लोकसभा चुनाव 2024 के लिए देश भर में विपक्ष की एकजुटता के दावे को एक इंटरव्यू ने करीब-करीब चकनाचूर कर दिया है. अडानी मुद्दे पर शरद पवार ने बात की तो कांग्रेस समेत विपक्ष के ज्यादातर दलों की एकजुटता के दावे एक झटके में चूर-चूर हो गए.
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बयान के बाद विपक्षी खेमे में दरार तब सबसे ज्यादा गहरी हो गई जब कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने ये ट्वीट किया. लांबा ने लिखा, “डरे हुए, लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं. देश के लोगों की लड़ाई एक अकेले राहुल गांधी लड़ रहे हैं. पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी.”
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए देश भर में विपक्ष की एकजुटता के दावे को एक इंटरव्यू ने करीब-करीब चकनाचूर कर दिया है. अडानी मुद्दे पर शरद पवार ने बात की तो कांग्रेस समेत विपक्ष के ज्यादातर दलों की एकजुटता के दावे एक झटके में चूर-चूर हो गए.
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बयान के बाद विपक्षी खेमे में दरार तब सबसे ज्यादा गहरी हो गई जब कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने ये ट्वीट किया. लांबा ने लिखा, “डरे हुए, लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं. देश के लोगों की लड़ाई एक अकेले राहुल गांधी लड़ रहे हैं. पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी.”
एनसीपी प्रमुख शरद पवार अडानी मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से अलग हो गए हैं. इसका एक कारण यह भी है कि गौतम अडानी और उनकी दोस्ती लगभग दो दशक पहले की है. जब अडानी कोयला क्षेत्र में विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे थे. यहां तक कि शरद पवार ने 2015 में पब्लिश हुई अपनी एक मराठी आत्मकथा ‘लोक भूलभुलैया संगति…’ में अडानी की खूब तारीफ की थी.
शरद पवार ने अपनी इस किताब में अडानी का जिक्र करते हुए लिखा था ‘मेहनत करने वाला और सरल, जमीन से जुड़ा हुआ इंसान’. दिग्गज नेता ने यह भी लिखा कि उनके कहने पर ही अडानी ने थर्मल पावर सेक्टर में कदम रखा था. पवार ने किताब में बताया है कि कैसे अडानी ने मुंबई के स्थानीय लोगों में एक सेल्समैन के रूप में अपना कॉर्पोरेट साम्राज्य बनाया, हीरा उद्योग में अपनी किस्मत आजमाने से पहले छोटी जगहों में भी काम किया.
अपनी किताब में उन्होंने लिखा है ‘वह हीरा उद्योग में अच्छी कमाई कर रहे थे, लेकिन गौतम को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रवेश करने की उनकी महत्वाकांक्षा थी. उनके गुजरात के मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल के साथ अच्छे संबंध थे और उन्होंने मूंदड़ा में एक बंदरगाह विकसित करने का प्रस्ताव पेश किया था’. उन्होंने याद किया कि पटेल ने अडानी को चेतावनी दी थी कि बंदरगाह पाकिस्तान की सीमा के करीब और एक शुष्क क्षेत्र में है. इसके बावजूद अडानी ने चुनौती स्वीकार की.
‘अपनी स्पीच में गौतम ने भी किया जिक्र’
पवार ने बताया कि तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री होने के समय पर महाराष्ट्र के गोंदिया में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के पिता की पुण्यतिथि के अवसर पर एक समारोह के दौरान उन्होंने अडानी को सुझाव दिया था. गौतम ने अपनी एक स्पीच में भी उनके सुझाव को स्वीकार किया है. पवार ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने दशकों लंबे राजनीतिक करियर के दौरान महाराष्ट्र में विकास की शुरुआत करने के लिए कई व्यापारियों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए थे.







