वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत की तुलना भगवान हनुमान से करते हुए पूछा कि आखिर‚ घरेलू निवेशक विनिर्माण क्षेत्र में निवेश करने से झिझक क्यों रहे हैं‚ जबकि सरकार उनके साथ है‚ उनके लिए नीतिगत बदलाव लाने को भी तत्पर है। कहा कि घरेलू निवेशक अपनी शक्ति और क्षमता का आकलन करने में चूक रहे है। विदेशी निवेशक जहां भारत को लेकर भरोसा जता रहे हैं‚ वहीं घरेलू निवेशक झिझक दिखा रहे हैं। ऐसे में देश संभावनाओं का अच्छे से दोहन नहीं कर पा रहा है। माइंड़माइन शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह समय भारत का है‚ हम अवसर नहीं खो सकते। अवसरों और संभावनाओं को देखते हुए सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना लेकर आई‚ विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए करों की दरों में भी कटौती की। भविष्य में भी जरूरत पड़़ने पर सरकार जरूरी बदलाव को तैयार है क्योंकि कोई भी नीति अंतिम नहीं होती। जैसे–जैसे हम आगे बढ़ते हैं‚ समय के साथ किसी भी नीति में बदलाव की जरूरत महसूस होती ही है। इसलिए निवेश को प्रोत्साहन देने की इच्छुक कोई भी सरकार नीतिगत बदलाव करने में पीछे नहीं रहती। भारत में सरकार ने उद्योग और निवेश के मद्देनजर इस कदर माकूल और अनुकूल माहौल बना दिया है कि विदेशी निवेशकों का भारत के निवेश क्षेत्र में भरोसा बढ़ा है। एफड़ीआई और एफपीआई के प्रवाह और शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास से इसकी पुष्टि होती है। भारतीय निवेशकों को भी आगे बढ़कर कर निवेश बढ़ाने की तत्परता दिखानी होगी। लेकिन न जाने क्यों वे भ्रमित दिख रहे हैं‚ जैसे उन्हें अपनी क्षमता पर विश्वास ही न हो। यह स्थिति किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं। यदि क्षमतावान अपनी क्षमता का भरपूर इस्तेमाल नहीं करेगा तो कहीं न कहीं अपनी संभावित उपलब्धियों को हासिल करने में चूक रहा होता है‚ बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए अपने निवर्हन भी पीछे छूट जाता है। अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक मजबूत हैं‚ ऐसी स्थिति किसी भी निवेश को प्रेरित करने में समर्थ है। निवेश करने में किसी संशय की गुंजाइश नहीं है। लेकिन सक्षमता की अनदेखी करके पांव पीछे खींच लिए गए तो अर्थव्यवस्था की बेहतरी के प्रयास परिणामोन्मुख नहीं रहने पाएंगे। अवसर चूकना चिंता की बात होती है क्योंकि इसके परिणाम प्रतिगामी होते हैं‚ और जिनसे उबरने के लिए‚ खासी मशक्कत के बावजूद किसी भी देश या व्यक्ति के लिए‚ हालात सहज नहीं रह जाते।
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