाद डिनर पार्टी का आयोजन किया गया था। उस समय दोनों देशों को संबंधों को लेकर अभी से अलग माहौल था। इस कार्यक्रम में शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्ते पर काफी अच्छा पब्लिक भाषण दिया। इसके बाद डिनर पार्टी के दौरान मुझे राष्ट्रपति जिनपिंग और उनकी पत्नी से मिलने का मौका मिला। वह बड़ी अच्छी अंग्रेजी बोल रही थीं। उनसे बात कर मुझे मालूम पड़ा कि किस तरह से बड़े-बड़े नेताओं और राष्ट्रपतियों के लिए उनकी पत्नियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सवाल 7: भारत के राष्ट्रपति भवन में क्यों नहीं ठहरते विदेशी मेहमान
1998 की बात है, भारत ने फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति जैक शिराक को रिपब्लिक डे परेड में बतौर चीफ गेस्ट बुलाया था। अब तक भारत आने वाले सभी विदेशी नेताओं को राष्ट्रपति भवन में ठहराया जाता था। हालांकि, शिराक ने कहा कि वो राष्ट्रपति भवन में नहीं ठहरेंगे। इसके बाद उनके ठहरने के लिए एक होटल में इंतजाम कराया गया।

तब से अब तक जब भी कोई विदेशी नेता भारत आता है तो उनके ठहरने का इंतजाम बड़े होटल में किया जाता है। ऐसा दो वजहों से होता है।

1) सुरक्षा- राष्ट्रपति भवन 33 एकड़ जमीन पर बना और 2 लाख स्कवेयर फीट में फैला है। इसके इतने विशाल होने के वजह से विदेशी नेताओं के सुरक्षा काफिले को इसमें सिक्योरिटी के इंतजाम करने में परेशानियां आती हैं। राष्ट्रपति भवन के मुकाबले होटल की सुरक्षा करना ज्यादा आसान रहता है।

2) माहौल- विदेश मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति भवन में माहौल काफी फॉर्मल रहता है, ऐसे में विदेशी नेताओं को कई तरह के कायदे और कानूनों के दायरे में रहना पड़ता है। वहीं होटल में विदेशी नेताओं को ज्यादा प्राइवेसी मिलती है। ऐसे में वो राष्ट्रपति भवन में ठहरने की बजाय होटल चुनते हैं।

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