लोकसभा चुनाव 2024 करीब आता जा रहा है‚ और कांग्रेस चाहती है कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए बनने वाले विपक्ष के किसी भी गठबंधन की धुरी उसे ही होना चाहिए। लेकिन यह भी कह रही है कि २०२९ में होने वाले आम चुनाव में उसे अपने दम लड़़ने की तैयारी करनी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के इस बाबत कथन के बाद इतना तो स्पष्ट हो गया है कि २०२४ में कांग्रेस मजबूती से भाजपा के सामने अपनी चुनौती पेश करने की न तो मनःस्थिति में है‚ न इसके लिए उसकी कोईतैयारी है। पहली दफा नहीं है‚ जब कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले किसी भी विपक्षी गठजोड़़ की धुरी बनने की बात कही है। पहले भी वह विपक्ष की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी होने का तर्क देते हुए विपक्ष का नेतृत्व करने का तर्क रखती रही है। बेशक‚ इस बात में दम भी है। भले ही वह कईराज्यों में सत्ता में न हो लेकिन हर गांव‚ मोहल्ले‚ ब्लॉक‚ कस्बे और शहर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी है‚ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिवार मौजूद हैं। यह बात कहते हुए उसने कईबार यह भी कहा है कि भाजपा भले ही ज्यादातर राज्यों में सत्ता में है‚ और केंद्र में भी लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज है‚ परंतु देश में व्यापक मौजूदगी में कहीं भी कांग्रेस उससे कमतर नहीं कही जा सकती। लेकिन इस बार कांग्रेस के आत्मविश्वास का आधार दूसरा है। राहुल गांधी की ‘भारत जोड़़ो यात्रा’ को लोगों का अच्छा रिस्पोंस मिला है। यात्रा में उमड़़ी भीड़़ को देखकर कांग्रेस गद्गद् है‚ और जोर–शोर से २०२४ में होने वाले आम चुनाव में विपक्षी एकता की धुरी बनने की बात को और भी दमदार तरीके से कहने लगी है‚ लेकिन अकेले दम खम ठोकने की जहां तक बात है‚ तो वह इसके लिए २०२९ की बात कह रही है। इससे यही संकेत तो निकलता है कि भारत जोड़़ो यात्रा जैसे बड़े़ आयोजन के बावजूद कांग्रेस २०२४ में होने वाले आम चुनाव में अकेले दम मैदान में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही। क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि उसे भारत जोड़़ो यात्रा के दौरान उमड़़ी भीड़़ के वोटो में तब्दील होने को लेकर संशय है। राहुल की यात्रा कांग्रेस के हालात कितने बदलती है‚ इस साल कईराज्यों के असेंबली चुनावों के परिणामों से पता चल जाएगा। २०२९ में कांग्रेस के अकेले दम आम चुनाव लड़़ने की बात हालांकि जयराम रमेश की निजी राय कही जा सकती है‚ लेकिन यह स्थिति का वास्तविक आकलन है। चुनाव जीतने के लिए पार्टी में एकजुटता होना जरूरी है‚ जिसका कांग्रेस में अभी स्पष्ट अभाव है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा के क्या है मायने …………….
भारत और यूरोपीय संघ (European Union-EU) के बीच रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में विदेश...







