भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की इमेज में काफी सुधार हुआ था। उनके बयान भी ठीक-ठाक आने लगे थे। मुझे लगा था कि वो बदल गए हैं पर लोक सभा में राहुल का भाषण सुनकर लगा, ना वो बदले हैं, ना बदलना चाहते हैं। आज भी मोदी और अदानी उनके फेवरिट सब्जेक्ट हैं। मणिपुर पर राहुल के भाषण ने जरूर चौंकाया, ‘भारत माता की हत्या’, ‘मणिपुर के टुकड़े’, ‘सरकार देशद्रोही’, ऐसे शब्द हैं जो आम तौर पर वामपंथी इस्तेमाल करते हैं, ये कांग्रेस की भाषा नहीं है। ये ‘टुकड़े टुकड़े’ गैंग की भाषा है लेकिन राहुल ने ऐसे सारे शब्दों को बार-बार रिपीट किया। राहुल से जुड़ा दूसरा किस्सा था, उनकी फ्लाइंग किस का। इसे बीजेपी की महिला सांसदों ने बड़ा मुद्दा बनाया। इस हरकत को लेकर विश्वसनीयता इसलिये हो गई कि एक बार पहले राहुल गांधी ने संसद में मोदी को गले लगाने के बाद आंख मारी थी। इसीलिए लगा कि राहुल गांधी ना पहले मुद्दों को लेकर गंभीर थे, ना अब हैं। वो सारी बातें इफेक्ट क्रिएट करने के लिए करते हैं। इससे भी लगा कि राहुल ना बदले हैं, ना बदलना चाहते हैं। वैसे मुझे लगता है कि फ्लाइंग किस को इतना ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं थी। इसे राहुल गांधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ का सामान मान कर इग्नोर कर देना चाहिए, इसे छोड़ कर राहुल से जंग सियासी मुद्दों को लेकर लड़ी जानी चाहिए और वो इसके लिए पूरा स्कोप देते हैं, काफी मसाला देते हैं। इसीलिए कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लोग चाहते थे कि राहुल गांधी लोकसभा में बोलें।
क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इससे...







