बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह है। 7 जुलाई 2022 को RCP का संसदीय कार्यकाल समाप्त हो जाएगा यानी कि राज्यसभा के सदस्य नहीं रहेंगे। इसके साथ ही उनको अपने केंद्रीय मंत्रालय का प्रभार भी छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब आरसीपी सिंह दिल्ली से वापस आएंगे तो उन्हें संगठन में कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी। दरअसल, जनता दल यूनाइटेड में दो महत्वपूर्ण पद हैं। एक राष्ट्रीय अध्यक्ष का और दूसरा संसदीय बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष का।
फिलहाल जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह है और जेडीयू के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा है। अब इन दोनों नेताओं के रहते जेडीयू आरसीपी सिंह को कैसे फिट करेगी, यह बड़ा सवाल है। चुकी आरसीपीसी संगठन के व्यक्ति रहे थे। उनकी पकड़ जेडीयू के संगठन पर काफी हद तक है। ऐसे में जेडीयू चाहेगी कि वह संगठन के लिए काम करें। लेकिन, ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के रहते आरसीपी सिंह कैसे मैनेज किया जाएगा यह बड़ा सवाल है।
आरसीपी सिंह संगठन के व्यक्ति रहे हैं। राज्यसभा सांसद बनने के बाद वह लगातार JDU के संगठन को मजबूत करने में लगे रहते थे। यही वजह आरसीपी सिंह संगठन में JDU में अपनी अच्छी खासी पैठ बना ली थी। अब एक बार फिर से जब वह राज्यसभा के सदस्य नहीं रहेंगे तो उन्हें संगठन में लाने की तैयारी की जा रही है।
नहीं स्वीकार होगा नीचे का पद
आरसीपी सिंह बिना पद के भी संगठन के लिए काम कर सकते हैं। चुकिं वह पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं तो, उससे नीचे का कोई पद उन्हें स्वीकार नहीं होगा। ऐसे में वह एक नेता के तौर पर संगठन के लिए काम कर सकते हैं।
वैसे भी JDU में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ही चलती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई भी हो, लेकिन सारे फैसले नीतीश कुमार ही लेते हैं। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह फैसला ले लिया है कि आरसीपी सिंह राज्यसभा सांसद के तौर पर नहीं रहेंगे तो उन्हें संगठन में लाना है। तो ऐसे में संगठन में उन्हें कोई ना कोई पावर तो देना ही पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले आरसीपी सिंह एक बूथ के अध्यक्ष थे। दरअसल, JDU में जब नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो उन्होने एक बूथ- मजबूत बूथ का कांसेप्ट दिया था। इस लिहाज से मजबूत नेता होने की वजह से 2020 में नालंदा के मुस्तफापुर के बूथ, जिसपर आरसीपी सिंह वोट करते है। उस बूथ का अध्यक्ष बनाया गया। अभी संगठन के लिहाज से आरसीपी सिंह के पास वही पद है।
दो पदों पर हैं ललन सिंह
वही संगठन में अब ये भी चर्चा चलने लगी कि एक व्यक्ति एक पद का नियम है तो ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को छोड़ देना चाहिए। नाम नहीं बताने के अनुरोध पर एक नेता ने बताया कि ललन सिंह लोकसभा में जदयू संसदीय दल के नेता है और दूसरा पद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी उनके पास है। ऐसे में पार्टी के संविधान के मुताबिक ललन सिंह को अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए और वो पद एक बार फिर से आरसीपी सिंह को देना चाहिए।







