सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा केरल हाईकोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देने वाली अपीलों पर फैसला सुना सकता है, जिन्होंने कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना, 2014 को रद्द कर दिया था। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की 3 जजों की बेंच ने 6 दिनों की सुनवाई के बाद 11 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। चूंकि भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित 8 नवंबर, 2022 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में फैसला सुनाए जाने की संभावना है।
केरल हाईकोर्ट ने 2018 में कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना, 2014 को रद्द करते हुए, 15,000 रुपये प्रति माह की सीमा से ऊपर के वेतन के अनुपात में पेंशन का भुगतान करने की अनुमति दी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पेंशन योजना में शामिल होने के लिए कोई कट-ऑफ तारीख नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ EPFO द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया था। बाद में ईपीएफओ और केंद्र सरकार द्वारा दाखिल पुनर्विचार अर्ज़ी में एसएलपी की बर्खास्तगी को वापस ले लिया गया और मामले को गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए फिर से खोल दिया गया।
भविष्य निधि एक ऐसा विषय है जिससे लाखो लोग प्रभावित है , अब जबकि उच्चतम न्यायालय से अगले कुछ दिनों में इस पर अहम् फैसला आने वाला है तो इस विषय पर लंबे वक्त से संघर्षरत ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति राष्ट्रिय संगठन सचिव सच्चीदानंद मिश्रा से लम्बी वार्ता हुई .
ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति राष्ट्रिय संगठन सचिव सच्चीदानंद मिश्रा ने बताया की इस देश के 71 लाख ईपीएस 95 पेंशनभोगी, अल्प पेंशन राशि और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण बहुत ही दयनीय, मरणासन्न अवस्था की स्थिति में रह रहे हैं और दिन-ब-दिन दुनिया को छोड़ रहे हैं ।
श्री मिश्रा ने बताया की पेंशन भोगियों की वृद्धावस्था की कठिनाइयों/ मृत्यु /अस्थाई विकलांगता को ध्यान में रखते हुए दिनांक 16 नवंबर 1995 को कर्मचारी पेंशन चयन आयोग की परिकल्पना की गई थी । 7 जनवरी 1996 को ईपीएफओ ने पूरे देश के सभी राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित किया कि यह पेंशन योजना सरकारी पेंशन से 10 फ़ीसदी अधिक लाभ देगी । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन -ईपीएफओ ने मूल्य सूचकांक की तुलना में हर 3 साल में पेंशन का पुनर्मूल्यांकन करने का वादा किया । 1971 में ईएफपीएस पेंशन योजना की संपत्ति को ईपीएस95 योजना में मिला दिया गया । इस योजना के तहत कर्मचारियों ने रु 417 / रु541 / रु 1250 प्रतिमाह (जिसका आज का मूल्यांकन लगभग 15 से 20 लाख है) फंड में जमा करवाएं ।

पेंशनरों को आज बिना किसी महंगाई भत्ता के केवल रु 300 से रु 2500 प्रति माह पेंशन मिल रही है । देश में औसत इपीएस पेंशन केवल रु 1178 है । लगभग 18 लाख पेंशन भोगियों को रु 1000 से कम पेंशन मिल रही है । लगभग 33लाख पेंशन भोगियों को रु 1500 से कम पेंशन मिल रही है ।
श्री मिश्रा ने बताया की कोश्यारी समिति ने 2013 में रु 3000 महंगाई भत्ते की सिफारिश की, आज का मूल्य रु 7500 + डीए है । इस समिति ने सरकार के योगदान को वर्तमान 1.16 से बढ़ाकर 8.33 फीसदी करने की सिफारिश की । सरकार द्वारा लागू की गई समिति की सिफारिशों में से ईपीएफओ ने लागू नहीं किया । वास्तविक वेतन पर उच्च पेंशन के संबंध में उच्चतम न्यायालय का आदेश दिनांक 4 अक्टूबर 2016 लागू नहीं किया गया । ईपीएफओ ने एक सितंबर 2014 से पिछले 12 महीनों के औसत वेतन के मुकाबले पिछले वेतन के 5 साल के औसत की एकतरफा गणना करके पेंशन फार्मूला बदल दिया इससे पेंशन में और भारी कमी आई है ।
कोश्यारी समिति के बाद एक और उच्च अधिकार प्राप्त निगरानी समिति का गठन किया गया । इस समिति ने 3 महीने के बजाय 1 साल बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी । समिति की सिफारिशें व्यर्थ हुई थी । उसके बाद एक और समिति यानी श्रम पर संसदीय समिति का गठन किया गया। इस समिति ने पेंशनरों की समस्याओं पर विचार नहीं किया । अब एक और समिति का गठन किया गया है वह है पेंशन सुधारों पर समिति । हम इन समितियों के देश को समझने में विफल है । पेंशनभोगियों पूरी सेवा के दौरान नियमानुसार रु 417 / रु 541 / रु 1250 प्रतिमाह का अंशदान पहले ही कर दिया है । फिर उनके लिए सुधार क्यों ? क्या हर नई कमेटी बनाकर ईपीएफओ न्याय के इंतजार में उन्हें मारना चाहता है ?
श्री मिश्रा ने कहा की आज ईपीएफओ के पेंशन फंड में 6:30 लाख करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध है एवं हर साल यह फंड बढ़ते जा रहा है फिर भी ईपीएफओ का दावा है कि पेंशन फंड में पेंशन वृद्धि के लिए कोई पैसा नहीं है। यह ईपीएफओ द्वारा किया गया एक बड़ा धोखा है ।

एनपीएस में सरकार का योगदान 14 फीसदी है। असंगठित क्षेत्र में सरकार 100 फीसदी योगदान करती है जबकि EPS95 पेंशन भोगियों के लिए सरकार प्रशासनिक खर्च के लिए केवल 1.16 फीसदी का योगदान करती है । 1971 के बाद से इस योगदान में कोई वृद्धि नहीं हुई है । प्रधानमंत्री श्रम योगी मानव धन योजना में यदि व्यक्ति 30 वर्षों के लिए ₹100 का भुगतान करता है, तो उसे मासिक पेंशन रु 3000 मिलती है । जबकि इपीएस पेंशन भोगियों को ₹500 से अधिक योगदान करने के बाद एवं औसतन 30 से 35 वर्ष की सेवा के बाद औसतन रु 1170 ही मिलता है । यह सिद्ध अन्याय है ।
श्री मिश्रा ने कहा की तहसील स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक EPS95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति एनएसी ने पूरे देश में हजारों आंदोलन किए । बुलढाणा महाराष्ट्र स्थित एनएसी के मुख्यालय में पिछले 1381 दिनों से कलेक्टर कार्यालय के सामने यह पेंशनर्स क्रमिक अनशन कर रहे हैं ।
कई मौकों पर केंद्रीय श्रम मंत्री द्वारा किए गए वादों के बाद भी इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है प्रधानमंत्री ने भी दो बार वादा किया था इसलिए पूरे EPS95 पेंशन भोगियों को न्याय मिलने में इतनी देरी क्यो हो रही है ?
परन्तु प्रधानमंत्री से उम्मीद पूरी है और विश्वास है की EPS95 पेंशन भोगियों के साथ वे न्याय जल्द करेंगे ।
Feb 10, 2021 : लोकसभा (Lok Sabha) में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कई मुद्दों पर बात की थी . उन्होंने कृषि कानूनों व कोरोना काल का जिक्र करते हुए जनधन खातों व पेंशन पर भी बात की थी . उन्होंने संसद में कहा, “2014 से पहले किसी को पेंशन 7 रुपये मिल रही थी. किसी को 25 रुपये तो किसी को 50 रुपये, किसी को 250 रुपये मिल रही थी. ये सब देश में चल रहा था. मैंने कहा कि इन पैसों को लेने जाने के लिए भी ऑटो रिक्शा में इससे ज्यादा पैसे खर्च होता होगा. किसी ने मुझसे मांग नहीं की थी. किसी मजदूर संगठन ने मुझे आवेदन नहीं दिया था. फिर भी हमने उन्हें न्यूनतम 1000 रुपये देने का फैसला किया, जबकि हमसे किसी ने मांगा नहीं था.”
पेंशन भोगियों की मुख्य मांगे
रु 7500 + डीए न्यूनतम पेंशन के रूप में दिया जाए ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 4 अक्टूबर 2016 को लागू कर ईपीएफओ के 31 मई 2017 की अंतरिम सलाह को वापस ले लिया जाए एवं वास्तविक वेतन पर उच्च पेंशन के विकल्प की सुविधा प्रदान की जाए।
सभी EPS95 पेंशन भोगियों और उनके जीवन साथी को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाए ।
सेवानिवृत्ति के सदस्यों को रु 5000 प्रति माह दिया जाए ।



