मणिपुर में शुक्रवार को 4 घंटे तक मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे को लेकर ड्रामा हुआ. बीरेन सिंह अपने 20 विधायकों के साथ राज्यपाल को इस्तीफा देने राज भवन की ओर गये , लेकिन रास्ते में महिलाओं की एक बड़ी भीड़ ने उन्हें रोका, और मुख्यमंत्री को अपने निवास लौटने का मजबूर किया. बाद में बीरेन सिंह ने ट्विटर पर ऐलान किया कि वो इस्तीफा नहीं देंगे. कहा कि वो इस मुश्किल वक्त में मणिपुर को नहीं छोड़ सकते. इस तरह के हालात में उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं हैं. इसके बाद मामला शान्त हुआ. दरअसल गुरुवार की सुबह पश्चिमी इम्फाल में हथियारबंद लोगों ने तीन लोगों की हत्या कर दी जिसके बाद इम्फाल में महिलाओं की सबसे बड़ी मार्केट की तरफ से ये अलटीमेटम दिया गया कि हालात को तुरंत काबू में करें. इसके बाद बीरेन सिंह के इस्तीफे की खबरें फैलने लगीं.
बीरेन सिंह पर कई दिनों से इस्तीफा देने का प्रेशर है, लेकिन सब जानते हैं कि इस्तीफा देना कोई समाधान नहीं हो सकता है. बीरेन सिंह कोई पेशेवर राजनीतिक नेता नहीं है. उन्होंने अपना करियर एक फुटबॉलर के रूप में शुरु किया था, नेशनल लेवल के प्लेयर थे, फिर वो सीमा सुरक्षा बल में रहे, BSF छोड़ कर वे पत्रकारिता में आए. एक दैनिक अखबार निकाला फिर बीरेन सिंह ने अपनी पार्टी बनाई, विधानसभा का चुनाव जीता. इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए, कांग्रेस की सरकारों में मंत्री रहे. 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और मुख्यमंत्री बने. बीरेन सिंह 2017 से मुख्यमंत्री हैं, और वह मणिपुर में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी ज्यादा है. ये बात सही है कि मणिपुर में हालात अच्छे नहीं हैं.. वहां हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.. उनके घरबार जला दिए गए, संपत्ति लूट ली गई, ये दु:खद है. गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर का दो दिन का दौरा कर चुके हैं सेना फ्लैग मार्च कर रही है. अब राहुल गांधी भी वहां गए, उन्होंने शान्ति की अपील की, कोई सियासी बात नहीं की, ये अच्छी बात है क्योंकि इस वक्त सबको मिलकर मणिपुर में अमन चैन कायम करने की कोशिश करनी चाहिए.







