बिहार में जातीय जनगणना को लेकर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। आज भी कोर्ट इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस मामले में अभी राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही और अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार दलील पेश कर रहे। शाही ने कहा कि किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया जा रहा।
पटना हाई कोर्ट में जातीय गणना पर पिछले 4 दिनों से लगातार सुनवाई जारी है। गुरुवार को चौथे दिन मुख्य न्यायधीश के विनोद चंद्रन की बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल पीके शाही ने सरकार की ओर से पक्ष कहते हुए कहा कि सर्वेक्षण कराना राज्य सरकार का अधिकार है।
गुरुवार को मुख्य न्यायधीश के समक्ष एडवोकेट जनरल पीके शाही ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण और जातीय सर्वे जरूरी है। यह कास्ट सेंसस नहीं है। इस सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है। सरकार लोगो के आंकड़े इकट्ठा कर रही है।
पीके शाही ने कोर्ट को बताया कि सर्वे के दौरान लोगों से सूचनाएं जुटाई जा रही हैं, जो पहले से सार्वजनिक है। इस प्रक्रिया में प्राइवेसी का भी ख्याल रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार के सर्वे का लक्ष्य बताते हुए कोर्ट में कहा है कि जातीय गणना के बाद सरकार जरूरत मंदों के लिए योजना बनाएगी।

गणना का 80 प्रतिशत काम पूरा
एडवोकेट जनरल ने बताया कि सर्वेक्षण का काम लगभग 80 फीसदी पूरा हो चुका है। जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में नामांकन के दौरान भी दिया जाता है। नौकरियों में कॉलम भरे जाते हैं। हर धर्म में अलग-अलग जातियां होती हैं। इस सर्वेक्षण के दौरान जानकारी हासिल करने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से तीन दिनों तक रखा गया पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से तीन दिनों तक पक्ष रखा गया है। आठ याचिकाकर्ता के वकीलों ने पक्ष रखा है। बताया जा रहा है कि सोमवार को जातीय गणना पर कोर्ट फैसला सुना सकता है।







