इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण कराने के वाराणसी की अदालत के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने याचिका दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
उल्लेखनीय है कि आठ अप्रैल, 2021 को वाराणसी की अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का समग्र सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया था।
हिंदू पक्ष की ओर से गत 11 नवंबर को पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी थी कि तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच कराई जानी चाहिए।
पिछली तारीख में ASI ने हलफनामा दाखिल कर सर्वेक्षण के लिए खुद को सक्षम बताया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई 29 नवंबर, 2022 तक के लिए बुधवार को टाल दी थी।
अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद ने दी चुनौती
पिछले हफ्ते अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की ओर से पेश हुए वकील ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया था जिस पर अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 29 नवंबर, 2022 तय की थी। ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति- अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद ने वाराणसी की अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें पांच हिंदू महिलाओं द्वारा दायर वाद की पोषणीयता पर उसकी आपत्ति खारिज कर दी गई थी। इन महिलाओं ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देवी देवताओं की नियमित पूजा अर्चना की अनुमति मांगी है।
वाराणसी कोर्ट में याचिका हुई थी खारिज
वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर को अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की याचिका खारिज कर दी थी जिसमें पांच हिंदू महिलाओं द्वारा दायर वाद की पोषणीयता को चुनौती दी गई थी। याचिका खारिज करते हुए वाराणसी के जिला न्यायाधीश ने कहा था कि इन पांच हिंदू महिलाओं का वाद, पूजा स्थल अधिनियम, वक्फ कानून और उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम से बाधित नहीं होता।
कार्बन डेटिंग के अनुरोध वाली याचिका पर 30 नवंबर को सुनवाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 21 नवंबर को भगवान विश्वेश्वर ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने के अनुरोध वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख निर्धारित की। वाराणसी के जिला जज के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है। वाराणसी की अदालत ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक ढंग से काल निर्धारण की मांग अस्वीकार कर दी थी।







