‘पाकिस्तान के बनने के बाद से ही यहां आधे समय तक सेना का शासन रहा है। जबकि बाकी आधे समय में सेना ने पर्दे के पीछे से देश की राजनीति को कंट्रोल किया। यहां बनने वाली हर सरकार को सेना की मदद चाहिए। इमरान खान भी सेना के समर्थन से सत्ता में आए थे। यहां सेना की मदद के बिना सरकार नहीं चला सकते हैं।’
10 अगस्त को ये बात पाकिस्तानी चैनल ‘जियो न्यूज’ पर तब के पीएम शाहबाज शरीफ ने कही थी। इस इंटरव्यू से ठीक एक दिन पहले यानी 9 अगस्त की आधी रात को पाकिस्तान की संसद भंग कर दी गई थी।
आर्थिक तंगी और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहे पाकिस्तान में अब क्या होगा? अगले प्रधानमंत्री शाहबाज, नवाज या इमरान होंगे? क्या एक बार फिर सेना पाकिस्तान की सत्ता अपने हाथों में लेगी?
पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर, जेएनयू में इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर राजन कुमार और वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर के जरिए पाकिस्तान की राजनीति से जुड़े 8 सवालों के जवाब जानते हैं…
सवाल 1: पाकिस्तान की संसद भंग क्यों की गई?
जवाब: भारत की लोकसभा की तरह ही पाकिस्तान में नेशनल असेंबली है। इसका कार्यकाल 5 साल का होता है। अगस्त 2018 में चुनी गई पाकिस्तानी नेशनल असेंबली का 12 अगस्त 2023 को कार्यकाल खत्म हो रहा है।
पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद-52 के तहत सरकार के पांच साल पूरे होने पर नेशनल असेंबली को भंग करना होता है। इसे साधारण भाषा में चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत कह सकते हैं। इस दौरान पीएम या मंत्रिमंडल का कोई भी सदस्य अपने पद पर नहीं होता है।
पीएम की सिफारिश पर राष्ट्रपति 48 घंटों के भीतर असेंबली भंग नहीं करते हैं तो ये अपने आप भंग हो जाती है। दिलचस्प बात तो ये है कि अब तक सिर्फ 2 बार 2013-2018 और 2018- 2023 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली अपने कार्यकाल के अंत तक चली है। इससे पहले पाकिस्तान में कोई सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई।
सवाल 2: पाकिस्तान में न पीएम और न मंत्रिमंडल, संसद भंग होने के बाद अब आगे क्या?
जवाब: पाकिस्तानी कानून के मुताबिक संसद भंग होने के बाद इलेक्शन कमीशन एक्शन में आता है। वहां के संविधान के आर्टिकल 224 के तहत इलेक्शन कमीशन को 60 से 90 दिनों के भीतर देश में आम चुनाव कराने होते हैं।
जब तक चुनाव नहीं हो जाते, देश को एक अंतरिम सरकार चलाती है। इसके प्रमुख अंतरिम प्रधानमंत्री होते हैं। शाहबाज शरीफ और विपक्ष के नेता राजा रियाज के बीच 2 दिन तक चली गहमा-गहमी के बाद 12 अगस्त को पाकिस्तान में अनवार उल हक को केयरटेकर प्रधानमंत्री चुन लिया गया है।
अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी: नई सरकार चुने जाने तक देश में जरूरी काम होते रहें और साथ ही निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें।
सवाल 3: पाकिस्तान में कब तक हो पाएंगे आम चुनाव?
जवाब: इसके 3 एस्पेक्ट हैं…
1) परिसीमन में कम-से-कम 120 दिन का समय लगेगा। ऐसे में दिसंबर या उसके बाद ही चुनाव संभव होगा।
2) पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहे राणा सनाउल्लाह के मुताबिक 2023 में चुनाव संभव नहीं है।
3) 2024 में भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव के आसपास ही पाकिस्तान में भी चुनाव होने की संभावना है।
सवाल 4: ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में अगले 3 महीने केयरटेकर सरकार नहीं बल्कि सेना शासन करेगी?
जवाब: पाकिस्तान में संसद भंग होने के बाद केयरटेकर सरकार बनती है। ये देश चलाने से जुड़े रोजमर्रा के काम के साथ निष्पक्ष चुनाव आयोजित कराती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। दरअसल, पहली बार पाकिस्तान में डिजिटल जनगणना कराई गई है, जिसमें वहां की जनसंख्या 21 करोड़ से बढ़कर 24 करोड़ हो गई है।
आबादी बढ़ने की वजह से वहां चुनावी क्षेत्रों का परिसीमन होना है। अब केयरटेकर सरकार को ही ये तय करना है। जबकि पॉलिसी को लेकर ऐसे बड़े फैसले जनता की चुनी हुई सरकार लेती है।
यही वजह है कि माना जा रहा है कि ये सब कुछ सेना के इशारे पर हो रहा है। पाकिस्तानी सेना अपने मुताबिक परिसीमन कराना चाहती है। ताकि उसकी मनपसंद सरकार जीतकर सत्ता में आए। ऐसे में केयरटेकर सरकार सिर्फ मुखौटा होगी, बाकी चुनावी फैसले सेना लेगी। यही अभी पाकिस्तानी की राजनीति में विवाद की सबसे बड़ी वजह है।
सवाल 5: क्या इमरान खान फिर से चुनाव लड़ पाएंगे?
जवाब: इमरान खान 5 अगस्त को गिरफ्तार हुए। पिछले 3 महीने में ये उनकी दूसरी गिरफ्तारी थी। अप्रैल 2022 में सत्ता से बाहर होने के बाद उनके खिलाफ पाकिस्तान की कोर्ट में 180 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से कई तो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं।
खान के भविष्य को लेकर 3 एस्पेक्ट हैं…
1) खान को इन मामलों की सुनवाई में कोर्ट के लंबे चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसमें कई महीने लग सकते हैं। मुमकिन है कि तब तक पाकिस्तान में चुनाव हो जाएं और खान इनमें हिस्सा ही न ले पाएं।
2) अभी इमरान खान पर जो चार्ज हैं, उसके मुताबिक वो 5 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते। इसके अलावा आर्मी भी उन्हें सत्ता में नहीं आने देगी। इमरान खान की पार्टी को पूरी तरह से तोड़ दिया गया है। अभी पाकिस्तान में जो सरकार है वो एक हाइब्रिड सरकार है। यानी सरकार में सेना के भी लोग शामिल हैं। फिलहाल आर्मी और शाहबाज शरीफ की सरकार में इस बात को लेकर सहमति है कि इसी गठबंधन को फिर से सत्ता में लाया जाए।
3) साल 2017 में इमरान खान की दायर एक याचिका पर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। 2018 के चुनाव से ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
सत्ता में आने के बाद इमरान ने नवाज को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। एक दिन जब नवाज की बेटी मरियम उनसे मिलने जेल पहुंची तो उन्हें पिता की नजरों के सामने गिरफ्तार करा दिया।
नवाज को जेल में उनकी बीमार पत्नी कुलसूम से फोन पर बात करने तक का मौका नहीं दिया गया। कुलसूम की मौत से पहले उससे बात करने के लिए नवाज ने जेल के अधिकारियों से खूब आरजू की, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
पत्नी की मौत की जानकारी नवाज को कई घंटों बाद मिली। इन सबके बावजूद नवाज ने खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बेदखल करा दिया। इतना ही नहीं आसिफ अली जरदारी के साथ गठबंधन कराकर अपने छोटे भाई को प्रधानमंत्री तक बनवाया। अगर नवाज शरीफ इतना सब होने के बावजूद पाकिस्तान की सत्ता में वापसी कर सकते हैं तो भविष्य में इमरान भी वापसी कर सकते हैं।
इसकी एक वजह ये है कि पाकिस्तान की जनता के बीच इमरान खान की पॉपुलैरिटी अभी घटी नहीं है। 5 अगस्त को गिरफ्तारी के ठीक एक दिन बाद पेशावर में हुए उप-चुनाव में उनकी पार्टी को जीत मिली, जबकि पहले वो इस सीट से हार गए थे।
सवाल 6: क्या पाकिस्तान में फिर नवाज शरीफ की सरकार बनेगी?
जवाब: पाकिस्तान में आर्मी जिसे चाहती है, उसी की सरकार बनती है। अभी आर्मी शाहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले गठबंधन PDM को ही सत्ता में लाना चाहती है। अगर ये गठबंधन सत्ता में आता है तो 2 सवाल उठेंगे..
- क्या नवाज शरीफ वापस पाकिस्तान आएंगे?
- क्या उन पर लगे चार्ज हटेंगे और वो प्रधानमंत्री बनेंगे?
10 अगस्त को खुद शाहबाज शरीफ ने दोनों सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जल्द नवाज शरीफ पाकिस्तान आएंगे और चुनाव में उनकी पार्टी को लीड करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने नवाज शरीफ के एक बार फिर से पीएम बनने की भी संभावना जताई है। हालांकि उन पर लगे चार्ज हटने के बाद ही ये संभव होगा।
चार्ज हटाने के लिए शहबाज सरकार ने 2 कानून बनाए:
पहला- ‘रिव्यू ऑफ जजमेंट्स एंड ऑर्डर एक्ट 2023’ था। इस कानून के तहत पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट से किसी मामले में फैसला सुनाए जाने के बाद उसे रिव्यू करने के लिए फिर अपील की जा सकती है। मई में लाए गए कानून से पहले पाकिस्तान में ऐसा तरीका नहीं था जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जा सके।
इसका इस्तेमाल नवाज शरीफ 2018 में उनके खिलाफ सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए कर सकते हैं। दरअसल 2018 में पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने उनके आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी थी।
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल, जिनसे पाक सरकार की तनातनी चलती रहती है, वो भी सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। नवाज शरीफ भी सितंबर में पाकिस्तान लौट रहे हैं। ऐसे में नए चीफ जस्टिस के आने से नवाज शरीफ के फैसले को आसानी से पलटवाया जा सकता है।
हालांकि 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को असंवैधानिक करार कर दिया है। इसके बावजूद नवाज शरीफ का फिर से चुनाव लड़ने का रास्ता पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। इसकी वजह शाहबाज सरकार का जून में बनाया गया दूसरा कानून है। जिसका नाम ‘इलेक्शन अमेंडमेंट एक्ट 2023’ है। इस कानून के मुताबिक जिन लोगों पर आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई गई थी, अब वो पांच साल से ज्यादा नहीं रहेगी। नवाज शरीफ 5 साल की पाबंदी के समय को पूरा कर चुके हैं। ऐसे में वो फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। अगर उनकी पार्टी या गठबंधन को जीत मिली तो नवाज शरीफ फिर प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
सवाल 7: क्या पाकिस्तान के चुनाव में अमेरिका और चीन को भी दिलचस्पी है?
जवाब: हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका की नाराजगी के बाद इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। ये काफी हद तक सही हो सकता है। हालांकि इमरान की सरकार गिरने की इकलौती वजह अमेरिका नहीं है।
उसके लिए सेना की नाराजगी और वहां की राजनीतिक परिस्थितियां ज्यादा जिम्मेदार हैं। अफगानिस्तान में तालिबान से डील करने के लिए अमेरिका को अब भी पाकिस्तान की जरूरत है। भारत को कंट्रोल करने के लिए भी अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है। वहीं, पाकिस्तान की सेना हथियारों के लिए अब भी अमेरिका पर निर्भर है। ऐसे में पाकिस्तान की सेना का फैसला अमेरिका से प्रेरित हो सकता है।
चीन की भी CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के चलते पाकिस्तान की राजनीति में काफी दिलचस्पी है। हालांकि वो इसमें दखलंदाजी से दूर रहता है।
सवाल 8: पाकिस्तान में इस बार लोकतांत्रिक सरकार चुने जाने की संभावना कितनी है?
जवाब: पाकिस्तान की सरकार का सेना से आजाद होना इतना आसान नहीं है। जब भी सेना को लगता है कि कोई सरकार लोगों का समर्थन हासिल कर उसे दरकिनार कर रही है तो उसे गिरा दिया जाता है। इमरान खान और नवाज शरीफ दोनों इसके उदाहरण हैं। 2013 के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद नवाज को लगने लगा था कि उनके पास लोगों का समर्थन है। इसका फायदा उठाकर वो आर्मी को साइड करना चाहते थे और संसद को सुप्रीम बनाना चाहते थे ।
ये आर्मी को पसंद नहीं आया। नतीजा ये रहा कि आर्मी ने इमरान को समर्थन देना शुरू कर दिया। पाकिस्तान की आर्मी राजनीति और फाइनेंस में अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है। 2022 में फिर से इतिहास दोहराया गया। सेना के इमरान खान से मतभेद बढ़ने लगे। इमरान लोगों के समर्थन का दम दिखाकर सेना को चुनौती देने लगे। इसके बाद सेना ने उन्हें भी साइड करवा दिया।







