मेडेन फार्मा की खांसी (कफ) की दवा के नमूने गुणवत्ता में खरे पाए गए हैं. कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने कहा कि अब वह अपने कारखाने को फिर से खोलने के लिए मंजूरी मांगेगी, क्योंकि सिरप से लिए गए नमूनों में कुछ भी गलत नहीं पाया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को ऐसा संदेह था कि भारत में बने कफ सिरप के कारण ही गाम्बिया में बच्चों की मौत हुई थी.
मेडेन के मैनेजिंग डायरेक्टर नरेश कुमार गोयल ने रॉयटर्स से कहा, “मुझे भारतीय नियामक और न्यायपालिका की प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा है. मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है. हम अब अधिकारियों से कारखाने को फिर से खोलने का अनुरोध करने का प्रयास करेंगे, लेकिन मुझे नहीं पता कि ऐसा कब होगा. हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं.”
कारखाने कर दिए गए बंद
स्वास्थ्य अधिकारियों ने अक्टूबर में हरियाणा के सोनीपत में मेडेन के मुख्य कारखाने में उत्पादन बंद कर दिया था. उस समय डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस साल गाम्बिया में 69 बच्चों की मौत से कंपनी के खांसी और ठंडे सिरप जुड़े हो सकती है. हालांकि, अब कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया है कि डब्ल्यूएचओ ने गलती से भारत की कंपनी का नाम जोड़ा.






