चीन ने दो दिन में दूसरी बार पाकिस्तानी आतंकी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने से बचा लिया है। चीन ने 18 अक्टूबर को लश्कर आतंकी शाहिद महमूद को ब्लैक लिस्ट होने से बचाया। इसके बाद 19 अक्टूबर को मुंबई 26/11 आतंकी हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के बेटे हाफिज तलहा सईद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने से बचा लिया। इसके लिए चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया।
तलहा पाकिस्तान का पांचवां आतंकी है जिसे चीन ने इस साल UNSC में ब्लैक लिस्ट होने से बचाया है। चीन ने यह अड़ंगा ऐसे समय लगाया है जब UN सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस भारत में हैं। इस दौरान उन्होंने मुंबई में 26/11 के हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी है। मुंबई में यह हमला लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने ही किया था। भारत और अमेरिका ने 1267 अल कायदा सैंक्शन कमेटी के तहत शाहिद महमूद और हाफिज तलहा सईद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए यह प्रस्ताव पेश किया था।
कौन है शाहिद महमूद, जिसे चीन ने बचाया?
शाहिद महमूद लश्कर-ए-तैयबा के सबसे पुराने आतंकियों में से एक है। यह 2007 से ही लश्कर से जुड़ा है। 2013 में अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने महमूद को लश्कर के पब्लिकेशन विंग का मेंबर बताया था।
अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 2016 में बताया था कि महमूद का सबसे बड़ा मकसद भारत और अमेरिका पर हमला करना है। शाहिद महमूद 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड में से एक साजिद मीर का करीबी है। चीन ने पिछले महीने यानी सितंबर में मीर को भी UNSC में ब्लैक लिस्ट होने से बचाया था।
महमूद पहले साजिद मीर के नेतृत्व में लश्कर-ए-तैयबा की विदेशी ऑपरेशन टीम का हिस्सा रह चुका हैं। अगस्त 2013 में महमूद को बांग्लादेश और म्यांमार में इस्लामी संगठनों के साथ संबंध बनाने का निर्देश दिया गया था।
लश्कर के लिए पैसे भी जुटाता है
महमूद लश्कर के लिए फंड जुटाने का भी काम करता है। महमूद लश्कर-ए-तैयबा के विंग फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन यानी FIF के लिए भी काम कर चुका है।
लश्कर का यह संगठन मानवता के काम के नाम पर आतंकवाद के लिए धन जुटाने का काम करता है। महमूद ने जून 2015 से जून 2016 तक ने FIF के वाइस चेयरमैन के रूप में काम किया। महमूद 2014 तक कराची में FIF का प्रमुख था।
युवा रोहिंग्याओं का ब्रेनवॉश कर आतंकवादी बनाता है
2016 में अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने बताया था कि शाहिद महमूद बांग्लादेश भी जा चुका है। बांग्लादेश में इस दौरान वह रोहिंग्याओं के कैंप में गया और वहां के युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती हाेने के लिए पैसे भी दिए।
भारत और बांग्लादेश की सरकारों ने कई फोरम में रोहिंग्याओं के आतंकी हाथों में जाने के जोखिम की बात कही है। इसमें कहा गया था कि म्यांमार में उत्पीड़न के शिकार माइग्रेंट में से कुछ पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों में शामिल हो सकते हैं।
महमूद लश्कर आतंकी मोहम्मद सरवर के साथ भी काम कर चुका है। दोनों ने 2010 में लश्कर और FIF की फंड रेजिंग यानी पैसे जुटाने के लिए गाजा, म्यांमार, बांग्लादेश, सीरिया और तुर्की की यात्रा की थी। माना जाता है कि इस दौरान यहां से कई युवाओं को लश्कर में भर्ती भी किया गया था।
अमेरिका शाहिद महमूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर चुका है
ओबामा प्रशासन के समय 2016 में अमेरिका ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने शाहिद महमूद के साथ मोहम्मद सरवार को भी ग्लोबल आतंकी घोषित किया था। महमूद, साजिद मीर, मक्की और सरवर ने कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए एक साथ काम किया है।
2020 में भारत सरकार ने लश्कर, हिजबुल, जैश और इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी गुटों के 18 प्रमुख कमांडरों के दाऊद इब्राहिम को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। इस लिस्ट में शाहिद महमूद का भी नाम था।
हाफिज सईद के बेटे तलहा सईद की क्राइम कुंडली

भारत के गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में बताया था कि हाफिज तलहा सईद भारत और अफगानिस्तान में भारतीय लोगों पर हमले कराने के लिए प्लान बनाने और हमलों को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाता रहा है। साथ ही लश्कर-ए-तैयबा युवाओं को भर्ती करने की जिम्मेदारी है।
तलहा पाकिस्तान में अलग-अलग शहरों में मौजूद लश्कर कैंपों का दौरा कर भारत, इजराइल, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में भारतीय हितों के खिलाफ जेहाद फैलाने की बात करता है। हाफिज तलहा सईद जम्मू-कश्मीर में जेहाद फैलाने की बात करता है।
चीन इस साल तीन और पाकिस्तानी आतंकियों को ब्लैक लिस्ट होने से बचा चुका है
1. अब्दुल रहमान मक्की : हाफिज सईद का साला कश्मीर में आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड है
इस साल जून में चीन ने UNSC में वीटो के जरिए पाकिस्तान स्थित लश्कर आतंकी अब्दुल रहमान मक्की को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने से बचा लिया था। मक्की के खिलाफ भारत और अमेरिकी की ओर ज्वाइंट प्रपोजल लाया गया था।
अमेरिका पहले ही अब्दुल रहमान मक्की को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर चुका है। भारत ने भी UAPA के तहत इसे आतंकी घोषित कर रखा है। मक्की लश्कर-ए-तैयबा के सरगना व 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद का साला है।
74 साल का मक्की लश्कर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। मक्की, भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर में हिंसा और हमलों को अंजाम देने के लिए योजना बनाने, धन जुटाने, आतंकियों की भर्ती करने और युवकों का ब्रेनवॉश कर कट्ट्रपंथी बनाने के काम में शामिल रहा है।
2. अब्दुल रउफ अजहर : एयर इंडिया के प्लेन को हाईजैक करने की साजिश में शामिल था
अगस्त में भी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल रउफ अजहर को बचाने के लिए चीन UNSC में आए प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा चुका है। अजहर का जन्म 1974 में पाकिस्तान में हुआ था। अमेरिका 2010 में अजहर पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट के मुताबिक, अजर पाकिस्तानी लोगों से आतंकवादी एक्टिविटी में शामिल होने का आह्वान करता रहता है।
अजहर 2007 में जैश एक्टिंग कमांडर के रूप में भारत में भी काम कर चुका है। भारत में वह जैश के इंटेलिजेंस कोऑर्डिनेटर के रूप में काम करता था। 2008 में अजहर को भारत में आत्मघाती हमले करने जिम्मेदारी मिली थी। वह जैश की राजनीतिक विंग से भी जुड़ा रहा है और उसने ट्रेनिंग कैंपों में शामिल जैश कमांडर के रूप में काम किया है। अजहर 1999 में एयर इंडिया के विमान को हाईजैक करने में शामिल रहा है।
3. साजिद मीर : 26/11 हमले के मास्टरमाइंड में से एक, अमेरिका ने 41 करोड़ का इनाम रखा
इस साल सितंबर में ही चीन ने पाकिस्तान स्थित लश्कर आतंकी साजिद मीर को भी UNSC में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने से बचाया था। लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी साजिद मीर मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है।
मीर भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादियों में से एक है। मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों में उसकी भूमिका के लिए अमेरिका ने उस पर 5 मिलियन डॉलर यानी 41 करोड़ रुपए का इनाम रखा गया है।
इस साल जून में मीर को पाकिस्तान में एक आतंकवाद-रोधी कोर्ट ने टेरर फाइनेंसिंग के मामले में 15 साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि पाकिस्तानी अफसरों ने पहले दावा किया था कि मीर की मौत हो गई है, लेकिन पश्चिमी देश नहीं माने और उन्होंने इसका प्रूफ मांगा। पिछले साल के अंत में FATF की मीटिंग में पाकिस्तान के खिलाफ यह अहम मुद्दा बना था।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मीर लश्कर के आतंकी ऑपरेशन का मैनेजर है। वह इन हमलों की योजना, तैयारी और अंजाम देने में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है।
अब जानते हैं उस प्रोसेस के बारे में, जिसके जरिए आतंकियों को ब्लैकलिस्ट किया जाता है…
1267 अल कायदा सैंक्शन कमेटी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC का एक अहम हिस्सा है। इसके तहत आतंकियों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाते हैं। साल1999 में इस कमेटी का बनाया गया था। सितंबर 2001 में अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद इसे और मजबूती दी गई। इसे अब इस्लामिक स्टेट समूह और अल कायदा सैंक्शन कमेटी के रूप में जाना जाता है।
वीटो पावर का इस्तेमाल चीन आतंकियों को बचाने में कर रहा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है। यह UN की सबसे पावरफुल संस्था है। इस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है।
कुछ मामलों में UNSC अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने या बहाल करने के लिए प्रतिबंध लगाने या बल उपयोग करने का सहारा ले सकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती है और यह अंग्रेजी के अल्फाबेटिकल ऑर्डर में होता है।
इसके पांच स्थायी मेंबर हैं। इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन है। इसके साथ ही हर दो साल के लिए 10 अस्थायी मेंबर्स को भी चुना जाता है। हलांकि वीटो पावर UNSC के सिर्फ 5 स्थायी सदस्यों को ही मिला है।
यह काफी अहम होता है। यदि 5 स्थायी सदस्यों में से 4 सदस्य कोई प्रस्ताव पास कराना चाहते हैं लेकिन एक सदस्य नहीं चाहता है तो वीटो कर सकता है। ऐसा होने पर UNSC में प्रस्ताव पास नहीं हो सकेगा।
यानी अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस किसी आतंकी को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाएं लेकिन चीन इसका विरोध कर दे तो वह आतंकी ग्लोबल टेररिस्ट घोषित नहीं हो पाएगा।
Veto लैटिन भाषा का शब्द है। इसका मतलब होता है ‘मैं अनुमति नहीं देता हूं’। प्राचीन रोम में कुछ निर्वाचित अधिकारियों के पास यह शक्ति होती थी। वे इस शक्ति का इस्तेमाल करके रोम सरकार की किसी कार्रवाई को रोक सकते थे।



