वुधवार को देश भर में जब १०० से अधिक स्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय‚ सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों ने एक साथ छापेमारी शुरू की‚ तो एक बार फिर यह शोर मचने लगा कि सरकार इन एजेंसियों को हथियार बनाकर अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान करना चाहती है।
संयोग से उसी दिन बिहार विधानसभा में जद (यू) और राजद सहित कई दलों की महागठबंधन सरकार को अपना विश्वास मत भी हासिल करना था। इसलिए इन दोनों दलों के नेताओं ने यह भी कहना शुरू कर दिया कि भाजपा हम पर दबाव बनाने के लिए इस प्रकार के छापों की कार्रवाई कर रही है ताकि हमलोग डर कर उसके साथ आ जाएं‚ लेकिन केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर बुधवार को न सिर्फ बिहार और दिल्ली में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद के नेताओं के ठिकाने रहे‚ बल्कि इन एजेंसियों ने झारखंड‚ पंजाब‚ बंगाल‚ हरियाणा और तमिलनाडु में भी कार्रवाई की। इनके छापों में अवैध खनन से लेकर अन्य भ्रष्टाचार जुड़े तमाम तरह के आरोपी रहे हैं। झारखंड में तो इन एजेंसियों को जांच के दौरान दो एके ४७ राइफलें भी मिलीं। ये राइफल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी माने जाने वाले प्रेम प्रकाश के घर से बरामद हुइ। ईडी ने यह कार्रवाई झारखंड के खनन घोटाले के सिलसिले में की थी। इस घोटाले के तार सीधे मुख्यमंत्री सोरेन से भी जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अब लीपापोती करने के लिए झारखंड पुलिस ने इन राइफलों पर अपना दावा ठोक दिया है।
उसका कहना है कि उसके दो सिपाहियों ने बारिश से बचाने के लिए इन राइफलों को प्रेम प्रकाश के घर में रख दिया था‚ लेकिन सवाल उठ रहा है कि प्रेम प्रकाश के घर से सिर्फ ५० मीटर दूर पुलिस थाना होने के बावजूद ये राइफलें सिपाहियों ने थाने के मालखाने में जमा करने के बजाय प्रेम प्रकाश के घर क्यों रखींॽ प्रेम प्रकाश के घर में इन राइफलों का मिलना राजनीति में भ्रष्टाचार एवं अपराध के गठजोड़ की ओर ही संकेत करता है। भ्रष्टाचार की ही कहानी सीबीआई द्वारा बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एवं राजद के अन्य नेताओं के ठिकानों पर मारे गए छापों में सामने आ रही है। वास्तव में सीबीआई की कार्रवाई लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में हुए जमीन के बदले नौकरी घोटाले पर केंद्रित रही है। इस मामले में बिहार में विभिन्न स्थानों के साथ–साथ गुरु ग्राम के एक निर्माणाधीन मॉल पर मारे गए छापों में मिले २०० से ज्यादा सेल डीड प्राप्त हुए हैं। आरोप है कि इस निर्माणाधीन मॉल में तेजस्वी यादव एवं उनके करीबियों का निवेश है। अब तक इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं कि लालू यादव ने अपने कार्यकाल में मंत्री बनाने के लिए या नौकरियां देने के बदले लोगों की जमीनें अपने परिवार या करीबियों के नाम लिखवाइ। सहज ही कल्पना की जा सकती है कि बिहार के वर्तमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव खुद के मुख्यमंत्री बनने पर बिहार के युवकों को जो १० लाख नौकरियां देने की बात कर रहे हैं‚ यदि उनका यह स्वप्न पूरा हो सका‚ तो यह घोटाला किस स्तर तक जाएगा।
बात सिर्फ लालू प्रसाद यादव या हेमंत सोरेन के परिवार की नहीं है। कुछ ही दिनों पहले पश्चिम बंगाल के कद् दावर नेता और कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी की एक महिला मित्र के घर से नोटों के पहाड़ और बेहिसाब सोने–चांदी की बरामदगी हुई है। दिल्ली में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर शराब ठेकों की नीलामी में चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों खुद सिसोदिया के जल्दी ही जेल जाने की आशंका जताते दिख रहे हैं। दिल्ली सरकार के एक मंत्री पहले भी जेल जा चुके हैं। महाराष्ट्र में एक साल पहले ही तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार के गृहमंत्री खुद एक एपीआई के जरिए हर महीने १०० करोड़ रुपयों की वसूली करवाने के आरोप में सलाखों के पीछे हैं। आघाड़ी सरकार के ही दूसरे मंत्री एक भगोड़े माफिया सरगना के परिजनों के साथ जमीन की सौदेबाजी में जेल की हवा खा रहे हैं।
अभी कुछ दिनों पहले ही शिवसेना के एक और वरिष्ठ नेता संजय राउत भी एक भूखंड घोटाले में ही प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उन्हें जिस पत्रा चाल मामले में आरोपी बनाया गया है‚ उसमें ६०० से ज्यादा लोगों की झोपडि़यां यह कहकर ले ली गई थीं कि उन्हें कुछ ही वर्षों में बढ़िया फ्लैट दिए जाएंगे। लोगों को न तो फ्लैट मिले‚ न वायदे के अनुसार किराया ही दिया गया।
अब ये सारे लोग अपनी किस्मत को रो रहे हैं। दरअसल‚ इन सभी घोटालों में कहीं तो मुंबई की पत्रा चाल के निवासियों की तरह आम जनता का प्रत्यक्ष नुकसान नजर आता है‚ कहीं बंगाल के पार्थ चटर्जी मामले में जनता का परोक्ष नुकसान हुआ होगा‚ लेकिन भ्रष्टाचार की इस चक्की में पिस तो आम जनता ही रही है। भ्रष्टाचार की इसी चक्की से बचाने के लिए ही इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में भ्रष्टाचार पर प्रहार करने का आह्वान किया है। इस आह्वान के १० दिन बीतते–बीतते ही केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
जब ये एजेंसियां कार्रवाई करती हैं तो राजनीतिक दल शोर मचाते हैं कि ये कार्रवाइयां बदले की भावना के तहत हो रही हैं। जिस मामले से नागरिकों का जो वर्ग सीधा नुकसान नहीं उठा रहा होता है‚ उसे भी इन छापों में राजनीति ही नजर आती है‚ लेकिन हम सबको यह समझना चाहिए कि नेताओं या भ्रष्ट अधिकारियों के घरों में मिलने वाले नोटों के पहाड़ प्रत्यक्ष या परोक्ष‚ हम लोगों की ही जेब से निकलने वाले धन से खड़े किए जाते हैं। इसलिए ऐसे छापे भी लगातार पड़ने चाहिए‚ और अदालतों को ऐसे मामलों में फैसले भी त्वरित गति से सुनाने चाहिए। ताकि नेताओं और अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया जा सके।







