राजधानी दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण संबंधी अध्यादेश की सांविधानिकता पर चुनौती देने वाली आप सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ सुनवाई कर सकती है। 19 मई को केंद्र ने दिल्ली में ग्रुप-ए अफसरों के स्थानांतरण व पोस्टिंग के लिए प्राधिकरण बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 लागू किया था।
बारिश के कारण वकील गैरहाजिर रहे तो प्रतिकूल आदेश नहीं : सीजेआई
उधर, सोमवार को भारी बारिश और जलभराव के कारण यदि वकील सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से गैरहाजिर रहे तो शीर्ष कोर्ट कोई विपरीत आदेश नहीं पारित करेगा। यह निर्देश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के अनुरोध पर दिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा, राजधानी में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए चीफ जस्टिस से किए गए अनुरोध के बाद उन्होंने आश्वस्त किया कि वह व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों से कहेंगे कि बारिश के कारण 10 जुलाई को वकीलों की अनुपस्थिति के कारण कोई प्रतिकूल आदेश न पारित करें।
जस्टिस कोशी को तेलंगाना भेजे जाने की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पी सैम कोशी को तेलंगाना हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 5 जुलाई को जस्टिस कोशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। हालांकि, रविवार को कॉलेजियम ने उन्हें तेलंगाना भेजने का प्रस्ताव पारित किया।
AAP ने याचिका में अध्यादेश को असंवैधानिक बताया था
AAP ने याचिका में कहा था- केंद्र की ओर से लाया गया अध्यादेश असंवैधानिक है, जो संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। दिल्ली सरकार ने अध्यादेश को रद्द करने और उस पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है।
मामले में पहली सुनवाई 4 जुलाई को हुई थी, तब कोर्ट ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया था। 6 जुलाई को सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट से मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
CM ऑफिस ने NCCSA की आलोचना की थी
2 जुलाई को CM ऑफिस ने राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) की आलोचना की थी। CM ऑफिस की ओर से कहा गया कि नौकरशाह दिल्ली के मुख्यमंत्री के फैसलों को पलट रहे हैं। नियमों के मुताबिक, NCCSA अपने फैसले बहुमत के आधार पर लेगा।
इस प्राधिकरण में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त दो शख्स (मुख्य सचिव और प्रमुख गृह सचिव) हैं। जिससे उन्हें CM के सभी फैसले पटलने की शक्ति मिल गई है। हालांकि, उपराज्यपाल सचिवालय ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था।
यह पूरा विवाद क्या था…
- AAP सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की लड़ाई 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची थी। हाईकोर्ट ने अगस्त 2016 में राज्यपाल के पक्ष में फैसला सुनाया था।
- AAP सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 5 मेंबर वाली संविधान बेंच ने जुलाई 2016 में आप सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि CM ही दिल्ली के एग्जीक्यूटिव हेड हैं। उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं।
- इसके बाद सर्विसेज यानी अधिकारियों पर नियंत्रण जैसे कुछ मामलों को सुनवाई के लिए दो सदस्यीय रेगुलर बेंच के सामने भेजा गया। फैसले में दोनों जजों की राय अलग थी।
- जजों की राय में मतभेद के बाद यह मामला 3 मेंबर वाली बेंच के पास गया। उसने केंद्र की मांग पर पिछले साल जुलाई में इसे संविधान पीठ के पास भेज दिया।
- संविधान बेंच ने जनवरी में 5 दिन इस मामले पर सुनवाई की और 18 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
- 11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों पर कंट्रोल का अधिकार दिल्ली सरकार को दे दिया। साथ ही कहा कि उपराज्यपाल सरकार की सलाह पर ही काम करेंगे।







