RJD को एक और धक्का लगा है। मुजफ्फरपुर के कुढ़नी से विधायक अनिल सहनी को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने एलटीसी घोटाले में शनिवार को 3 साल की सजा सुनाई।बता दें कि इससे पहले मोकामा के विधायक अनंत सिंह को सजा होने के बाद उनकी विधायकी जा चुकी है। राजद कोटे से मंत्री बने अनंत सिंह के खास कार्तिक कुमार को मंत्री पद छोड़ना पड़ा, वे अब फरार चल रहे।
29 अगस्त को दोषी करार
कोर्ट ने सहनी को 29 अगस्त को दोषी करार दिया था। सीबीआई ने बिना किसी यात्रा के भत्ते के भुगतान के लिए जाली ई टिकट और फर्जी बोडिंग पास मामले में दोषी करार दिया था। यह 23.71 लाख की धोखाधड़ी का मामला है। सहनी तब जदयू से राज्य सभा के सदस्य थे। अभी वे राजद के विधायक हैं।
21 अगस्त 2013 को मामला दर्ज
इस एलटीसी घोटाले के मामले में 21 अक्टूबर 2013 को सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। उन पर दो लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 2 साल से अधिक की सजा होने पर सदस्यता खत्म हो जाती है।

3 सितंबर को दोषसिद्ध
अब आगे बिहार विधान सभा से उन्हें दोषसिद्धि की तिथि 3 सितंबर से विधान सभा की सदस्यता से हटाया जाएगा। बता दें कि अभी राजद के विधायकों की संख्या 79 है। उनको हटाए जाने के बाद यह संख्या घटकर 78 हो जाएगी। हालांकि राजद इसके बाद भी सबसे बड़ी पार्टी राज्य में बनी रहेगी। दूसरी सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के विधायकों की संख्या 76 है। विधान सभा में रिक्त सीट बढ़कर तीन हो जाएगी। भाजपा के सुबाष सिंह के निधन से दूसरी सीट रिक्त हुई है। पहली सीट अनंत सिंह को सजा से रिक्त है। अनिल सहनी अगले छह साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।
राजद और जदयू दोनों चुप हैं- प्रेमरंजन पटेल, भाजपा प्रवक्ता
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा है कि अनिल सहनी जब नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के राज्य सभा सदस्य थे तब यह आरोप लगा था। बिना यात्रा किए यात्रा भत्ता संसद से लेने का आरोप था। सीबीआई ने जांच की है। जदयू ने उन्हें पार्टी से निकाला था लेकिन राजद ने भ्रष्टाचारी को ही लाकर टिकट देकर विधायक बनाया। आज आरोप साबित हो गया फिर भी राजद ने पार्टी से नहीं निकाला है। जदयू और राजद दोनों मिलकर भ्रष्टाचार को छिपाने में लगे हैं। इस मामले में जदयू भी चुप है।
अभी बिहार विधान सभा में पार्टियों स्थिति
राजद- 79
भाजपा- 76
जदयू- 45,
कांग्रेस- 19
माले- 12,
हम- 4
सीपीआई- 2
सीपीएम- 2,
एआईएमआईएम- 1
निर्दलीय- 1
रिक्त-2







