वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान सामने आया है. सीएम योगी ने कहा कि मस्जिद के अंदर त्रिशूल क्या कर रहा था. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी को मस्जिद कहेंगे तो फिर विवाद होगा. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भगवान ने जिसको दृष्टि दी है वो देखे कि मस्जिद कि अंदर त्रिशूल क्या कर रहा है. उन्होंने कहा कि ज्योर्तिलिंग है देव प्रतिमाएं हैं, दीवारें चिल्ला-चिल्लाकर क्या कह रही है.
यूपी में 6 साल में नहीं हुआ कोई दंगा- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
एक इंटरव्यू के दौरान यूपी के सीएम ने कहा कि, इस गलती पर मुस्लिम समाज की ओर से प्रस्ताव आना चाहिए कि ऐतिहासिक गलती हुई है और इस का समाधान होना चाहिए. सीएम ने कहा कि वह पिछले छह साल से यूपी की कमान संभाल रहे हैं, लेकिन पिछले 6 साल से कोई दंगा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यूपी में पंचायत चुनाव हुआ और वेस्ट बंगाल में हुआ. देखें तो क्या हुआ. वहां कुछ लोग सत्ता में जबरन सब कैद करना चाहते हैं कैसे वहां विरोधी दल के लोगों को मारा गया. आखिर दोहरा दृष्टिकोण क्यों है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एएनआई के पॉडकास्ट में अपनी बात रख रहे थे. इस दौरान उन्होंने ज्ञानवापी समेत कई सवालों के जवाब दिए.
संविधान से चलेगा देश- सीएम योगी
इस दौरान सीएम ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, मत और मजहब से नहीं. उन्होंने कहा कि मैं मैं ईश्वर का भक्त हूं, लेकिन किसी पाखंड में विश्वास नहीं करता हूं. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपका मत, आपका मजहब, अपने तरीके से होगा, अपने घर में होगा. अपनी मस्जिद, अपने इबादतगाह तक होगा. सड़क पर प्रदर्शन करने के लिए नहीं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आप जो हैं किसी दूसरे पर आप उसे थोप नहीं सकते. उन्होंने कहा कि अगर किसी को देश में रहना है तो राष्ट्र को सर्वोपरि मानना है, ना कि अपने मत और मजहब को.
क्या है ज्ञानवापी प्रकरण
1991 में, काशी विश्वनाथ मंदिर के भक्तों द्वारा एक मुकदमा दायर किया गया था, जिसके पास ज्ञानवापी मस्जिद स्थित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर भगवान विश्वेश्वर मंदिर को नष्ट करने के बाद किया गया था।
अंजुमन इस्लामिया मस्जिद कमेटी ने किया था विरोध
इस मामले में एक याचिका अंजुमन इस्लामिया मस्जिद कमेटी (एआईएमसी) द्वारा दायर की गई थी, जो मस्जिद का प्रबंधन करती है। समिति ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए मामले की स्थिरता पर सवाल उठाया है। अधिनियम के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को मौजूद पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र में परिवर्तन निषिद्ध है।
ज्ञानवापी प्रकरण में 1991 में दायर की गई पहली याचिका
1991 पूजा स्थल अधिनियम की तरह, इस मामले की जड़ें भी वर्ष 1991 में हैं। मामले में पहली याचिका स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर ने 1991 में वाराणसी अदालत में दायर की थी। याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने के अधिकार की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में तीन मांगें रखी थीं. इसमें पूरे ज्ञानवापी परिसर को काशी मंदिर का हिस्सा घोषित करना, परिसर क्षेत्र से मुसलमानों को हटाना और मस्जिद को ध्वस्त करना शामिल था।







