बिहार में नगर निकाय चुनाव आरक्षण संबंधी मसले पर सरकार की अधूरी तैयारी की वजह से टालना पड़ा। पटना हाई कोर्ट ने नियमों की अनदेखी का हवाला देते हुए सुधार करने के बाद ही चुनाव कराने का आदेश दिया तो प्रक्रिया को बीच में ही स्थगित करना पड़ गया। अब सभी के मन में यह सवाल है कि शहरी निकायों के चुनाव आखिर कब होंगे?
दीपावली और छठ में भी दौरा करता रहा आयोग
इस बीच नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव के मसले पर बिहार सरकार के ऊर्जा व योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कुछ संकेत दिए हैं। उन्होंने गुरुवार को बताया कि अति पिछड़ा वर्ग आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। उन्होंने बताया कि दीपावली व छठ जैसे पर्व के बावजूद आयोग लगभग एक दर्जन जिलों का भ्रमण कर चुका है।
राजनीतिक स्थिति के आकलन के बाद मिलेगा आरक्षण
दरअसल, कोर्ट ने कहा था कि अति पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करने के बाद ही आरक्षण रोस्टर का निर्धारण किया जाए। इसी काम के लिए बिहार सरकार ने विशेष आयोग बनाया है। दरअसल, ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट के बाद आरक्षण देने का निेर्देश दिया था।
बिहार सरकार के मंत्री बोले- दिसंबर में भी हो सकता है चुनाव
ऊर्जा मंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या दिसंबर में निकाय चुनाव संभव है, इस पर उन्होंने कहा कि हो सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि सरकार चुनावों को जल्दी कराने के लिए प्रयत्नशील है। अगर रिपोर्ट इस महीने मिल जाती है, तो दिसंबर या जनवरी तक चुनाव कराए जा सकते हैं।
फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था से चल रहा काम
नगर निकायों में पिछले चुनावों के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है। वहां व्यवस्था वैकल्पिक आधार पर चलाई जा रही है। इसमें अफसरों के हाथ में शक्तियां दे दी गई हैं।







