प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह आसियान-भारत सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया के जकार्ता पहुंच गए। पीएम मोदी ने यहां समिट को संबोधित किया और कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति अहम है। पीएम ने कहा कि भारत और आसियान के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वन अर्थ, वन फैमिली हमारा मंत्र है। हमें हर क्षेत्र में मिलकर काम करने की जरूरत है।
‘वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमारे संबंधों में प्रगति हुई’
आसियान भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्रीय स्तंभ है। भारत की हिंद-प्रशांत पहल में भी आसियान क्षेत्र का प्रमुख स्थान है। वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में भी हर क्षेत्र में हमारे आपसी सहयोग में लगातार प्रगति हो रही है। वैश्विक विकास में आसियान क्षेत्र की अहम भूमिका है। 21वीं सदी एशिया की सदी है। मुझे विश्वास है कि आज हमारी बातचीत से भारत और आसियान क्षेत्र के भावी भविष्य को और सुदृढ़ बनाने के लिए नए संकल्प लिए जाएंगे।
पीएम मोदी ने जोको विदोदो को दी सफल आयोजन के लिए बधाई
आसियान और भारत की साझेदारी चौथे दशक में प्रवेश कर रही है। इस समिट के शानदार आयोजन के लिए मैं इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो का मैं अभिनंदन करता हूं। आसियान समिट की अध्यक्षता के लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई।
आसियान-भारत को मिलकर काम करने की जरूरत: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने गुरुवार सुबह इंडोनेशिया के जकार्ता में आसियान-भारत समिट को संबोधित किया। यहां उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति अहम है। पीएम ने कहा कि भारत और आसियान के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वन अर्थ, वन फैमिली हमारा मंत्र है। हमें हर क्षेत्र में मिलकर काम करने की जरूरत है।
PM ने आगे कहा – भारत के इंडो पैसेफिक इनिशिएटिव में भी आसियान का प्रमुख स्थान है। आसियान भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्रीय स्तंभ है। आज वैश्विक अनिश्चिततओं के माहौल में, हमारे आपसी सहयोग में वृद्धि हो रही है। हमारी साझेदारी चौथे दशक में प्रवेश कर रही है।
इस समिट के शानदार आयोजन के लिए मैं राष्ट्रपति विडोडो का अभिनंदन करता हूं। आसियान समिट की अध्यक्षता के लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई।

PM मोदी ने दिया दिल्ली से दिली का मंत्र
इसके बाद इंडोनेशिया में ईस्ट एशिया समिट की बैठक हुई। इसमें PM मोदी ने ऐक्ट ईस्ट इन ऐक्शन के तहत तिमोर-लेस्ते में भारतीय दूतावास खोलने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से दिली का स्लोगन दिया। दरअसल, तिमोर-लिस्ते की राजधानी का नाम दिली है।
इससे पहले जकार्ता पहुंचने पर PM का पारंपरिक अंदाज में स्वागत हुआ था। PM मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर भी आसियान समिट में शामिल हुए।
PM मोदी ये दौरा भारत में 9-10 सितंबर को होने वाली G20 समिट से ठीक 3 दिन पहले कर रहे हैं। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था आसियान देशों के साथ जुड़ना भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का जरूरी हिस्सा है।
आसियान समिट 5 सितंबर से शुरू हो गई है और 8 सितंबर तक चलेगी। आसियान में मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार, वियतनाम, कम्बोडिया, फिलीपींस, ब्रुनेई, थाईलैंड, लाओस और सिंगापुर शामिल हैं।
आसियान समिट के दौरान इंडोनेशिया ने रखा स्पेशल इवेंट
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 2022-23 में भारत और आसियान देशों के बीच 10 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले 9 आसियान समिट में हिस्सा ले चुके हैं। इस बार आसियान समिट के दौरान इंडोनेशिया ने एक स्पेशल इवेंट रखा है। इसे इंडो पैसिफिक फोरम नाम दिया गया है। इस फोरम के जरिए आसियान देश इंडो-पैसिफिक में अपने लक्ष्यों को लेकर राय देंगे। इसमें आसियान देशों की इंडो-पैसिफिक में कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर चर्चा की जाएगी।

हाल ही में चीन ने एक नक्शा जारी किया था जिस पर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि कई आसियान देशों ने आपत्ती जताई थी। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ताइवान ने भी चीन के विवादित मैप का विरोध किया है। उन्होंने साउथ चाइना सी में चीन के दावे को खारिज कर दिया है। फिलीपींस ने कहा- चीन को जिम्मेदारी से फैसले लेते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए। वहीं मलेशिया ने नक्शे को लेकर डिप्लोमैटिक प्रोटेस्ट दर्ज कराई है।
मैप में चीन ने हैनान द्वीप के साउथ में 1500 किमी तक एक U-शेप की लाइन दिखाई है। ये लाइन वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई और इंडोनेशिया के एक्सक्लूजिव इकोनॉमिक जोन्स से होकर गुजरती है। चीन के इस नए मैप में ज्यादा जियोग्राफिकल एरिया को कवर किया गया है। इसमें एक 10 डैश वाली लाइन है, जिसके जरिए चीन ने ताइवान को अपने हिस्से में दिखाया है। ये मैप 1948 में जारी नक्शे की तरह ही है।
भारत ने पिछले साल ही आसियान देशों के साथ कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप (CSP) साइन की थी। इसके चलते PM मोदी का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होते हैं। इसके तहत रक्षा, आर्थिक और तकनीकी हितों को बढ़ाने के लिए मिलकर काम किया जाता है। वहीं, इस इलाके में चीन को काउंटर करने के लिए भारत आसियान देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है।







