श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर कमेटी ने साफ-साफ कहा है कि मंदिर के गर्भगृह में लगे सोने की परत को लेकर कोई घपला नहीं हुआ, कोई गड़बड़ी नहीं हुई, कुछ लोग राजनीतिक साजिश के तहत अफवाह फैला रहे हैं और मंदिर कमेटी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मंदिर कमेटी का कहना है कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग के चारों तरफ जो जलेरी बनी है, उसमें सोने की परत चढ़ी हुई है। लेकिन पूजा करने की वजह से सोना की परत घिस गई थी, इसलिए दोबारा सोने का वर्क चढ़ाया गया है। सोने की परत खराब न हो, उसको फिर से नुकसान न पहुंचे, इसलिए जलेरी के ऊपर अब acrylic की शीट चढ़ाई गई है। दरअसल केदारनाथ धाम के पुरोहित संतोष त्रिवेदी का एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से वायरल है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगाया गया सोना पीतल में बदल गया है। संतोष त्रिवेदी का कहना है कि गर्भ गृह में सोने की परत लगाने के नाम पर सवा अरब रुपए का घोटाला हुआ है। पुरोहित का कहना है कि गर्भगृह में तीन महीने पहले सोना लगाया गया लेकिन कुछ महीनों बाद आज जब अंदर गया तो सोना पीतल में बदल गया। आखिरकार क्यों सोने की जांच नहीं हुई, कौन अधिकारी इसका जिम्मेदार है? इस पर मंदिर कमेटी ने कहा कि गर्भगृह की दीवारों और शिवलिंग की जलेरी में सोने की परत चढ़ाने का काम पिछले साल हुआ था। महाराष्ट्र के एक दानदाता ने ये काम करवाया था। मंदिर कमेटी सिर्फ देखरेख कर रही थी। कमेटी का कोई सीधा रोल नहीं था। मंदिर कमेटी का कहना है कि सोने की परत चढ़ाने में सोना और तांबा दोनों का इस्तेमाल हुआ है। कमेटी ने बताया कि गर्भगृह में 23 किलो 777 ग्राम सोना लगाया गया था जिसका बाज़ार भाव करीब 14 करोड़ 38 लाख रुपए है। और सोने के साथ-साथ करीब एक हज़ार किलो तांबे के प्लेट्स का भी इस्तेमाल हुआ, जिसकी कीमत 29 लाख रुपए है। कमेटी के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि सोना पीतल में बदल गया, वो गलत आरोप लगा रहे हैं, गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाई गई है और उसमें तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मंदिर के गर्भगृह में कितना सोना लगाया गया, उसमें और क्या-क्या इस्तेमाल किया गया, इसकी जांच हो रही है, सच बहुत जल्द सामने आएगा। केदारनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक है। उस पवित्र धाम को लेकर ऐसे घपले का आरोप लगना गंभीर है। उत्तराखंड सरकार ये बात अच्छी तरह समझती है। चूंकि मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि जांच कराई जा रही है, तो ये अच्छा कदम है, लेकिन जांच अच्छी तरह और निष्पक्ष होनी चाहिए और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक सभी को धैर्य रखना चाहिए। बेहतर होगा कि जांच पूरी होने तक इसे बड़े विवाद का रूप न दिया जाए।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज...







