केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने भारत सरकार के बजट २०२३ को राष्ट्र के चहुमुंखी विकास का मार्ग प्रशस्त करने वाला शानदार बजट बताया है। नित्यानंद राय ने कहा‚ पेश बजट सर्वस्पर्शी‚ सर्वसमावेशी और ‘सबका साथ‚ सबका विकास’ के संकल्प को पूर्ण करने वाला है। इस बजट में गांव हैं‚ गरीब है‚ किसान है‚ युवा है‚ महिला है‚ लघु एवं मध्यम कारोबारी हैं और रोजगार के अवसरों की असीमित संभावनाएं हैं।
श्री राय ने कहा कि वित्त मंत्री ने इस बजट को अमृत काल का बजट बताते हुए कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद दुनिया ने भारत की आर्थिक स्थिति को सराहा है। वित्त मंत्री द्वारा इस बजट की सात प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए उन्हें सप्तऋषि नाम दिया गया। ये प्राथमिकताएं हैं– समावेशी विकास‚ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच‚ इन्फ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टमेंट‚ अपनी क्षमताओं का विकास‚ ग्रीन ग्रोथ को बढ़ाना‚ यूथ पॉवर और फाइनेंसियल सेक्टर को प्रोत्साहन। यही नहीं‚ इस बजट में किसान कल्याण पर बल देते हुए कृषि से संबंधित स्टार्टअप्स को प्राथमिकता देने हेतु कृषि त्वरक कोष की स्थापना‚ पशुपालन–ड़ेयरी और मत्स्य पालन के लिए कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर २० लाख करोड़ रुपये करने‚ डि़जिटल इंफ्रा फॉर एग्रीकल्चर के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए १० हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर खोलने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों की घोषणा की गई है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अमृत काल के आम बजट का सर्वाधिक लाभ बिहार जैसे गरीब राज्यों को मिलेगा। इस बजट से बिहार को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में १ लाख ७ हजार करोड रुपये मिलेंगे। पिछले वर्ष की तुलना में यह राशि २५‚१०१ करोड रुपये अधिक होगी। श्री मोदी ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के सबसे ज्यादा आवास बिहार में बनते हैं‚ उसमें ६६ फीसद की भारी वृद्धि कर इसमें ७९००० करोड रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि अमृत काल के बजट से बिहार को १३‚००० करोड का व्याजरहित @ण मिलेगा‚ जिसका भुगतान ५० साल में करना है। यह सहायता राज्यों को प्रतिवर्ष मिलने वाले कर्ज के अतिरिक्त होगी। श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार रेलवे के लिए २.४० लाख करोड का प्रावधान किया गया है। यह राशि २०१३–१४ की तुलना में ९ गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सोच की सुई विशेष राज्य की मांग पर अटक गई है‚ इसलिए बजट से मिले बडे–बडे फायदे भी उसे दिखाई नहीं पडते। विशेष राज्य की मांग तो यूपीए के जमाने में खारिज हो चुकी है। सभी पैक्सों के कम्प्यूटरीकरण के लिए २५१६ करोड और कृषि ऋण से किसानों की मदद के लिए २० लाख करोड का प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति और शक्ति प्रदान करेगा।







