जदयू पार्टी मुख्यालय में सोमवार को पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार और प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। इस दौरान आंकडों के आधार पर दोनों प्रवक्ताओं ने स्वास्थ्य से जुडीं केंद्रीय परियोजनाओं में गडबडी एवं बिहार के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और बीजेपी से सीधे सवाल पूछे। इस मौके पर सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी भी मौजूद थे।
जदयू प्रवक्ताओं ने सवाल करते हुए कहा कि क्या यह सही है कि पीएम राहत कोष में बिहार के मात्र चार अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है‚ जबकि सीएम द्वारा संचालित सीएम चिकित्सा सहायता कोष में बिहार के ४३ अस्पताल सूचीबद्ध हैंॽ तो आखिर पीएम राष्ट्रीय सहायता कोष में इतने कम अस्पताल सूचीबद्ध क्यों हैंॽ प्रवक्ताओं ने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या ३९ अस्पतालों में सनातन धर्म मानने वाले इलाज नहीं करातेॽ आखिर इन अस्पतालों को सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गयाॽ पीएम राहत कोष में इतनी राशि पडी हुई है फिर वो राशि जरूरतमंदों के लिए केंद्र सरकार खर्च क्यों नहीं कर रही जबकि कोविड और कोविड के बाद गंभीर चुनौती सबों के सामने है। बीजेपी से सवाल पूछते हुए दोनों प्रवक्ताओं ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार श्वेत पत्र जारी करे‚ और ये बताए कि बिहार के कितने लोगों को लाभ मिला और कितनों को राशि मिली। पीएम केयर फंड में जमा रुपयों से कितना ब्याज प्राप्त हुआ‚ उस फंड में कितने रुपए बचे हुए हैं और बचे हुए रुपये जरूरतमंदों के लिए खर्च क्यों नहीं हुए।
जदयू प्रवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री चिकित्सा राहत कोष में अगर कोई भी शख्स १०० रुपये की भी सहायता देता है तो उसका पूरा डिटेल राज्य सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है। ऐसे में पीएम राष्ट्रीय चिकित्सा राशि में सहायता करने वाले लोगों की सूची वेबसाइट पर क्यों नहीं हैॽ राष्ट्रीय आरोग्य निधि में २०२२–२३ के लिए आवंटन ४० करोड का होता है जबकि अभी तक खर्च केवल २.४२ करोड रुपये ही हुए हैं। वहीं‚ अगर २००२–०३ में इस निधि के लिए आवंटन ३१० करोड हुआ जबकि खर्च ४२० करोड हुए। २००३–०४ में अटल जी की सरकार में आवंटन ४१४ करोड रुपये हुआ जबकि खर्च ४८० करोड हुए। प्रवक्ताओं ने कहा कि २००४–०५ में यूपीए सरकार के दौरान आवंटन ४५० करोड हुआ जबकि खर्च ६७५ करोड हुए। ऐसे में २०२२–२३ में इतना कम आवंटन और कम खर्च क्योंॽ प्रवक्ताओं ने बीजेपी से सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर इन योजनाओं में बिहारियों के साथ फर्जीवाडा क्योंॽ हेल्थ मिनिस्टर कैंसर फंड‚ रेयर डिजीज फंड जैसी योजनाओं के खर्च का जिम्मा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पास होता है लेकिन इन फंड से भी जरूरतमंदों की मदद नहीं की गई। बीजेपी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे से सवाल पूछते हुए दोनों प्रवक्ताओं ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री के डर के चलते इन फंडों में से जरूरतमंदों को मदद नहीं मिल पा रही हैॽ जदयू प्रवक्ताओं ने कहा कि हेल्थ मिनिस्टर कैंसर फंड में ४० करोड का आवंटन हुआ जबकि खर्च महज ७८ लाख ही हुए। उसी तरह रेयर डिजीज फंड में २५ करोड का आवंटन हुआ जबकि अभी तक उस फंड से कोई राशि खर्च नहीं की गई।







