क्वीन एलिजाबेथ-II के अंतिम संस्कार की रस्में जारी है हैं। स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय सम्मान की रस्में पूरी की जा चुकी हैं। स्टेट फ्यूनरल फंक्शन में हेड ऑफ द स्टेट्स ने क्वीन को श्रद्धांजलि दी। इनमें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन शामिल थे।
अब प्राईवेट फ्यूनरल की रस्में शुरू होंगी। इसके लिए उनके पार्थिव शरीर को रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (घुड़सवार दल) और NHS स्टाफ की अगुआई में वेलिंगटन आर्च ले जाया जा रहा है। यहां सेंट जॉर्ज मेमोरियल चैपल में प्रिंस फिलिप की कब्र के पास उन्हें दफनाया जाएगा।

वेस्टमिंस्टर ऐबे में हुआ स्टेट फ्यूनरल
इसके पहले, रॉयल गार्ड्स की परेड के साथ क्वीन का कॉफिन यानी ताबूत वेस्टमिंस्टर हॉल से वेस्टमिंस्टर ऐबे लाया गया। शाही परिवार के लोग गन कैरीज (तोपगाड़ी) के पीछे चल रहे थे।

अंतिम संस्कार की तमाम रस्में डीन ऑफ वेस्टमिंस्टर डेविड होयले ने पूरी कराईं। उनके साथ केंटरबरी के आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी मौजूद रहे। शाही रीति-रिवाजों के मुताबिक, क्वीन के निधन पर शोक जताया गया, प्रेयर्स हुईं। प्राइम मिनिस्टर लिज ट्रस ने छोटा भाषण दिया। शाही परिवार की तरफ से एक प्रस्ताव पढ़ा गया। फिर दो मिनट का मौन रखा गया। इसके साथ ही स्टेट फ्यूनरल की रस्में पूरी हो गईं। इस दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, अमेरिकन प्रेसिडेंट बाइडेन समेत दुनियाभर से आए राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रहे।
प्राइवेट फ्यूनरल में क्या होगा
वेलिंग्टन आर्च से ताबूत विंडसर कैसल ले जाया जाएगा। यहां के सेंट जॉर्ज मेमोरियल चैपल में डीन ऑफ विंडसर रॉयल फैमिली और क्वीन के पर्सनल स्टाफ के साथ प्रेयर करेंगे। ताबूत रॉयल वॉल्ट में रखा जाएगा। केंटरबरी के आर्कबिशप आशीष वचन (Blessings) बोलेंगे। रॉयल बैंड शोक धुन बजाएगा। रॉयल जूलर (शाही सुनार) क्वीन के ताबूत से क्राउन निकालेंगे। इसे राजमहल ले जाया जाएगा।
क्वीन एलिजाबेथ-II का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारतीय समय के मुताबिक दोपहर साढ़े तीन बजे (ब्रिटेन में सुबह 11 बजे) शाही परंपराओं के मुताबिक स्टेट फ्यूनरल शुरू होगा। महारानी का स्कॉटलैंड में 8 सितंबर को 96 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए 11 सितंबर से वेस्टमिंस्टर हॉल में रखा है।
स्टेट फ्यूनरल के लिए उनका ताबूत वेस्टमिंस्टर हॉल से वेस्टमिंस्टर ऐबे लाया जाएगा। इस दौरान मिलिट्री परेड होगी। शाही परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में प्राइवेट सेरेमनी के बाद भारतीय समय के मुताबिक रात 8:30 बजे (ब्रिटेन में शाम 4 बजे) क्वीन को दफनाया जाएगा।
अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए ब्रिटेन में शाही परिवार के सदस्यों के अंतिम संस्कार की प्रोसेस क्या है…
क्वीन के ताबूत के पीछे चलेंगे किंग चार्ल्स-III
ब्रिटेन के नए राजा यानी किंग चार्ल्स-III क्वीन एलिजाबेथ-II के ताबूत के पीछे चलेंगे। ड्यूक ऑफ ससेक्स यानी प्रिंस हैरी और उनके भाई विलियम यानी प्रिंस ऑफ वेल्स भी साथ होंगे। शाही परिवार के बाकी सदस्य भी अंतिम यात्रा में शामिल रहेंगे।
गन कैरिज पर ले जाया जाएगा क्वीन का ताबूत
शाही परंपराओं के मुताबिक क्वीन का अंतिम संस्कार उनके निधन के 10 दिन बाद किया जा रहा है। महारानी के ताबूत को गन कैरिज में वेस्टमिंस्टर ऐबे ले जाया जाएगा। इसे 142 रॉयल नेवी सेलर्स खीचेंगे। इसी कैरिज का इस्तेमाल एडवर्ड VII, जॉर्ज V, जॉर्ज VI और सर विंस्टन चर्चिल के अंतिम संस्कार के दौरान भी किया गया था।

वेस्टमिंस्टर ऐबे में होगा स्टेट फ्यूनरल
क्वीन का ताबूत वेस्टमिंस्टर ऐबे पहुंचने पर शाही रीति-रिवाजों के मुताबिक उनके निधन पर शोक जताया जाएगा। उनके लिए प्रेयर्स पढ़ी जाएंगी। एक घंटे के इस कार्यक्रम में ही दुनियाभर से आए राष्ट्राध्यक्ष क्वीन एलिजाबेथ-II को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद पूरे ब्रिटेन में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। इस कार्यक्रम को ही स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार कहा जाता है।
क्वीन को सेंट जॉर्ज चैपल में दफनाया जाएगा
वेस्टमिंस्टर ऐबे में स्टेट फ्यूनरल के बाद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (घुड़सवार दल) और NHS स्टाफ की अगुआई में महारानी का ताबूत वेलिंगटन आर्क ले जाया जाएगा। यहीं राजपरिवार के सदस्य और रॉयल फैमिली के करीबी लोग एक प्राइवेट सेरेमनी में शामिल होंगे। यहां से ताबूत विंडसर कासल ले जाया जाएगा। वहां सेंट जॉर्ज मेमोरियल चैपल में प्रिंस फिलिप की कब्र के पास उन्हें दफनाया जाएगा।

टावर ऑफ लंदन ले जाए जाएंगे शाही प्रतीक
महारानी एलिजाबेथ के पार्थिव शरीर को जिस ताबूत में रखा गया, उसे रॉयल स्टैंडर्ड यानी शाही कपड़े में लपेटा गया। ताबूत को वेस्टमिंस्टर हॉल में रखे जाने के बाद इस पर इंपीरियल स्टेट क्राउन यानी राजमुकुट रखा गया। राजशाही का प्रतीक ऑर्ब यानी राजप्रतीक और स्कैप्टर यानी राजदंड भी रखे गए। ताबूत को दफन करने से पहले सभी शाही प्रतीक हटाकर उन्हें टावर ऑफ लंदन ले जाया जाएगा।

राष्ट्रपति मुर्मू और अमेरिकन प्रेसिडेंट बाइडेन मौजूद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू क्वीन के फ्यूनरल में शामिल होने के लिए 18 सितंबर को लंदन पहुंचीं। यहां वेस्टमिंस्टर हॉल में उन्होंने क्वीन को भारत के लोगों की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लंदन के लैंकेस्टर हाउस में महारानी एलिजाबेथ II की याद में कंडोलेंस बुक पर साइन भी किए। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने बकिंघम पैलेस में ब्रिटेन के नए राजा किंग चार्ल्स III से मुलाकात की

पहले ही हो गई थी ‘डी डे’ की प्लानिंग
महारानी के निधन के दिन यानी ‘डी डे’ की पूरी प्लानिंग पहले ही हो गई थी। साल 2021 में कुछ डॉक्यूमेंट्स लीक हुए थे, जिसमें अंतिम संस्कार की तैयारियों का सीक्रेट प्लान था। ‘ऑपरेशन लंदन ब्रिज’ के मुताबिक ही तैयारियां हो रही हैं। प्लानिंग के मुताबिक, रॉयल परिवार की वेबसाइट का पेज ब्लैक कर दिया गया। महारानी के निधन के बाद 10 मिनट के भीतर वॉइटहॉल के झंडे आधे झुकाने का जिक्र इस ऑपरेशन में किया गया था। ऑपरेशन स्प्रिंग टाइड में प्रिंस चार्ल्स की ताजपोशी का जिक्र था।
दो घंटे तक चलेगा प्रोग्राम, बिगुल बजाकर दी जाएगी अंतिम विदाई
शाही समारोह का यह कार्यक्रम करीब दो घंटे तक चलेगा। इस दौरान पारंपरिक रुप से बिगुल बजाकर महारानी को अंतिम विदाई दी जाएगी। महारानी के अंतिम संस्कार के दौरान समूचे ब्रिटेन में दो मिनट का राष्ट्रीय मौन रहेगा। बता दें कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन 8 सितंबर हो 96 वर्ष की आयु में हो गया था। एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटेन पर सबसे लंबे समय तक राज करने वाली शाही हस्ती रहीं। उन्होंने 70 साल तक ब्रिटेन पर शासन किया।
शाही परिवार के रुतबे और असर को रखा बरकरार
क्वीन एलिजाबेथ 2 जून 1953 को ब्रिटेन की महारानी के पद पर आसीन हुईं थीं। जब एलिजाबेथ क्वीन बनीं तब दुनिया ही नहीं ब्रिटेन में भी राजशाही पर सवाल उठ रहे थे। लेकिन महारानी एलिजाबेथ ने तमाम विरोध के बावजूद शाही परिवार के रुतबे और असर को बरकरार रखा। दरअसल, क्वीन एलिजाबेथ के करीब 70 साल के कार्यकाल के दौरान ब्रिटेन ही नहीं बल्कि समूची दुनिया में भारी बदलाव हुए। इस दौरान ब्रिटेन ने सिर्फ आर्थिक चुनौतियों का ही नहीं बल्कि राजनीतिक संकटों का भी सामना किया। उतार.चढ़ाव के दौर में ब्रिटेन की महारानी अपने देश की जनता के लिए भरोसे का प्रतीक बनीं रहीं।
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को निधन हो गया है। वह पिछले कुछ वक्त से बीमार थीं। 96 साल की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय फिलहाल स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कासल में थीं। यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। वे सबसे लंबे समय तक (70 साल) ब्रिटेन की क्वीन रहीं।







