राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढाने के लिए हमलोग लगातार प्रयासरत हैं। हमलोग चाहते हैं कि देश का हर आदमी बिहार में उत्पादित कोई न कोई चीज खाये। जब तक हम हैं‚ तब तक किसानों के हित एवं उत्थान के लिए काम करते रहेंगे।’ ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में आयोजित किसान समागम में कही।
उन्होंने कहा कि हमलोग महंगी बिजली खरीदकर किसानों को सस्ती दर पर उपलब्ध कराते हैं। राज्य में मामूली दर पर उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। मुफ्त में बिजली की मांग नहीं करनी चाहिए। बिजली का सदुपयोग करना चाहिए। इसका दुरुपयोग नहीं। घरेलू कार्य के अलावा कृषि कार्य के लिए भी बिजली दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय–२ के अंतर्गत हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा है। उत्तर राज्य में हमेशा बाढ की स्थिति पैदा होती है। इसकी रोकथाम को लेकर नेपाल मदद नहीं कर रहा है। इसके समाधान को लेकर काम किया जा रहा है। हमलोगों का मकसद है कि फसलों का उत्पादन बढे और साथ ही किसानों की आमदनी भी बढे। बाढ एवं सुखाड की स्थिति में प्रभावित सभी लोगों की हमलोग मदद करते हैं। जिनके पास जमीन है‚ सिर्फ उन्हीं को नहीं बल्कि कृषि कार्य से संबद्ध सभी लोगों की मदद करते हैं। जमीन को लेकर परिवार में तथा समाज में आपसी झगडा नहीं होना चाहिए। ६० प्रतिशत हत्याएं सिर्फ जमीन विवाद के कारण होती हैं। भूमि सर्वेक्षण का काम चल रहा है। हमलोग चाहते हैं कि यह काम जल्द से जल्द पूरा हो। जब तक हम हैं‚ तब तक किसानों के हित एवं उत्थान के लिए काम करते रहेंगे। मार्च तक कृषि रोडमैप बनकर तैयार हो जायेगा। पिछली बार की तरह ही हमलोग राष्ट्रपति को बुलाकर चौथे कृषि रोडमैप का शुभारंभ करायेंगे। आजकल नई टेक्नोलॉजी का लोग सदुपयोग कम बल्कि दुरुपयोग ज्यादा करते हैं।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव‚ कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत‚ मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार डॉ. मंगला राय‚ डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय‚ पूसा के कुलपति डॉ. बीएस पांडेय‚ बिहार पाश विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह‚ बिहार कृषि विश्वविद्यालय‚ सबौर के कुलपति डॉ. डीआर सिंह‚ कृषि सह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव एन सरवन कुमार ने संबोधित किया।
किसान समागम में ५००० किसान शामिल हुए‚ जिनमें २२ किसानों ने चतुर्थ कृषि रोड मैप के लिए अपने–अपने सुझाव रखे। लखीसराय के किसान अमित कुमार ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि पहले के तीन कृषि रोड मैप से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। हम पुणे से एमबीए किए हैं और कोरोना के दौरान बिहार आए और मशरूम की खेती करने लगे। हमने सोचा नहीं था कि हम बिहार में खेती करेंगे‚ यह सब सरकार के सहयोग से संभव हो पाया। मधेपुरा के किसान शंभू शरण भारतीय ने कहा कि मुख्यमंत्री के खूबसूरत इरादे और बुलंद हौसले को मैं सलाम करता हूं। कृषि रोड मैप से आपने फसलों का उत्पादन बढा दिया जिससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान तीनों कृषि रोड मैप की उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को पौधा एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर कृषि विभाग के सचिव एन. सरवन कुमार ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कुछ किसानों को सांकेतिक रूप से सम्मानित करते हुए पौधा भेंट किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के पूर्व कृषि रोड मैप (वर्ष २००८–२०२३) की उपलब्धियों पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी रोमांचक जीवन यात्रा को बयां करने के लिए बहुत अधिक अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करने पर मंगलवार को बिहार के एक कृषि उद्यमी को नसीहत दी। वक्ता ने बापू सभागार में खुद को लखीसराय के अमित कुमार के रूप में बताया‚ जहां राज्य सरकार के चौथे कृषि रोड़मैप के उद्घाटन के अवसर पर एक समारोह आयोजित किया गया था। अमित कुमार ने अपने वक्तव्य की शुरुआत मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए की। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद मैं पुणे में नौकरी कर रहा था‚ लेकिन सब कुछ छोड़़कर मैंने अपने पैतृक जिले में मशरूम की खेती करने का साहस जुटाया। कुछ ही मिनट के भाषण के बाद मुख्यमंत्री ने कृषि–उद्यमी को टोक दिया। उन्होंने कहा‚ ‘मैं कहना चाहता हूं कि इतने सारे अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करने का क्या मतलब है। क्या यह इंग्लैंड़ हैॽ आप बिहार में काम कर रहे हैं। खेती कर रहे हैं‚ जो आम लोगों का पेशा है।’ मुख्यमंत्री के ऐसा कहने के साथ भीड़़ ने ताली बजाकर सराहना की। मातृभाषा पर जोर देने वाले नीतीश ने यह भी विचार व्यक्त किया कि कोविड़ के कारण लागू लॉकड़ाउन के दौरान स्मार्टफोन की लत के कारण कई लोग अपनी भाषाओं को भूलने लगे। हड़़बड़़ाए हुए वक्ता ने फिर से बोलना शुरू किया‚ लेकिन कुछ सेकंड़ बाद गवर्नमेंट स्कीम शब्द के इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री ने उन्हें झिड़़की लगा दी। नीतीश ने कहा‚‘यह क्या हैॽ क्या आप सरकारी योजना नहीं कह सकतेॽ मैं प्रशिक्षण प्राप्त इंजीनियर हूं और मेरी शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी था‚ लेकिन अकादमिक गतिविधियों के लिए भाषा का उपयोग करना दूसरी बात है। आपको अपने दैनिक जीवन में ऐसा क्यों करना चाहिएॽ’ लखीसराय के प्रतिनिधि ने फिर से अपनी बात शुरू करने से पहले ‘सॉरी’ कहा।







