केंद्र के साथ–साथ करीब आधे राज्यों में भाजपा की सरकार है। कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां वह अपने सहयोगी दलों के साथ सत्ता में है। कह सकते हैं कि इस समय देश में एक दल यानी भाजपा का शासन में प्रभुत्व है। राजनीति शास्त्र की शब्दावली में इसे एक दल का प्रभुत्व वाला शासन कहा जाता है। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के शासन काल में कांग्रेस भी यह राजनीतिक प्रतिष्ठा अर्जित कर चुकी है। आज के राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा एक तरफ है तो अन्य सभी विपक्षी दल दूसरी तरफ। इसलिए केंद्र के साथ राज्यों में अपनी सरकारों को बचाए रखना भाजपा की राजनीतिक प्रतिष्ठा के साथ जुड़ा हुआ है। २०२४ में लोक सभा के चुनाव होंगे और गुजरात‚ कर्नाटक‚ तेलंगाना‚ मप्र‚ हिमाचल‚ राजस्थान‚ छत्तीसगढ़‚ मेघालय‚ मिजोरम‚ त्रिपुरा‚ नगालैंड़ में हाल में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इनमें से ८ राज्य ऐसे हैं‚ जहां भाजपा की अकेली या सहयोगी दलों के साथ सरकार है। जम्मू कश्मीर में भी देर सबेर चुनाव होंगे। इन चुनावों में उतरने से पहले भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को उत्साहित और जुझारू बनाए रखना चाहती है। मंगलवार को प. बंगाल की सड़कों पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प के जो दृश्य दिखाई दिए उनके पीछे भाजपा की चुनावी रणनीति ही है। स्वीकार करना पड़ेगा कि भाजपा चुनावी तैयारियों के मामले में विपक्षी दलों को काफी पीछे छोड़ चुकी है। पिछले साल विधानसभा के चुनाव में हार के बाद अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए भाजपा ने ‘नबन्ना अभियान’ चलाया था। पिछले एक दशक के बाद बंगाल की सड़कों पर इस तरह का कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन देखा गया। विधानसभा में हार के बाद भाजपा के कई बड़े नेता टीएमसी में शामिल हो गए। हालांकि इनमें से ज्यादातर वे थे जो टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए थे। दल बदलुओं के भाजपा छोड़कर टीएमसी में शामिल होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी गिरा हुआ था। प्रदेश का सांगठनिक ढांचा भी चरमरा गया है। सड़कों पर संघर्ष करके अपने कार्यकर्ताओं के गिरे हुए मनोबल को उठाना भाजपा का प्राथमिक राजनीतिक लक्ष्य है। सांगठनिक ढांचे को मजबूत बनाकर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों को जन–जन तक पहुंचाना भी पार्टी का प्रमुख लक्ष्य है। प्रदेश की ४२ लोक सभा सीटों में से १७ सीटें भाजपा के पास हैं। अन्य १५ सीटों पर भाजपा बहुत कम वोटों से हारी थी और इन १५ सीटों पर अपनी कमजोरियों को चिह्नित करना चाहती है। प. बंगाल की सरकार और प्रशासन को अभी आगे भी भाजपा के इस तरह के बड़े विरोध प्रदर्शनों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा।
जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब महीने भर से चल रहा काक्रोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी विस्तार ले...







