भले ही दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं मंदी और महंगाई की मार से परेशान हों, भारतीय अर्थव्यवस्था तमाम चुनौती के बाद भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है. बुधवार को जारी पहली तिमाही के जीडीपी के आधिकारिक आंकड़ों से तो इसी बात का साफ संकेत मिलता है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2022 तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 13.5 फीसदी की शानदार दर से वृद्धि की. तमाम अनुमान भी भारत से इसी तरह के आंकड़े की उम्मीद कर रहे थे.
देश की अर्थव्यवस्था पर अच्छी खबर आई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी ग्रोथ 13.5 फीसदी रही है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। अप्रैल-जून के दौरान ग्रोथ के शानदार आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूत तस्वीर को पेश करते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोर सेक्टर आउटपुट की रफ्तार घटी है। जुलाई में यह 4.5 फीसदी रही। पिछले साल इसी अवधि में यह 9.9 फीसदी थी। जुलाई तक चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में फिस्कल डेफिसिट 3.41 लाख करोड़ रुपये रहा है।
मंदी की चपेट में बड़ी अर्थव्यवस्थाएं
भारत की अर्थव्यवस्था ने ये शानदार आंकड़े ऐसे समय दिया है, जब दुनिया की कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं पस्त हो चुकी हैं. दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की बात करें तो वह औपचारिक रूप से मंदी की चपेट में आ चुका है. जून तिमाही के दौरान अमेरिकी जीडीपी में 0.6 फीसदी की गिरावट आई. इससे पहले मार्च तिमाही में अमेरिकी इकोनॉमी का साइज 1.6 फीसदी कम हो गया था. अगर कोई इकोनॉमी लगातार दो तिमाही में गिरावट का शिकार होती है, तो कहा जाता है कि वह अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भी मंदी में गिरने की कगार पर है. जनवरी तिमाही में ब्रिटिश इकोनॉमी में 0.8 फीसदी की गिरावट आई थी. सभी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स से जून तिमाही में भी जीडीपी में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं.
जुलाई में सुस्त पड़ा कोर सेक्टर
इससे पहले वित्त वर्ष 2021-22 (Q4FY22) की चौथी तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 4.1 फीसदी की दर से बढ़ा था. पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो 2021-22 के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.7 फीसदी रही थी. नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2022 तिमाही में भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 13.5 फीसदी रही. एनएसओ ने साथ ही यह भी बताया कि जुलाई महीने में कोर सेक्टर का आउटपुट सुस्त पड़ा है. साल भर पहले कोर सेक्टर की ग्रोथ रेट 9.9 फीसदी रही थी, जो जुलाई 2022 में कम होकर 4.5 फीसदी पर आ गई.
4 महीने में इतना हुआ फिस्कल डेफिसिट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों के दौरान यानी अप्रैल-जुलाई 2022 के दौरान फिस्कल डेफिसिट 3.41 लाख करोड़ रुपये रहा. यह पूरे साल के अनुमान के 20.5 फीसदी के बराबर है. इन चार महीनों के दौरान सरकार को 7.86 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि कुल खर्च बढ़कर 11.27 लाख करोड़ पहुंच गया. पहले चार महीने की प्राप्तियां पूरे साल के अनुमान के 34.4 फीसदी के बराबर है. इसमें रेवेन्यू के मोर्चे पर सरकार को 7.56 लाख करोड़ रुपये मिले. टैक्स रेवेन्यू ने 6.66 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया.
एक साल में सबसे तेज रही रफ्तार
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) ने शाम 05:30 पर इस फाइनेंशियल ईयर (FY23) की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े को जारी किया. आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले एक साल की सबसे तेज दर से तरक्की की. इससे पहले जून 2021 तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 20.1 फीसदी की दर से वृद्धि करने का रिकॉर्ड बनाया था. भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले साल के कमजोर आधार और महामारी का असर कम होने के बाद उपभोग में सुधार से मदद मिली है. इसके अलावा काबू में आती महंगाई ने भी राहत दी है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के ऊपर अभी भी कुछ चुनौतियां हैं, जिनका असर आने वाली तिमाहियों के आंकड़ों पर देखने को मिल सकता है.







