बीते तीन दशकों में दुनिया ने जिस एक नए परिवर्तन को आगे बढ़ते और नई लीक में तब्दील होते देखा है‚ वह है शासन और विकास का नये सकर्मक साझे के तौर पर उभरना। दिलचस्प है कि इस उभार के केंद्र में अमेरिका या कोई यूरोपीय देश उतनी महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है‚ जितना दक्षिण एशिया। बात अकेले भारत की करें तो यहां यह उभार बीते कुछ वर्षों में लगातार एक स्पष्ट दिशा और गंतव्य की तरफ आगे बढ़ रहा है। भारत में हो रहा यह बदलाव मीडिया की उन सुर्ख़ियों से नितांत तौर पर अप्रभावी है‚ जिसमें राजनीति और सामाजिक तनाव जैसे मुद्े जब–तब तूल पकड़ते रहे हैं। इस बदलाव को थोड़ी गहराई से देखने की कोशिश करें तो जो पहली बात सामने आती है‚ वह यह कि देश की राजनीति का दक्षिणायन होना पिछले आठ सालों से कई कारणों से लगातार चर्चा में रहा है। इस चर्चा ने कहीं–न–कहीं विमर्श की वह तथ्यात्मक जमीन भी तैयार की है‚ जिस आधार पर शासन और विकास की बात अब एक साथ होनी जरूरी हो गई है। विकास की यह दरकार देश में विकास के नये और ऊंचे कंगारू के रूप में दिखने शुरू हो गए हैं। इस लिहाज से देश का सबसे महत्वपूर्ण सूबा उत्तर प्रदेश अब एक नया उदाहरण बनने जा रहा है। इस बार विधानसभा चुनाव में मिली अपूर्व सफलता और दृढ़ राजनीतिक स्थिरता के यश के साथ योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी को विकास के चुस्त मानकों पर खरा उतारने की हर स्तर पर कोशिश करते दिख रहे हैं।
इसके लिए उन्होंने एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है‚ जिसमें पहले सौ दिन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए योगी मंत्रिमंडल से लेकर प्रदेश का प्रशासनिक अमला जोर–शोर से लगा है। इसके बाद छह माह‚ एक वर्ष और पांच वर्ष के लिए कार्ययोजना का स्पष्ट लक्ष्य सामने है और सरकार इस बारे में किस गंभीरता से लगी है‚ वह योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक और मीडिया में आए उसके ब्योरे से साफ झलकता है। यह प्रदेश में विकास के नये मौसम और बदलाव का गहरा संकेत है। ये संकेत नये मीलस्तंभ के रूप में भी सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार कुल ढाई लाख करोड़ रुपये का बजट छोड़कर गई थी‚ अब यह साढ़े छह लाख करोड़ रु पये का है। इसके अलावा छोटे और मझोले उद्योग की बात करें‚ जिससे आम जनजीवन में विकास और समृद्धि की हलचल साफ–साफ देखी जा सकती है‚ तो इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हुआ है। विकास का गहरा नाता लॉजिस्टिक सपोर्ट से है और इस लिहाज से आवागमन की द्रुत सुविधा सहित आधारभूत संरचना का विकास और विस्तार जरूरी है। इस मामले में भी देश का वह सूबा एक नये विकास मॉडल के तौर पर उभरने जा रहा है‚ जिसकी चर्चा अब तक देश की राजनीति में उसके बड़े आकार और पारंपरिक तौर पर सूत्रधार की भूमिका के तौर पर होती थी। ॥ उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार न सिर्फ अपने सौ दिन के विकास के एजेंडे में बल्कि इसके पूर्व के अपने कार्यकाल में भी देश की सबसे तेज रफ्तार सड़कों के रूप में ख्याति पाने लगी थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे‚ बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे‚ गंगा एक्सप्रेस वे से शुरू हुआ सिलसिला आगे और बढ़ने वाला है‚ क्योंकि इस मुद्े पर सरकार का खास जोर है। सुशासन की पहली शर्त या दरकार है कानून व्यवस्था का चुस्त और प्रभावी होना। गौरतलब है कि इस मामले में लंबे समय तक उत्तर प्रदेश का उदाहरण एक बड़ी असफलता के तौर पर रेखांकित और प्रचारित होता रहा है। पर अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। हाल के कई सर्वे और खासतौर पर पिछला विधानसभा चुनाव नतीजे का तथ्यात्मक विश्लेषण इस बात को साफ तौर पर रेखांकित करता है कि समाज से लेकर सरकार तक दिखने वाला माफिया तंत्र अब उत्तर प्रदेश में कल की बात हो चुकी है। माफिया–गुंडों का सिर उठाना अब यहां न सिर्फ मुश्किल है‚ बल्कि इस दिशा में हो रही फौरी और कठोर कार्रवाई देश में एक नई मिसाल बन रही है।
कानून–व्यवस्था की इस चुस्ती से प्रदेश में निवेश और विकास का एक अनुकूल माहौल बना है। बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार ने निवेशकर्ताओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए इस माहौल को जहां और आकर्षक बनाया है‚ वहीं रिश्वतखोरी पर लगाम और लालफीताशाही के खात्मे से यह अनुकूलता और सुoढ़ हुई है। प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम लागू होने से निवेशकों के लिए उद्योग धंधे लगाने का रास्ता आज पहले से कहीं ज्यादा सुगम है। इस सुगमता को विकास और औद्योगिक संवर्धन का तार्किक और संतुलित परिवेश बनाने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम यह है कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने और निवेशकों को आसानी से जमीन उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में जमीन की मैपिंग कराने की पहल शुरू हुई है। इसमें वन क्षेत्र से लेकर सड़क और ग्राम सभा की जमीन तक शामिल है ताकि निवेशकों को उद्योग के लिए जमीन मुहैया कराई जा सके। यह कार्य तेजी से हो इसके लिए सरकार ने तय किया है कि १० विभाग अपनी सारी अनुमति व अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था गति शक्ति एनपी पोर्टल से लिंक करेंगे।
इस पोर्टल पर यूपी के शहरी इलाकों में जलापूर्ति‚ पाइपलाइन‚ सीवर लाइन व ड्रेनेज के लिए मैपिंग करा कर उसकी जानकारी साझा की जा रही है। राज्य में विकास के लिए हो रहे इन प्रयासों का प्रतिफल एक गुणात्मक शक्ल के तौर पर सामने आया है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में ८० हजार करोड़ रुपये की लागत से शुरू होने वाली परियोजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। साफ है कि उत्तर प्रदेश देश में विकास के न सिर्फ एक नये मॉडल स्टेट के तौर पर उभर रहा है‚ बल्कि वह यह संकेत भी दे रहा है कि बीते वर्षो में सिर्फ देश की राजनीति का सूर्य अगर दक्षिणायन हुआ है‚ तो वहीं इस दौरान विकास का उत्तर सर्ग भी लिखा जा रहा है।






