अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के हाल के राष्ट्रीय संबोधन को लेकर वहां की घरेलू राजनीति में भूचाल आ गया है। वहां सीनेट‚ प्रतिनिधि सभा और राज्यों के गवर्नरों के मध्यावधि चुनाव से पहले बाइडे़न ने विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी पर बड़ा हमला किया है। उनके इस भाषण को चुनावी भाषण माना जा रहा है‚ लेकिन उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के विरुद्ध जितने कड़़े शब्दों का इस्तेमाल किया है‚ वह अमेरिकी राजनीति में अप्रत्याशित माना जा रहा है। बाइडेन ने ट्रंप और उनके समर्थकों को लोकतंत्र और विधि के शासन का दुश्मन करार दिया है। इसी के साथ उन्होंने ट्रंप के मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के नारे का भी मखौल उड़ाया। बाइडेन ने मागा रिपब्लिकन की तुलना उग्रवादी के रूप में की। अमेरिका में यह संभवतः पहला अवसर है जब किसी राष्ट्रपति ने अपने विपक्षियों पर आतंकवादी और फासिस्ट जैसे शब्दों से मिलते–जुलते विशेषणों का प्रयोग किया। ट्रंप और उनके समर्थकों ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि क्या बाइडे़न करीब साढ़े सात करोड़़ मतदाताओं को आतंकवादी और फासिस्ट मानते हैं‚ जिन्होंने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को वोट दिए थे।
जो बाइडेन के इस विवादास्पद बयान के कुछ दिन पहले ही अमेरिका की संघीय पुलिस एफबीआई ने ट्रंप के आवास पर छापे मारे थे तथा बहुत से दस्तावेज बरामद किए थे। बाइडेन प्रशासन का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति ने बहुत से गोपनीय दस्तावेजों को अपने पास रखा था। जाहिर है कि बाइडेन प्रशासन अपनी जांच एजेंसियों के जरिए ट्रंप की घेराबंदी कर रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के अनुसार प्रशासन की कोशिश यह है कि वर्ष २०२४ में राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को चुनाव लड़़ने से एन–केन–प्रकारेण रोका जाए। आश्चर्य की बात यह है कि इस समय बाइडेन ने अपने विपक्षियों के विरुद्ध मोर्चा क्यों खोलाॽ अमेरिका में तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के कारण बाइडेन की लोकप्रियता निचले स्तर पर है। हो सकता है मध्यावधि चुनाव के मद्देनजर बाइडेन की रणनीति ‘आक्रमण ही सबसे कारगर सुरक्षा’ है। बाइडेन विरोधियों का आरोप है कि राष्ट्रपति अमेरिकी समाज को विभाजित कर रहे हैं‚ जिसकी परिणति गृह–युद्ध में हो सकती है। दूसरी ओर बाइडेन समर्थक उनके संबोधन को सामयिक और माकूल बता रहे हैं। उन्होंने इस संबोधन को ‘युद्धकालीन राष्ट्रपति संबोधन’ की संज्ञा दी। बाइडेन समर्थक मीडि़या और बुद्धिजीवियों ने कहा कि राष्ट्रपति देश के सामने मौजूद खतरे के प्रति देश को आगाह कर रहे हैं। राष्ट्रपति मतदाताओं को यह भी बता रहे हैं कि मध्यावधि चुनाव में क्या कुछ दांव पर लगा है। पक्ष–विपक्ष और आरोप–प्रत्यारोप के बीच यह स्पष्ट है कि अमेरिका की लोकतांत्रिक प्रणाली संकट के दौर से गुजर रही है। जनमत सर्वेक्षण के अनुसार देश के लोगों का विश्वास लोकतांत्रिक प्रणाली से उठ रहा है। आम जनता में सरकार और नेतृत्व को लेकर निराशा व्याप्त है। इस माहौल में आने वाला समय एक अनिश्चित भविष्य की ओर संकेत कर रहा है। मध्यावधि चुनाव के नतीजे यदि बाइडेन और डे़मोक्रेटिक पार्टी के विरुद्ध जाते हैं तो देश में संकट और गहरा जाएगा।
अमेरिकी राजनीति में यह उथल–पुथल उस समय हो रही है‚ जब यूरोप यूक्रेन संकट में घिरा है तथा हिंद–प्रशांत में चीन की सैनिक चुनौती गंभीर रूप ले रही है। इतने मोर्चे पर एक साथ लड़ना किसी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। युद्ध में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियारों की आपूर्ति के बावजूद युद्ध के मोर्चे पर रूस की पकड़ कमजोर नहीं पड़ रही है। वहां नई परिस्थिति यह है कि रूस अपने कब्जे वाले क्रीमिया‚ डोनबास और लुहान्स्क में अब सुरक्षात्मक लड़ाई लड़ रहा है।
दूसरी ओर यूक्रेन गंवाए गए भूभाग को हासिल करने के लिए जी तोड़ कोशिश में है। सैनिक रणनीति का सामान्य सिद्धांत यह है कि आक्रमण की तुलना में सुरक्षा करना ज्यादा आसान है। यह रूस के लिए अनुकूल बात है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने व्यापक प्रतिबंधों के जरिए रूस के विरु द्ध आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है‚ लेकिन पिछले छह महीनों के अनुभव से जाहिर है कि प्रतिबंध कारगर साबित नहीं हो रहे हैं।







