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BJP Mission South: बीजेपी का यह प्लान कामयाब हुआ तो कर्नाटक के बाद तेलंगाना दूसरा राज्य होगा जहां बीजेपी को सत्ता मिल सकती है……

UB India News by UB India News
September 20, 2022
in प्रदेश, संपादकीय
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BJP Mission South: बीजेपी का यह प्लान कामयाब हुआ तो कर्नाटक के बाद तेलंगाना दूसरा राज्य होगा जहां बीजेपी को सत्ता मिल सकती है……
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तेलंगाना में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले यदि राज्य में कांग्रेस मजबूत नहीं होती है तो मुख्य मुकाबला तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच ही होगा। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए यह राज्य काफी अहम है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी ने कई राज्यों में जीत हासिल की है लेकिन दक्षिण के राज्यों में यह कर्नाटक तक ही सीमित है। ऐसे में बीजेपी के लिए इस बार तेलंगाना का चुनाव काफी अहम है। हैदराबाद निकाय चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी का पूरा ध्यान अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। इस चुनाव में जाति समीकरण भी काफी अहम है। हुजूराबाद उपचुनाव में बीजेपी की जीत के बाद बीजेपी इस जीत के समीकरण को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनाव की पूरी रणनीति तैयार कर रही है।

हुजूराबाद उपचुनाव नतीजों को ध्यान में रखकर बीजेपी की खास रणनीति
बीजेपी का इस बार अधिक जोर हैदाराबाद निकाय चुनाव नतीजों के समीकरण की बजाय हुजूराबाद उपचुनाव नतीजों के समीकरण पर है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बीजेपी का जोर इस बार ध्रुवीकरण पर कम और पिछड़ी जाति के एकीकरण पर अधिक रहेगा। ग्रामीण तेलंगाना में सामाजिक-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जाति से तय होती है न कि धर्म से। राज्य के 12% मुसलमानों में से अधिकांश शहरी निवासी हैं, जो ज्यादातर हैदराबाद में केंद्रित हैं। OBC को ध्यान में रखते हुए भाजपा की रणनीति उसके लिए कामयाबी का द्वार खोल सकती है।

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तेलंगाना में लंबे समय से रेड्डी (कांग्रेस का पारंपरिक आधार) और वेलमास (सीएम के चंद्रशेखर राव की जाति) का प्रभाव रहा है। टीआरएस को पिछड़ी जातियों और दलितों का समर्थन पूर्व में हासिल हुआ। 1980 के दशक की शुरुआत में रेड्डी-प्रभुत्व वाली कांग्रेस के मामले में ऐसा ही था, जिसकी अविभाजित आंध्र प्रदेश पर पकड़ तेदेपा ने तोड़ दी थी। उसे पिछड़ी जातियों का साथ मिला। तेलंगाना में भी इसी तरह की प्रक्रिया चल रही है।

बीजेपी की नजर मुन्नूरु कापू पर, बनेंगे नए समीकरण
हैदराबाद और वारंगल के आसपास के नए जिलों में पिछड़ी जातियां सशक्त हुई है। यह वह जातियां हैं जिनके पास भूमि का बड़ा हिस्सा नहीं है। ये पिछड़ी जातियां विशेष रूप से मुन्नूरु कापू और मुदिराजुस हैं। बीजेपी ने बड़े पैमाने पर इसको ध्यान में रखकर रणनीति तैयार की है। मुन्नूरु कापू राज्य की 52% पिछड़ी जाति की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा (12%) है। बीजेपी के राज्य प्रमुख (और संभावित सीएम उम्मीदवार), बंदी संजय कुमार, इसी समुदाय से आते हैं। हैदराबाद में पीएम मोदी का भाषण और भाजपा की वंशवाद विरोधी रणनीति एक का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। पार्टी वंशवाद के आरोप को सामंतवाद और सत्ता के केंद्रीकरण के प्रतीक के रूप में पेश कर रही है जो केसीआर परिवार के आस-पास है।

भाजपा में शामिल हुए पूर्व टीआरएस मंत्री एटाला राजेंदर के हुजूराबाद से चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने एक पिछड़ी जाति के नेता की जीत के रूप में पेश किया जो ‘अभिमानी’ सत्ता के खिलाफ खड़ा हुआ। भाजपा द्वारा पेश इस राजनीतिक चुनौती का सामना टीआरएस कैसे करेगी यह भी कई बातों पर निर्भर करेगा। ओबीसी जातियों के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए टीआरएस पार्टी संगठन में यादवों और गौड़ जैसी संख्यात्मक रूप से पर्याप्त पिछड़ी जातियों को अधिक स्थान दे सकती है।

कांग्रेस का कमजोर होना किसके लिए फायदेमंद
राज्य में कांग्रेस के खिसकते जनाधार की वजह से भाजपा को राज्य में फायदा हुआ है। हालांकि यह भी तर्क दिया जा सकता है कि यदि कांग्रेस अधिक कमजोर हुई तो टीआरएस को फायदा हो सकता है। रेड्डी के साथ ही साथ कांग्रेस की पकड़ दलित और मुसलमानों पर भी है। दलित वर्ग पिछड़ी जातियों के साथ आने और मुसलमान हिंदुओं के एकजुट होने पर लामबंद हो सकते हैं। 2019 में केवल 5% दलितों और 2% मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया। कांग्रेस के और अधिक कमजोर होने पर इन दो समूहों का टीआरएस के पक्ष में ध्रुवीकरण हो सकता है। केसीआर आक्रामक रूप से दलितों को लुभा रहे हैं। हाल ही में दलित बंधु योजना को लागू किया है जिसमें प्रत्येक दलित परिवार को 10 लाख रुपये वितरित करने का वादा शामिल है।

बीजेपी अब तक एकमात्र दक्षिणी राज्य में अब तक सफल हुई है वो है कर्नाटक। कर्नाटक में भी तेलंगाना के समान स्थिति थी जहां लिंगायत और वोक्कालिगा का वर्चस्व था। बीजेपी ने अपना संगठन लिंगायत के इर्द-गिर्द खड़ा किया। तेलंगाना में भी पार्टी ऐसी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। अगले साल चुनाव में मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है।

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