पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के लिए शाहबाज शरीफ सरकार ने एक ऑर्डिनेंस को मंजूरी दी है। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात केयर टेकर प्रेसिडेंट साजिद संजरानी ने इस पर दस्तखत कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतें तक इमरान पर खास मेहरबान हैं। मंगलवार को ही उन्हें एक साथ 16 मामलों में जमानत दी गई थी। इसके बाद सरकार ने खान को घेरने के लिए नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) के नियमों में बदलाव के लिए ऑर्डिनेंस पास करा लिया।
खास बात ये है कि इस दौरान इमरान के कट्टर समर्थक प्रेसिडेंट आरिफ अल्वी परिवार के साथ हज पर गए थे और केयर टेकर प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संजरानी के पास थी, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य हैं। इमरान को आज तोशाखाना केस में निचली अदालत के सामने पेश होना है।

सरकार की चाल
- शाहबाज शरीफ सरकार इमरान को 145 में से सिर्फ एक मामले में गिरफ्तार कर सकी है। 9 मई को उन्हें अल कादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट स्कैम केस में इस्लामाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ खान को बेल दे दी, बल्कि आगे किसी भी केस में उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी।
- 9 मई की गिरफ्तारी के बाद इमरान समर्थकों ने फौज के ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए। हिंसा में 11 लोगों की मौत हुई, जबकि 259 लोग घायल हुए। खान मरने वालों का आंकड़ा 25 बताते हैं। इस मामले में अब तक 1700 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और ज्यादातर का केस मिलिट्री कोर्ट्स में चलेगा।
- बहरहाल, सरकार ने जब यह देख लिया कि अदालतें खान को बचाती रहेंगी तो उसने NAB कानून को हथियार बनाया और वो भी तब जबकि उसे पता था कि प्रेसिडेंट अल्वी देश में नहीं हैं। लिहाजा, ऑर्डिनेंस पर केयर टेकर प्रेसिडेंट ही दस्तखत करेंगे।
- एक और रोचक बात यह है कि प्रेसिडेंट अल्वी का सऊदी अरब का हज दौरा जैसे ही फाइनल हुआ, उसी दिन सरकार ने संसद सत्र स्थगित कर दिया। इसकी वजह यह थी कि संसद सत्र के चलते सरकार ऑर्डिनेंस नहीं ला सकती थी। इसके लिए बिल लाना पड़ता और फिर इसे पास कराने में कई दिन लगते।

अब जानिए कैसे फंसेंगे इमरान
- ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक- NAB अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस की ज्यादातर बातें ऐसी हैं, जिनसे साफ नजर आता है कि इसका मकसद इमरान को कानून के शिकंजे में लाना और उन्हें गिरफ्तार करना है।
- इसके तहत- NAB चेयरमैन को यह अधिकार दिया गया है कि वो किसी आरोपी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर सकती है। इसमें आरोप यह लगाया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति जांच में सहयोग नहीं कर रहा था।
- इमरान जब सत्ता में थे तो उन्होंने NAB में फिजिकल रिमांड 90 दिन रखी थी। बाद में शाहबाज शरीफ सरकार ने इसे 14 दिन कर दिया। नए ऑर्डिनेंस के तहत अब 30 दिन का तयशुदा रिमांड रहेगा और NAB चेयरमैन इसे कई दिन बढ़ा सकता है। इसके अलावा NAB की कस्टडी को किसी अदालत में चैलेंज भी नहीं किया जा सकेगा। बहुत मुमकिन है कि NAB की हिरासत में रहते हुए ही 9 मई की हिंसा के मामले में भी इमरान को गिरफ्तार कर लिया जाए।
- खान और उनकी पत्नी बुशरा को NAB कई बार पूछताछ के लिए बुला चुका है। वो हाजिर नहीं होते। अब NAB चेयरमैन उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार करने का ऑर्डर दे सकता है। NAB ने अल कादिर स्कैम में खान से कुछ पेपर्स भी मांगे थे। उन्होंने कई महीने बाद भी ये नहीं दिए।

सिर्फ एक गवाह काफी
- पाकिस्तान के अखबार ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक- नए ऑर्डिनेंस में एक और नियम पहली बार शामिल किया गया है। इसके मुताबिक, अगर अल कादिर ट्रस्ट स्कैम में नामजद कोई आरोपी सरकारी गवाह बन जाता है तो उसकी गवाही आखिरी मानी जाएगी।
- खास बात ये भी है कि इस गवाह को गवाही के पहले एक एफिडेविट पर दस्तखत करने होंगे और फ्यूचर में अगर वो गवाही से मुकरा तो उसके खिलाफ नया केस दर्ज किया जाएगा और इसमें उसे सजा भी होगी।
- 9 मई की हिंसा के मामले में इमरान के कई करीबी साथी उनका साथ छोड़ चुके हैं। कई नेता फरार हैं तो ज्यादातर ने पार्टी छोड़ दी है। अब अगर इमरान की पत्नी बुशरा की दोस्त फराह गोगी या फिर जुल्फी बुखारी (तोशाखाना केस में भी आरोपी) या फिर पूर्व रक्षा मंत्री परवेज खटक सरकारी गवाह बनते हैं तो इमरान को न सिर्फ इस मामले में सजा होगी, बल्कि वो पांच साल तक चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। उनकी पार्टी पहले ही पूरी तरह बिखर चुकी है। ऐसे में खान का पॉलिटिकल कॅरियर करीब-करीब खत्म हो जाएगा।
अल कादिर ट्रस्ट स्कैम
- करीब 4 साल पहले अल कादिर ट्रस्ट का मामला ब्रिटेन से शुरू हुआ। वहां नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) एक पाकिस्तानी को गिरफ्तार करती है। जांच के दौरान पता लगता है कि उसके पास करीब 60 अरब रुपए (पाकिस्तानी करेंसी में) हैं। गिरफ्तार किया गया शख्स पाकिस्तान के सबसे बड़े लैंड माफिया मलिक रियाज का दायां हाथ बताया गया। NCA यह पैसा जब्त करके अपनी होम मिनिस्ट्री को बताती है।
- ब्रिटेन की होम मिनिस्ट्री मामले की पूरी जानकारी एक सीलबंद लिफाफे में पाकिस्तान सरकार को भेजती है। उस वक्त इमरान खान प्रधानमंत्री थे। मामले का खुलासा करने वाले फैजल वाबडा कैबिनेट मिनिस्टर थे। फैज हमीद खुफिया एजेंसी ISI के चीफ थे।
- इमरान एक रूटीन कैबिनेट मीटिंग करते हैं। जैसे ही यह मीटिंग खत्म होने लगती है तो इमरान एक लिफाफा निकालकर दिखाते हुए वहां मौजूद लोगों से कहते हैं- यह सीक्रेट लेटर ब्रिटेन से आया है। हाल ही में पार्टी छोड़ने वाली पूर्व मंत्री शिरीन मजारी समेत कुछ और मंत्री पूछते हैं- इसमें क्या है? खान मामला टालते हुए कहते हैं – मैं इसको देखूंगा।
- दरअसल, इसी लिफाफे में उन 60 अरब रुपए का चेक था, जो ब्रिटेन में मलिक रियाज के गुर्गे से जब्त किए गए थे। आरोप है कि यह पैसा पहले सुप्रीम कोर्ट के अकाउंट में जमा कराया गया। बाद में इमरान और उनके करीबियों के अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया गया।
- इसके बाद रियाज को अरबों रुपए के सरकारी ठेके दिए गए। उसकी काली कमाई को सफेद करने के लिए स्कीम लाई गई। उसने ही खान की पत्नी बुशरा बीबी को 5 कैरेट की डायमंड रिंग गिफ्ट की।
- इसी मलिक रियाज ने खान और बुशरा के अल कादिर ट्रस्ट को कई एकड़ जमीन दी। इस पर अल कादिर यूनिवर्सिटी बनाई गई। ये मजहबी तालीम देती है। करीब 5 साल गुजर चुके हैं, यूनिवर्सिटी में अब तक सिर्फ 32 स्टूडेंट्स हैं।

क्या है तोशाखाना केस
चुनाव आयोग के सामने सत्ताधारी पाकिस्तानी डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने तोशाखाना गिफ्ट मामला उठाया था। कहा था कि इमरान ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न देशों से मिले गिफ्ट को बेच दिया था। इमरान ने चुनाव आयोग को बताया था कि उन्होंने तोशाखाने से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपए मिले थे। बाद में खुलासा हुआ कि यह रकम 20 करोड़ से ज्यादा थी।







