सर्वोच्च अदालत ने सिर्फ १३३ दिन बाद ही उस फैसले पर रोक लगा दी‚ जिसके कारण राहुल गांधी की संासदी चली गई थी। अदालत ने कहा‚ जब तक राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं होती‚ तब तक दोष सिद्धि पर रोक रहेगी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट से अधिकतम सजा देने का कारण भी पूछा। साथ ही कहा कि इस सजा के चलते सांसद की एक सीट खाली रह जाएगी जो एक शख्स के नहीं बल्कि मतदाताओं के अधिकार का मसला है। राहुल ने बेंगलुरू के कोलार में २०१९ में चुनावी भाषण में मोदी सरनेम वालों को चोर कहा था। इस पर उनके खिलाफ शिकायत की गई थी और निचली अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि भाषण में जो कुछ कहा गया‚ वह अच्छा नहीं था। राहुल इसका ध्यान रखें। जनता के बीच बोलते हुए नेताओं को सावधानी बरतने की बात भी की। इस फैसले से राहुल‚ उनके समथर्कों समेत उनकी पार्टी कांग्रेस ने राहत की सांस ली। सांसदी जाने के बाद से चल रही जुबानी व सोशल मीडि़या में छींटाकशी अभी भी जारी है। अंतिम फैसले के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि वह अगला चुनाव भी लड़़ सकते हैं। अब वह मौजूदा सत्र में शामिल होंगे और संसद सदस्य को मिलने वाला बंगला उन्हें पुनः मिल सकता है। अदालत ने मामले को राजनीतिक ना बनाने की हिदायत दी है। नेताओं के खिलाफ इस तरह की शिकायतें अक्सर विरोधियों द्वारा दर्ज कराई जाती हैं। मगर सबसे बड़़ा विपक्षी दल और सबसे पुरानी पार्टी के जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि के साथ हुए इस बर्ताव को राजनीति से ज्यादा जोड़़ा गया। नेताओं को अपने भाषणों‚ सार्वजनिक बातचीत व बयानों में इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। वे जनता के प्रतिनिधि ही नहीं होते‚ बल्कि समाज में मानक भी स्थापित करते चलते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के साथ व्यावहारिकता व नैतिकता का भी सम्मान किया जाना जरूरी है। इधर के कुछ सालों में राजनीति में आ रही गिरावट का यह छोटा सा नमूना है। जनता जनार्दन व समर्थकों को प्रभावित करने के लोभ में स्तरहीन बातें करने में नेता सकुचाते नहीं। यह फैसला उन तमाम राजनेताओं को सीख देने वाला साबित हो सकता है जो बयानबाजी व कटाक्ष करने के महारथी हैं। एक तो खिलाफ बोलने में शालीनता रखें‚ दूसरे विपक्ष को सबक सिखाने सरीखा ओछापन लाने से बाज आएं क्योंकि आने वाले वक्त में ये दोनों ही फैसले ऐतिहासिक साबित हो सकते हैं।
अदालतों के सामने क्यों खड़ा हुआ बड़ा संवैधानिक सवाल?
भारत में डिजिटल कम्युनिकेशन तेजी से सार्वजनिक बातचीत और चर्चाओं को आकार दे रहा है। हाल के वर्षों में, प्राइवेट...







