भारत ने भाजपा के दो नेताओं, जो अब पार्टी से निलंबित और निष्कासित किए जा चुके हैं, के पैगम्बर मोहम्मद से संबंधित विवादित बयान पर इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (ओआईसी) की टिप्पणियों को खारिज करते हुए दोटूक रुख दिखाया है।
ओआईसी की टिप्पणियों को ‘संकीर्ण सोच वाली, प्रेरित, भ्रमित और शरारतपूर्ण’ करार देते हुए इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत सभी धर्मो के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव रखता है, और 57 इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी का बयान निहित स्वार्थी तत्वों की शह पर उसके विभाजनकारी एजेंडा को उजागर करता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्रालय के इस मामले में बयानों पर भी भारत ने तीखा रुख दिखाते हुए कहा है कि अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले एक देश की किसी दूसरे देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर टिप्पणी गले नहीं उतर रही। इस विवादित बयान पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरने का प्रयास करते हुए कहा कि बयान देश की छवि धूमिल करने वाले हैं।
बहरहाल, दुनिया के दो अरब मुसलमानों की भावनाओं के साथ खड़े होने का दावा करने वाले ओआईसी को भारत ने माकूल जवाब दिया है। इसलिए कि यह संगठन सेलेक्टिव रवैया अपनाए हुए है। चीन में दस लाख से ज्यादा मुसलमानों को कैद करने और ‘कुरान को जब्त करने’ जैसे कृत्य पर ओआईसी कुछ नहीं करता। अफगानिस्तान, सीरिया और म्यांमार में कौन प्रताड़ित होते रहे हैं, किस से नहीं छिपा है।
तालिबान और आईएसआईएस के खिलाफ कुछ नहीं कर पाते। बल्कि इसके उलट ओआईसी का रवैया सांप्रदायिकता की आग को हवा देने का रहा है। पाकिस्तान जैसे देश किसी संगठन के मंच को अपना एजेंडा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने में सफल होते हैं, तो यकीनन कहा जा सकता है कि वह संगठन सभी धर्मो और आस्थाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित नहीं कर पा रहा है।
देखने वाली बात है कि भारत ने जिस तरह स्पष्ट रुख दिखाया है, वैसा आचरण वही देश कर सकता है कि जो सभी धर्मों के प्रति सम्मान की सोच रखता हो। विवादास्पद बयान पर कार्रवाई करके स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि ऐसे बयान भारत सरकार के विचारों को प्रदर्शित नहीं करते। ऐसे में ढंकी-दबी कुत्सित मंशा टिकने नहीं पाएगी।







