तुर्की में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. रेस्कयू ऑपरेशन जारी है. यह भुकंप सदी की सबसे बड़ी भूकम्प है. लोगों के पास खाने और रहने के लिए पैसे नहीं है. इस भूकम्प ने तुर्की को हिलाकर रख दिया है. इसी बीच इस संकट की घड़ी अमेरिका, भारत समेत विश्व के कई देश ने मदद का हाथ बढ़ाया है. वही तुर्की की मदद के लिए विश्व बैंक सामने आया है. जानकारी के मुताबिक विश्व बैंक तुर्की को 1.78 बिलियन डॉलर की मदद करेगा. इसकी जानकारी विश्व बैंक के अध्यक्ष ने दी.
तुर्की और सीरिया में आये भूकम्प के कारण मरने वालों का संख्या में लगातार बढ़ता जा रहा है. यह अब 21 हजार को पार कर चुका है. जिसमें सिर्फ तुर्की में 17 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी और यह आंकड़े बढ़ने की आसार है. वही इस बीच कई देशों ने तुर्की की मदद के लिए सामने आये है. जानकारी के मुताबिक विश्व बैंक ने 1.78 बिलियन डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है. विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलापास ने अपने ट्विटर हैंडल से जानकारी देते हुए ट्वीट किया है कि विश्व बैंक इस हफ्ते तुर्की में हुए भयानक भूकंप में के लिए 1.78 बिलियन डॉलर की मदद करेगा. आगे बताया कि वो रिकवरी के लिए आपातकाल के आधार पर आकलन कर रहे है.
वहीं, इस घड़ी में अमेरिका ने मदद के लिए तुर्की को 85 मिलियन डॉलर की आपातकाल मदद देने का ऐलान किया है. अमेरिका की विदेश विभाग ने जानकारी देते हुए कहा कि लोगों को भोजन, स्वच्छ पानी, रहने के लिए सुरक्षित घर और मेडिकल जरूरतों के लिए यह मदद दी जारी है. आगे जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिका ने पहले ही रेस्कयू ऑपरेशन के लिए अपनी सेना को भेज चुका है, जिसमें ब्लैक हॉक और चिनुक हेलीकॉप्टर शामिल है.
इधर भारत ने भी मदद के लिए ऑपरेशन दोस्त चलाना है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत तुर्की और सीरिया में लोगों की मदद के लिए एक फील्ड अस्पताल, मेडिकल टीम, दवाइयां और कई उपकरण भेजे हैं. इससे पहले भारत ने 6 टन मेडिकल दवाईयां भेज चुका है.
तुर्किये और सीरिया में भूकंप से हालात बदतर होते जा रहे हैं। अब तक 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों की संख्या 64 हजार के करीब हो गई है। तुर्किये में 14,351 लोगों की जान जा चुकी है और 35 हजार से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। वहीं, सीरिया में 3,162 लोग मारे गए और 4 हजार से ज्यादा जख्मी हैं। सीरिया में मारे गए लोगों को दफनाने के लिए सामूहिक कब्रें बनाई जा रही हैं।
भूकंप के चलते तुर्किये अंटाक्या, सनलिउरफा और सीरिया का अलेप्पो शहर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। इन पानी और बिजली की सप्लाई भी बंद है। लोग शेल्टर होम्स में रहने को मजबूर हैं। यहां खाने की चीजें नहीं मिल पा रही हैं। लोगों का कहना है कि मदद मिल रही है लेकिन वह बहुत कम है। एपिसेंटर वाले गाजियांटेप शहर के लोगों का कहना है कि तबाही के 12 घंटे बाद भी उन तक मदद नहीं पहुंची थी। हालांकि, 95 से ज्यादा देशों ने मदद भेजी है।

NDRF टीम ने 6 साल की बच्ची को रेस्क्यू किया
इसी बीच भारतीय की रेस्क्यू टीम ने तुर्किये के नूरदागी शहर में एक 6 साल की बच्ची को रेस्क्यू किया है। होम मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन ने ट्वीट कर लिखा- ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्किये पहुंची नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स (NDRF) ने एक बच्ची को रेस्क्यू किया है।
आज के बड़े अपडेट्स
- तुर्किये के मालट्या में एक बार फिर से 4.6 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया है। यूरोपियन मेडिटेरेनियन सीजमोलॉजिकल सेंटर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
- UN का कहना कि बर्फबारी और बारिश के कारण भूकंप से प्रभावित दोनों ही देशों में बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। इमरजेंसी सर्विसेज की टीमों को रेस्क्यू में काफी दिक्कत हो रही है।
- अमेरिका ने तुर्किये और सीरिया में भूकंप प्रभावित इलाकों में मदद के लिए 85 मिलियन डॉलर यानी करीब 700 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक ने भी 1 बिलियन डॉलर की मदद भेजने की घोषणा की है।
- जंग के बीच यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस ने भी तुर्किये के अंटाक्या शहर में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मदद भेजी है। बचावकर्मियों ने हताय में अपने कैंप लगाए हैं। यूक्रेन ने मदद के लिए 87 लोगों का स्टाफ को भेजने की भी घोषणा की है।
तस्वीरों में तबाही का मंजर…



सैटेलाइट इमेज में दिखे तुर्किये के स्टेडियम में बने शेल्टर
अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजी ने कुछ सैटेलाइट तस्वीरें जारी की है। यह इमेज कहारनमास की है। इसमें तबाही देखी जा सकती है।।

सीरिया के इदलिब, मारिया जैसे इलाकों में लोगों तक मदद नहीं पहुंची
सीरियन अरब रेड क्रीसेंट जैसे संगठन कह रहे हैं कि असद सरकार पर से प्रतिबंध हटा लिए जाएं ताकि लोगों तक राहत पहुंचे। लेकिन फ्रैंकफर्ट स्थित मानवाधिकार संगठन मेडिको इंटरनेशनल की अनेता स्टारोस्टा ने कहा, ऐसा करना गलत होगा। सरकार के नियंत्रण वाले अलेप्पो में ही लोगों को मदद मिलना मुश्किल हो रही है।
विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इदलिब, मारिया जैसे इलाकों में लोगों तक मदद नहीं पहुंची। स्थानीय प्रशासन नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इलाज और दवाएं नहीं है। बचाव मुश्किल से चल रहा है। वहां रह रहे लोग वैश्विक मदद के इंतजार में बैठे हैं, पर मदद पहुंची नहीं।



6 फरवरी को आए थे 3 बड़े भूकंप

- तुर्किये और सीरिया में 6 फरवरी को सुबह 3 बड़े भूकंप आए थे। तुर्किये के वक्त के मुताबिक, पहला भूकंप सुबह करीब चार बजे (7.8), दूसरा करीब 10 बजे (7.6) और तीसरा दोपहर 3 बजे (6.0) आया।
- इसके अलावा 243 आफ्टर शॉक्स भी दर्ज किए गए। इनकी तीव्रता 4 से 5 रही। तुर्किये में 7 फरवरी सुबह 8.53 पर फिर भूकंप आया। इसके बाद दोपहर 12.41 बजे 5.4 तीव्रता का भूकंप आया।






