ऑक्टूबर माह के त्योहारी सीजन में अर्थव्यवस्था में बेहद मजबूती आई है। कंपनियां मालामाल हुइ और इस माह के दौरान जीएसटी संग्रह में 16.6 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई और यह बीते वर्ष की संबद्ध अवधि के १.३० लाख करोड़़ रुपये से बढ़कर १.५२ लाख करोड़़ के स्तर पर जा पहंुचा। अक्टूबर माह में वाहनों की बिक्री में भी ७० फीसद का जोरदार इजाफा हुआ। एशिया में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गतिविधियों में तेजी का सिलसिला भारत में लगातार १६वें महीने भी जारी रहा। अर्थव्यवस्था के आठ कोर सेक्टर हैं‚ जिनमें कोयला‚ कच्चा तेल‚ प्राकृतिक गैस‚ रिफाइनरी उत्पाद‚ खाद‚ स्टील‚ सीमेंट और बिजली शामिल हैं। इन सेक्टरों का इंडे़क्स ऑफ इंड़्ट्रिरयल प्रोड़क्शन (आईआईपी) यानी देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में ४० फीसद का योगदान होता है। इन सेक्टरों का बेहतर प्रदर्शन अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। अक्टूबर माह में जीएसटी संग्रह लगातार आठवें महीने १.४० लाख करोड़़ रुपये से ज्यादा रहा। विनिर्माण क्षेत्र में भी लगातार १६वें महीने स्थितियों में सुधार देखने को मिला है। विनिर्माण क्षेत्रमें सतत बेहतर होती स्थितियों से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में रोजगार के हालात बेहतर होंगे। फिर‚ अक्टूबर माह से यह भी स्पष्ट हुआ कि मांग बराबर बनी हुईहै‚ और लोग खर्र्च करने से हाथनहीं खींच रहे। इससे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र नई भर्तियां करने को प्रेरित होगा। अक्टूबर माह ने अर्थव्यवस्था की सेहत के मद्देनजर उत्साहजनक माहौल बना दिया है। भारत उत्सवधर्मी देश है‚ और त्योहारों में भारतीय खर्च करने में पीछे नहीं रहना चाहते। यही कारण रहा कि अक्टूबर माह में त्योहारों के सीजन में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई जिससे वस्तुओं और सेवाओं की मांग निकली। इसके चलते मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रमें नई नौकरियों ३३ माह के रिकॉर्ड़ स्तर पर पहंच गइ। अर्थशास्री इसके लिए अक्टूबर माह में लेन देन को बड़़ा कारक बता रहे हैं। अर्थव्यवस्था के डि़टिजलीकरण से भी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। ज्यादा से ज्यादा औपचारिक होने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है। लेकिन अभी भी बाहरी कारक चिंताजनक बने हुए हैं। रूस–यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर आपूर्ति लाइन प्रभावित हो रही है। कच्चे तेल के दाम ज्यादा होने से भी दिक्कतें बढ़ी हैं। लेकिन आर्थिक गतिविधियों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है।
धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की जगह कोई और स्थान हो?
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