बिहार में 6 दलों की महागठबंधन की सरकार है. गठबंधन में शामिल दल एकता की बात करते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर वो एक दूसरे का विरोध करते नजर आ रहे हैं. शिक्षा विभाग में जारी विवाद पर RJD और JDU अलग-अलग राय रख रही है. 2024 के चुनाव से पहले बिहार की सियासत में कई नए मोड़ आ रहे हैं. चुनावी शोर के बीच जोड़-तोड़ की राजनीति भी चरम पर है. इस बीच सत्ताधारी महागठबंधन की सरकार में ऑल इज़ नॉट वेल वाले हालात बन रहे हैं. क्योंकि महागठबंधन के घटक दलों के बीच में असंतोष पनपने लगा है.
कुछ तो पक रहा है!
असंतोष की ये हवा नेताओं के साथ-साथ अधिकारियों तक पहुंचने लगी है. नतीजा मंत्री और अधिकारी के बीच रार, जिसका ताजा उदाहरण है बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच चल रही तनातनी है. इस विवाद में अब महागठबंधन भी दो फाड़ हो रही है. दरअसल केके पाठक के मामले पर जेडीयू प्रवक्ता सुनील कुमार का जो बयान सामने आया वो बताने को काफी था कि बिहार की महागठबंधन में बहुत कुछ पक रहा है.
JDU ने केके पाठक का किया समर्थन
शिक्षा मंत्री को लेकर JDU प्रवक्ता के बयान ने प्रदेश का सियासी पारा हाई कर दिया है और बीजेपी इस तल्खी की चिंगारी को हवा देने में पीछे नहीं है. हालांकि एक तरफ बीजेपी है तो दूसरी तरफ महागठबंधन के नेता, जिन्हें पार्टियों में चल रही आपसी तनातनी लोकतंत्र की खूबसूरती लग रही है. RJD के नेता हों या कांग्रेस के नेता, सभी एक सुर में कह रहे हैं कि छोटी-छोटी बातों पर इस तरीके का तकरार होना स्वाभाविक है. RJD के नेताओं को यह लग रहा है कि अधिकारियों और मंत्रियों के बीच में कोआर्डिनेशन रहना चाहिए. जिसकी कमी अभी दिख रही है, लेकिन फिर भी गठबंधन में ऑल इज वेल है.
गठबंधन में ऑल इज़ वेल!
बिहार में महागठबंधन सरकार भले ही दावा कर रही हो कि गठबंधन में ऑल इज़ वेल है, लेकिन मंत्री और अधिकारी के विवाद में JDU प्रवक्ता का बयान तो कुछ और ही कह रहा है. अब सवाल उठता कि हर संकट से पार पाने वाले नीतीश कुमार महागठबंधन में दो फाड़ की बयार को रोक पाएंगे या नहीं.







