सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ दलीलें सुन रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल वकील ने जिरह की। इससे पहले, सिब्बल ने दलील पेश की थी कि अनुच्छेद 370 ने स्थायी रूप ले लिया है। उसे संसद निरस्त नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के सामने दो अहम बिंदु हैं। पहला- क्या अनुच्छेद 370 ने जम्मू कश्मीर की संविधान सभा की समाप्ति के साथ स्थायी दर्जा प्राप्त कर लिया? और दूसरा- क्या उसे निरस्त करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया वैध थी? सुप्रीम कोर्ट में आज आर्टिकल 370 पर सुनवाई के लाइव अपडेट्स देखिए।
आर्टिकल 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन की सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल दलील पेश कर रहे हैं।
सिब्बल ने J&K की संविधान सभा के उद्देश्यों को रेखांकित करते शेख अब्दुल्ला के भाषण का जिक्र किया। यह भाषण 5 नवंबर, 1951 को दिया गया था।
सीजेआई ने कहा कि शेख अब्दुल्ला अपने भाषण में भारत से जुड़ाव का महत्व समझाते हैं। सिब्बल ने कहा कि कश्मीर के लोगों ने भी भारत की तरह अपना संविधान बनाया। इन सबके केंद्र में लोगों की इच्छा है।
CJI ने कहा, ‘शेख अब्दुल्ला जो कहते हैं वह बड़ा दिलचस्प है। वह कहते हैं, ‘पाकिस्तान के पक्ष में जो सबसे मजबूत तर्क दिया जा सकता है, वह यह कि पाकिस्तान एक मुस्लिम राज्य है।”
सिब्ब्ल ने सुनवाई के दौरान Brexit का हवाला दिया। कहा कि रेफरेंडम का संवैधानिक प्रावधान नहीं थ। लेकिन जब आप रिश्ता तोड़ना चाहते हैं तो आपको लोगों की राय जरूर लेनी चाहिए क्योंकि वे उस फैसले के केंद्र में होते हैं।
एक्जीक्यूटिव एक्ट से नहीं हटा सकते संवैधानिक प्रावधान
एक्जीक्यूटिव एक्ट के जरिए संविधान के प्रावधान हटाए नहीं जा सकते। आप एक्जीक्यूटिव एक्ट से संविधान सभा को विधानसभा में नहीं बदल सकते।
कपिल सिब्बल, याचिकाकर्ता के वकील
जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने से जुड़े आर्टिकल-370 को खत्म किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच सुनवाई कर रही है। कुल 18 वकीलों की ओर से याचिकाकर्ता का केस पेश किया जा रहा है। कपिल सिब्बल ने याचियों की ओर से दलील की शुरुआत की है। सुप्रीम कोर्ट ने याचियों के वकील को कुल 60 घंटे का वक्त दिया है।
सुप्रीम कार्ट ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के पहले दिन सवाल किया कि क्या चुनी हुई राज्य सरकार की सिफारिश से 370 निरस्त नहीं हो सकता?
सिब्बल ने कहा कि चुनी हुई राज्य सरकार को भी यह अधिकार नहीं था। कोर्ट ने पूछा कि एक प्रावधान (अनुच्छेद 370) जो अस्थायी था, वह 1957 में जम्मू और कश्मीर संविधान सभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद स्थायी कैसे हो गया। संविधान सभा का कार्यकाल 1957 में खत्म हो गया, तो अब क्या?
सिब्बल ने कहा 1951 से 1957 तक जम्मू कश्मीर की संविधान सभा फैसला ले सकती थी। उस दौरान यह अनुच्छेद-370 अस्थायी था, लेकिन 1957 के बाद अनुच्छेद-370 को निरस्त नहीं किया जा सकता था।







