लोकसभा में सभी दलों की तरफ से मणिपुर में मैतई और कुकी समुदायों से हिंसा से दूर रहने और शांति कायम करने की अपील की गई। पहली बार गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के हालात पर खुलकर बात की। पहली बार सच सामने आया। विपक्ष ने पूछा था, प्रधानमंत्री खामोश क्यों हैं, सरकार क्या रही है, अमित शाह ने इसका जबाव दिया। विपक्ष की तरफ से पूछा गया था कि मणिपुर के मुख्यमंत्री को क्यों नहीं हटाया गया, अमित शाह ने इसका जबाव दिया। गौरव गोगोई ने इल्जाम लगाया था कि सरकार तमाशा देख रही है, वहां मणिपुर जल रहा है, इस पर अमित शाह ने पूरे तथ्य सामने रख दिए। विरोधी दलों के नेताओं ने कहा था कि बीजेपी मणिपुर पर राजनीति कर रही है, इस पर भी अमित शाह ने बता दिया कि राजनीति कौन कर रहा है और कैसे कर रहा है। अमित शाह लोकसभा में दो घंटा बोले।
चूंकि चर्चा अविश्वास प्रस्ताव पर थी, इसलिए उन्होंने मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल की बात की, सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, कांग्रेस के जमाने मे हुए घपले, घोटाले याद दिलाए। UPA को नाम क्यों बदलना पड़ा इसकी बात की। अमित शाह ने बिना किसी लाग लपेट के, साफ-साफ शब्दों में कहा कि मणिपुर में जो हुआ वो शर्मानक है, वह सभ्य समाज पर कलंक है, लेकिन सरकार खामोशी से नहीं बैठी। 3 मई को हिंसा हुई और अगले चौबीस घंटे में सरकार ने क्या क्या किया, इसका पूरा ब्यौरा शाह ने सदन के सामने रख दिया। अमित शाह ने कुकी और मैतेई समुदायों के बीच विवाद की की असली वजह भी बताई। मणिपुर के मामले में जिस बात ने पूरे देश की आत्मा को सबसे ज्यादा झकझोर कर रखा था, वह दो महिलाओं के साथ शर्मनाक व्यवहार का वीडियो था। अमित शाह ने बताया कि पुलिस को वो वीडियो तभी मिला जब वो पब्लिक के सामने आ चुका था। इससे पहले सरकार को इस बारे में कुछ पता नहीं था। अमित शाह की बात कन्विंसिंग थी।
मैं कहूंगा कि अमित शाह ने मणिपुर के मामले में अच्छा जवाब दिया। उन्होंने कुछ छिपाने की कोशिश नहीं की, हाथ जोड़कर शांति की अपील भी की। मणिपुर को लेकर एक बड़ा सवाल ये था कि इतना कुछ होने पर भी मुख्यमंत्री को हटाया क्यों नहीं गया? अमित शाह ने बताया कि बीरेन सिंह पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं, केंद्र सरकार के निर्देश पर काम कर रहे हैं, वह शांति स्थापित करने में मदद कर रहे हैं, इसीलिए सीएम बदलने की कोई जरूरत नहीं है। अमित शाह ने ये माना कि बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, हालात काबू से बाहर चले गए थे लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से कोशिश करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इस मामले से जुड़ी एक बड़ी बात ये भी थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर के मामले पर खामोश क्यों रहे? पिछले कई हफ्तों से विपक्ष ने ये माहौल बनाया कि प्रधानमंत्री मणिपुर पर कुछ इसीलिए नहीं बोले कि उन्हें मणिपुर की चिंता नहीं है। अमित शाह ने खुलासा किया कि नरेंद्र मोदी रात-रात भर मणिपुर को लेकर किस कदर परेशान रहे, गृह मंत्री को निर्देश देते रहे। अमित शाह ने ये भी गिनवा दिया कि पहले जब जब इस तरह की हिंसा हुई, हालात खराब हुए तो संसद में कभी किसी प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया था। ये सारी बातें सुनकर मुझे लगा कि विरोधी दल अगर पहले ही अमित शाह को मणिपुर पर बोलने देते, तो बात इतनी न बढ़ती।







