कानून मंत्री से गन्ना उद्योग मंत्री बने कार्तिकेय कुमार उर्फ कार्तिक कुमार ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले आज ही उन्हें कानून मंत्री से हाटकर गन्ना उद्योग मंत्री बनाया गया था। अब उन्होंने बढते विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया है। गन्ना उद्योग मंत्री के पद से कार्तिकेय कुमार ने आज अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंप दिया। मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए राज्यपाल फागू चौहान को अपनी अनुशंसा भेज दी। कार्तिकेय कुमार अब राज्यमंत्री परिषद के सदस्य नहीं रहे। अब गन्ना उद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभार राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक कुमार मेहता को दिया गया है।
इससे पहले नीतीश कुमार सरकार ने कानून मंत्री कार्तिकेय कुमार का विभाग बदल दिया था। अपहरण के एक मामले में कथित संलिप्तता के बावजूद कार्तिकेय को मंत्रिमंड़ल में शामिल किए जाने की विपक्ष ने भारी आलोचना की थी। राज्य के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सलाह पर राज्यपाल सचिवालय द्वारा ३० अगस्त के एक आदेश के आलोक में कार्तिकेय कुमार को विधि विभाग के स्थान पर गन्ना उद्योग विभाग एवं शमीम अहमद को गन्ना उद्योग विभाग के स्थान पर विधि विभाग का कार्य अगले आदेश तक आवंटित किया गया था। कार्तिकेय ने १६ अगस्त को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नवगठित महागठबंधन सरकार में अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री के रूप में शपथ ली थी। भाजपा ने २०१४ के अपहरण के एक मामले में कार्तिकेय के नामजद होने के बावजूद उन्हें मंत्रिमंड़ल में शामिल किए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए उन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की मांग की थी। भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने राज्य में इन मंत्रियों के विभागों में फेरबदल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा‚ ‘आज कार्तिकेय सिंह का विभाग बदल दिया गया। यह नीतीश की नई जीरो टॉलरेंस नीति है कि फंसाते भी हम हैं‚ बचाते भी हम हैं। हम ही लालू (राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष)‚ तेजस्वी‚ अनंत सिंह‚ आनंद मोहन को फंसाएंगे और जब हमारे शरण में आ जाइएगा तो हम ही बचाएंगे।’ उन्होंने नीतीश पर ‘रबर स्टाम्प मुख्यमंत्री’ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब लालू के परिवार के ‘आदेशपालक’ की भूमिका में हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा‚ ‘बिहार में कैबिनेट फेरबदल से समस्या क्यों है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीयूष गोयल और स्मृति ईरानी जैसे केंद्रीय मंत्रियों के विभागों को बदल दिया तो किसी को कोई समस्या नहीं थी।’ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कार्तिक पर आरोप लगाया था कि अपहरण के एक मामले में समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया था और उन्होंने उसी दिन शपथ ली थी जिस दिन उन्हें एक अदालत में पेश होना था। कार्तिक पर लगाए गए आरोपों के बारे में मुख्यमंत्री से पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा था‚ ‘वारंट के बाद अदालत ने गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। उनको अभी तक अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। हम अदालत के निर्देशों का पालन करेंगे।
कार्तिक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित होने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने सुशील के बारे में कहा था‚ ‘यह सब गलत है।’ महागठबंधन सरकार का बाहर से समर्थन कर रही भाकपा माले ने १७ अगस्त को कहा था कि कानून मंत्री को बनाए रखने से सरकार की छवि खराब होगी। महागठबंधन में सात दल जदयू‚ राजद‚ कांग्रेस‚ भाकपा माले‚ भाकपा‚ माकपा और हम शामिल हैं।







